रुपए में लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली. खास बात तो ये है कि रुपए में लगातार दूसरे दिन 50 पैसे या उससे ज्यादा का इजाफा देखने को मिला है. आंकड़ों को देखें तो दो दिनों में रुपए में डॉलर के सामने 1 रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिल चुकी है. ऐसा कम ही देखने को मिलता है, जब रुपए में लगातार दो दिनों में इतनी बड़ी तेजी देखने को मिले. जानकारों की मानें तो करेंसी मार्केट में आरबीआई के दखल देने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने की वजह से रुपए में तेजी देखने को मिली है. वहीं डॉलर के शांत रहने का फायदा भी रुपए को मिलता हुआ दिखाई दिया है.

जानकारों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष में थोड़े राहत के संकेत मिलने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आने का असर भी रुपए पर देखने को मिला है. जैसा कि टीवी9 हिंदी डिजिटल की रिपोर्ट में पहले भी इस बात के संकेत दिए गए थे कि आने वाले दिनों में रुपए में और इजाफा देखने को मिल सकता है. जानकारों की मानें तो माहौल ऐसा ही बना रहता है कि आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले में रुपया 94 के लेवल पर भी दिखाई दे सकता है.
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि 97 के लेवल पर आने वाले रुपए पर बड़ा संकट टल गया है? क्या आने वाले दिनों में रुपए में तेजी देखने को मिल सकती है? क्या डॉलर के मुकाबले में रुपए में आई तेजी शॉर्ट टर्म तो नहीं है? आइए करेंसी मार्केट के आंकड़ों को देखते हुए इन सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं?
रुपए में आई ताबड़तोड़ तेजी
शुक्रवार को लगातार दूसरे सत्र में रुपया मज़बूत हुआ और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी तथा रिज़र्व बैंक के कथित हस्तक्षेप के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.73 (अस्थायी) पर बंद हुआ. फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि बाज़ारों को कुछ राहत मिली, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की टिप्पणियों से संकेत मिला कि ईरान की स्थिति से जुड़ी कूटनीतिक बातचीत एक रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. इसके अलावा, घरेलू इक्विटी में तेज़ी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने भी रुपये को सहारा दिया.
इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.30 पर खुला, फिर इंट्राडे ट्रेड में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.30 के इंट्राडे उच्च स्तर और 95.68 के निचले स्तर को छुआ. शुक्रवार को ट्रेडिंग सत्र के अंत में, रुपया 95.73 (अस्थायी) पर था, जो इसके पिछले बंद भाव से 63 पैसे अधिक था. गुरुवार को, रुपया अपने अब तक के सबसे निचले बंद भाव से 50 पैसे सुधरा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.36 पर बंद हुआ. इसका मतलब है कि लगातार दो दिनों में रुपए में 113 पैसे यानी 1.13 रुपए की तेजी देखने को मिल चुकी है.
इस तेजी पर क्या कह रहे हैं जानकार?
मीराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच अनिश्चितता के चलते रुपया नकारात्मक रुझान के साथ ट्रेड करेगा, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है. हालांकि, शांति समझौते को लेकर आशावाद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी निचले स्तरों पर रुपये को सहारा दे सकती है. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी नरम हो रही हैं, जिससे घरेलू मुद्रा को भी सहारा मिल सकता है. USD-INR स्पॉट प्राइस 95.50 से 96.30 की सीमा में ट्रेड करने की उम्मीद है.
DSP म्यूचुअल फंड के प्रोडक्ट्स और मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट, SVP, साहिल कपूर ने एक रिसर्च नोट में कहा कि यह रुपये से जुड़े असेट्स खरीदने का समय है, न कि उनके खिलाफ दांव लगाने का. उन्होंने कहा कि करेंसीज , ब्याज दरें और प्रवाह स्वाभाविक रूप से चक्रीय होते हैं. इन दबे हुए REER स्तरों और कड़े महंगाई अंतरों पर रुपए के खिलाफ दांव लगाना कम संभावना वाला ट्रेड है. इसके विपरीत, डेटा से पता चलता है कि अब इक्विटी और बॉन्ड, दोनों में ही रुपये में मूल्यांकित एसेट्स में निवेश करने का समय आ गया है.
क्या कह रहे हैं बाजार के आंकड़े?
इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 99.29 पर ट्रेड कर रहा था, जो 0.04 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है. वैश्विक तेल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार में 2.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 104.82 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था. घरेलू इक्विटी बाजार के मोर्चे पर, सेंसेक्स 231.99 अंक चढ़कर 75,415.35 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 64.60 अंक बढ़कर 23,719.30 पर पहुंच गया.
Khabar Monkey
एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को शुद्ध आधार पर 1,891.21 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इस बीच, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि सरकार रुपये के कमजोर होने और बढ़ते व्यापार घाटे के बीच, बढ़ते चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करने के लिए कई उपायों पर विचार कर रही है.





