गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
ईएएए इंडिया अल्टरनेटिव्स का 1200 करोड़ का आईपीओ 26 अक्टूबर को खुलेगा​ | ‘मैं दक्षिण भारत से हूँ, तो लहज़ा झलकना ज़ाहिर है’, हिंदी एक्सेंट पर ट्रोल करने वालों को Rashmika Mandanna का करारा जवाब​ | SBI Life Smart Platina Plus: इस स्कीम में हर महीने कमाई का मौका, जानें क्या है 110% रिफंड का नियम​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

सहारनपुर मस्जिद विवाद: यूपी सरकार ने इलाहाबाद HC में दाखिल किया जवाब, जानें क्या है पूरा मामला​

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में यूपी सरकार और जिला प्रशासन ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया है, जिसके बाद हाईकोर्ट ने मस्जिद पक्ष को जवाब का अध्ययन करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है. अब मस्जिद पक्ष अदालत […]

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में यूपी सरकार और जिला प्रशासन ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया है, जिसके बाद हाईकोर्ट ने मस्जिद पक्ष को जवाब का अध्ययन करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है. अब मस्जिद पक्ष अदालत में अपना जवाब दाखिल करेगा. यह विवाद सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण से जुड़ा है. करीब 315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बने ढांचे को 5 सितंबर 2026 को पुलिस और अधिकारियों की मौजूदगी में ध्वस्त किया गया था.

बीते सितंबर में हुई सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मस्जिद गिराए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर तीन हफ्ते के अंदर जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था और साथ ही जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने मस्जिद मैनेजमेंट पर लगाए गए 6 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली पर रोक लगा दी थी.

सिटी मजिस्ट्रेट ने पहले लगाया था 6.41 करोड़ का जुर्माना

दरअसल, उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट, 1972 के तहत सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई को कलेक्ट्रेट परिसर में 315 स्क्वायर मीटर की मस्जिद को गिराने का आदेश दिया था और इसके मैनेजमेंट पर 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. इसके बाद मस्जिद मैनेजमेंट ने इस ऑर्डर को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चैलेंज किया, लेकिन डिस्ट्रिक्ट जज ने 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी और उसके बाद अधिकारियों ने 5 सितंबर को मस्जिद गिरा दी.

पिछली सुनवाइयों में क्या हुआ था?

पिटीशनर की ओर से सीनियर एडवोकेट आशीष कुमार सिंह ने इस मामले में दलील दी थी कि प्रॉपर्टी का टाइटल तय किए बिना ही खाली करने का ऑर्डर पास कर दिया गया था. उन्होंने कहा था कि प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड में वाहिद खान और याकूब खान के नाम थे. हालांकि इस पिटीशन का विरोध करते हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने कहा था कि पिटीशनर का स्टैंड उलटा है. उन्होंने कहा था कि पिटीशनर ने एक तरफ दावा किया था कि मस्जिद जमींदारी प्रॉपर्टी पर बनी थी और दूसरी तरफ यह वक्फ प्रॉपर्टी थी, जबकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को प्रोसिडिंग्स में पार्टी नहीं बनाया गया था.

मनीष गोयल ने कहा था कि विवादित प्रॉपर्टी कलेक्ट्रेट कचहरी के नाम पर दर्ज थी. उन्होंने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड में शुरू में वाहिद खान का नाम था और बाद में 1956 में वाहिद खान, कलेक्ट्रेट कचहरी और याकूब खान के नाम दिखाए गए. उन्होंने आगे तर्क दिया था कि ब्रिटिश काल में जमीन केंद्र सरकार के मालिकाना हक में थी और बाद में राज्य के पास चली गई. हालांकि पिटीशनर ने तर्क दिया था कि मस्जिद वक्फ रजिस्टर में रजिस्टर्ड थी और अधिकारियों ने इस बात पर ठीक से विचार नहीं किया था.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY