बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
राहुल-प्रियंका पर एफआईआर से गरमाई सियासत​ | RBI New Rules: बैंक ग्राहकों के लिए बदलने जा रहे हैं ये नियम, उछले पाइन लैब्स और CAMS के शेयर​ | UP IPS Transfer List: उत्तर प्रदेश में 20 IPS अफसरों के तबादले, कई जिलों के SP-SSP बदले, लखनऊ से लेकर जौनपुर-बस्ती तक फेरबदल​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

RBI Repo Rate Hike: रेपो रेट 0.25% बढ़ा, 50 लाख के होम लोन पर कितनी बढ़ेगी आपकी EMI?​

RBI Repo Rate Hike: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने बुधवार को ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स यानी 0.25% की बढ़ोतरी का बड़ा फैसला किया है. रेपो रेट में इस ताजा इजाफे का सीधा असर उन तमाम लोगों पर पड़ेगा, जिन्होंने फ्लोटिंग दरों पर लोन ले रखा है. रेपो रेट बढ़ने […]

RBI Repo Rate Hike: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने बुधवार को ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स यानी 0.25% की बढ़ोतरी का बड़ा फैसला किया है. रेपो रेट में इस ताजा इजाफे का सीधा असर उन तमाम लोगों पर पड़ेगा, जिन्होंने फ्लोटिंग दरों पर लोन ले रखा है. रेपो रेट बढ़ने के कारण बैंकों के लिए कर्ज की लागत बढ़ जाएगी और वे इसका बोझ अपने ग्राहकों पर डालना शुरू कर देंगे.

50 लाख के होम लोन पर कितना पड़ेगा बोझ?

फ्लोटिंगरेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई सीधे तौर पर रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी होती है. जैसे ही बैंक अपनी ब्याज दरें रीसेट करेंगे, ग्राहकों की मासिक किस्त बढ़ जाएगी.

अगर किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल की अवधि के लिए लिया है, तो 0.25% की बढ़ोतरी के बाद उसकी मासिक ईएमआई करीब 780 रुपये बढ़ जाएगी. यदि वो लोन की अवधि में कोई बदलाव नहीं करता है, तो पूरे 20 साल के दौरान उसे ब्याज के रूप में लगभग 1.88 लाख रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे. वहीं, 25 साल की अवधि वाले 50 लाख रुपये के लोन का हिसाब समझें तो गणित और बड़ा हो जाता है.

  1. पहले 7.5% की दर पर मासिक ईएमआई 36,950 रुपये बनती थी.
  2. 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी के बाद ब्याज दर 7.75% हो जाएगी और ईएमआई बढ़कर 37,766 रुपये हो जाएगी.
  3. इसका मतलब है कि हर महीने ईएमआई में 816.87 रुपये का सीधा इजाफा देखने को मिलेगा.
  4. पूरे 25 साल में कुल ब्याज 60,84,870 रुपये से बढ़कर 63,29,931 रुपये हो जाएगा, जिससे ब्याज का कुल खर्च 2,45,063 रुपये बढ़ जाएगा.

फिक्स्डरेट होम लोन वाले ग्राहकों पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन नए लोन लेने वालों या रीफाइनेंसिंग कराने वालों के लिए लागत बढ़ जाएगी.

लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प कितना सही?

ब्याज दरें बढ़ने पर कई बैंक ग्राहकों को ये राहत देते हैं कि वे अपनी मासिक ईएमआई बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि लंबी कर लें. देखने में ये विकल्प सुविधाजनक लगता है क्योंकि हर महीने का बजट नहीं बिगड़ता, लेकिन हकीकत में ये काफी महंगा सौदा साबित होता है. लोन की अवधि बढ़ाने से मूलधन धीरेधीरे चुकता होता है, जिससे लंबे समय में कुल ब्याज का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. इसलिए जानकारों का मानना है कि केवल फौरी राहत के लिए अवधि बढ़ाने का फैसला करने से बचना चाहिए.

ईएमआई के असर से बचने के क्या करें

  1. आंशिक प्रीपेमेंट: अगर आपके पास कोई अतिरिक्त फंड या बोनस आता है, तो उससे लोन का कुछ हिस्सा समय से पहले चुका दें. इससे मूलधन कम होगा और ब्याज का कुल भार घटेगा.
  2. बैंक बदलना : अगर आपका मौजूदा बैंक ज्यादा ब्याज ले रहा है, तो कम ब्याज दर वाले बैंक में लोन ट्रांसफर कराने पर विचार करें.
  3. लोन की अवधि घटाना: संभव हो तो मासिक ईएमआई थोड़ी बढ़ाकर लोन को तय समय से पहले खत्म करने की योजना बनाएं.
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY