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Meerut Blue Drum Case: मुस्कान को मेरठ नहीं, मथुरा जेल में दी जा सकती है फांसी! जानिए क्या है वजह​

:  के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में  और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि अगर सजा पर अंतिम मुहर लगती है, तो दोनों को फांसी कहां दी जाएगी। मुस्कान के मामले में मथुरा जेल का नाम चर्चा में है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में महिलाओं को फांसी देने […]

:  के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में  और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि अगर सजा पर अंतिम मुहर लगती है, तो दोनों को फांसी कहां दी जाएगी। मुस्कान के मामले में मथुरा जेल का नाम चर्चा में है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में महिलाओं को फांसी देने के लिए विशेष व्यवस्था वाला फांसीघर मथुरा जेल में मौजूद है। हालांकि, फिलहाल फांसी की तारीख तय नहीं हुई है और दोनों के मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

इस बीच निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के दोषियों को फांसी देने की प्रक्रिया में शामिल रहे मेरठ के पवन जल्लाद ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें आधिकारिक आदेश मिलता है, तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।

मथुरा जेल में ही क्यों हो रही फांसी की चर्चा?

सौरभ राजपूत हत्याकांड में और साहिल शुक्ला को 14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मृत्युदंड सुनाया था। इसके बाद से ही यह सवाल उठ रहा है कि सजा पर अमल होने की स्थिति में फांसी की व्यवस्था कहां की जाएगी। दरअसल, उत्तर प्रदेश में महिलाओं को फांसी देने के लिए विशेष फांसीघर मथुरा जेल में मौजूद है। इसी वजह से मुस्कान को फांसी दिए जाने की स्थिति में मथुरा जेल का नाम सामने आ रहा है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि उसे वहीं फांसी दी जाएगी। मृत्युदंड के फैसले के बाद जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होनी होती है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार संबंधित अधिकारियों के आदेश पर ही होगी।

पवन जल्लाद बोले आदेश मिला तो निभाऊंगा जिम्मेदारी

मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पवन जल्लाद ने कहा कि अगर उन्हें दोनों को फांसी देने के लिए आधिकारिक तौर पर बुलाया जाता है, तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। पवन जल्लाद निर्भया मामले के चार दोषियों को फांसी देने की प्रक्रिया में शामिल रहे थे। उन्होंने सौरभ राजपूत हत्याकांड को गंभीर और अमानवीय बताते हुए अदालत के फैसले पर संतोष जताया। उनका कहना है कि अगर संबंधित अधिकारियों की ओर से आदेश मिलता है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आधिकारिक आदेश मिलने से पहले फांसी की तारीख या उसे अमल में लाने को लेकर कोई निश्चित बात नहीं कही जा सकती।

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फांसी से पहले डेथ वारंट जारी होना जरूरी

अदालत से मृत्युदंड  मिलने का मतलब यह नहीं है कि दोषियों को तुरंत फांसी दे दी जाएगी। इसके लिए कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। सबसे पहले सत्र अदालत के मृत्युदंड के फैसले की हाईकोर्ट से पुष्टि होनी आवश्यक है। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार भी होता है। इसके बाद मामले की परिस्थितियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में अपील और दया याचिका जैसे कानूनी विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं। जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद संबंधित अदालत डेथ वारंट जारी करती है। इसी वारंट में फांसी से जुड़ी तारीख और आवश्यक निर्देश निर्धारित किए जाते हैं। इसलिए मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बावजूद फिलहाल फांसी मार्च 2025 में सामने आया था। मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर उनकी हत्या करने और शव को छिपाने के आरोप लगे थे। जांच में सामने आया कि सौरभ के शव के टुकड़े करके उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया था। आरोपियों पर शव को सीमेंट की मदद से छिपाने की कोशिश करने का भी मामला सामने आया।

इस घटना ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। मामले की जांच और सुनवाई के बाद मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी। फिलहाल, इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। ऐसे में मथुरा जेल में फांसी दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन अंतिम फैसला होने तक इसे तय नहीं माना जा सकता। 

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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