जब हम अपनी गाढ़ी कमाई को म्यूचुअल फंड में लगाते हैं, तो मन में एक डर हमेशा बना रहता है. खासकर तब जब शुरुआती एकदो सालों में मार्केट क्रैश हो जाए या रिटर्न निगेटिव दिखने लगे. ऐसे में ज्यादातर निवेशक अपनी एसआईपी बंद करने का मन बना लेते हैं. लेकिन शेयरमार्केट बाय फोनपे की एक रिपोर्ट ने 20 साल के आंकड़ों का विश्लेषण कर एक चौंकाने वाला सच सामने रखा है. अगर आप शुरुआती झटकों से डरे बिना अपनी एसआईपी को 5 साल तक जारी रखते हैं, तो आपका पैसा डूबने की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है.

शुरुआती 2 साल का निगेटिव रिटर्न नहीं है खतरे की घंटी
फोनपे की रिपोर्ट में जून 2026 तक के पिछले दो दशकों के डेटा का अध्ययन किया गया है. इसके मुताबिक निफ्टी 500 टीआरआई में दो साल का सालाना एसआईपी रिटर्न 25 प्रतिशत से अधिक बार 5 प्रतिशत से नीचे गिरा है. जिन निवेशकों की एसआईपी ने शुरुआती दो साल में निगेटिव रिटर्न दिया, अगर उन्होंने 5 साल तक निवेश जारी रखा, तो उनके नुकसान की संभावना शून्य हो गई. लगभग 69 प्रतिशत मामलों में 5 साल का सालाना रिटर्न उछलकर दहाई के आंकड़े में पहुंच गया. ये आंकड़े साबित करते हैं कि शॉर्ट टर्म में बाजार का सुस्त रहना एक आम बात है.
ऐसे काम करता है रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का मैजिक
अगर शुरुआती 2 साल बहुत खराब रहे हों, तब भी अगले 3 साल तक एसआईपी जारी रखने पर रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का असली जादू देखने को मिलता है. रिपोर्ट के मुताबिक जिन निवेशकों को शुरुआत में घाटा हुआ, उनमें से 53 प्रतिशत मामलों में निवेशकों को अंत में 15 से 20 प्रतिशत तक का शानदार सालाना रिटर्न मिला. सबसे बड़ी बात ये है कि अगर किसी ने 5 साल तक एसआईपी चलाई, तो उसका रिटर्न कभी निगेटिव नहीं रहा. जिन्हें शुरू में 0 से 5 प्रतिशत का रिटर्न मिला था, उनका रिटर्न भी 5 साल बाद 5 प्रतिशत के ऊपर ही रहा. 72 प्रतिशत मामलों में तो ये उछलकर डबल डिजिट में आ गया.
दस साल के निवेश में मिलता है बंपर मुनाफा
जो निवेशक बाजार में 7 या 10 साल तक टिके रहे, उनका कैपिटल लॉस रिस्क ऐतिहासिक रूप से जीरो हो गया. 10 साल की अवधि में एसआईपी ने लगभग 90 प्रतिशत बार दहाई के अंक में रिटर्न दिया है. 10 साल के निवेश में 65 प्रतिशत बार रिटर्न 10 से 15 प्रतिशत के दायरे में रहा. अगर इसमें 15 से 20 प्रतिशत वाले रिटर्न ब्रैकेट को भी मिला दें, तो लंबी अवधि के निवेश में अच्छे मुनाफे की संभावना 90 प्रतिशत तक पहुंच जाती है.
घबराहट में निवेश बंद करना है बेवकूफी
फोनपे में म्यूचुअल फंड के हेड नीलेश डी नाइक का कहना है कि बाजार के उतारचढ़ाव में निवेशकों का परेशान होना स्वाभाविक है. लेकिन पिछले दो दशकों का प्रदर्शन बताता है कि शुरुआती साल एसआईपी का अंतिम नतीजा तय नहीं करते. लंबी अवधि तक बाजार में रुकने से कंपाउंडिंग की असली ताकत का फायदा मिलता है. नाइक ने ये भी बताया कि निवेश के लिए फंड चुनते समय हमेशा कुछ खास पैमानों का ध्यान रखना चाहिए. इनमें ধারাবাহিকता, जोखिम प्रबंधन, निवेश की शैली जैसी चीजें शामिल हैं. इनकी मदद से एक मजबूत पोर्टफोलियो बनाया जा सकता है जो लंबी अवधि में अच्छी सफलता दिलाएगा.
म्यूचुअल फंड एसआईपी कोई दो साल का प्रोडक्ट नहीं है. ये लंबी अवधि के लिए संपत्ति बनाने का एक बेहतरीन टूल है. एसआईपी की सफलता को 24 महीने के प्रदर्शन से आंकना वैसा ही है, जैसे किसी मैराथन रनर को उसकी शुरुआती दौड़ से जज करना. इसलिए जब बाजार में मंदी हो, तो घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखना ही समझदारी है. बाजार में लंबा समय बिताने का मतलब हर तरह के जोखिम को खत्म करना नहीं है, बल्कि ये महंगाई को मात देने के मौके को काफी हद तक बढ़ा देता है.