IndiaNew Zealand FTA: दशहरे के शुभ मौके पर भारत के व्यापारिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है. भारत व न्यूजीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता आज यानी 20 अक्टूबर से लागू हो गया है. ये समझौता भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 फीसदी ड्यूटीफ्री पहुंच प्रदान करेगा, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों , महिला उद्यमियों, किसानों और कारीगरों के लिए नए अवसर खुलेंगे. इससे अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश आने की उम्मीद है, जो मैन्युफैक्चरिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कृषि और इनोवेशन के क्षेत्रों में अवसर पैदा करेगा. दोनों पक्षों ने साल 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए लगभग 18 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर की आवश्यकता होगी.

कपड़ा से लेकर फार्मा सेक्टर तक टैरिफ में बड़ी राहत
कपड़ा, परिधान , चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रमप्रधान सेक्टर्स को 10 फीसदी तक के टैरिफ खत्म होने से फायदा मिलने की उम्मीद है. इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, केमिकल्स और कृषि उत्पादों को भी बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है. न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि ये समझौता प्रमुख सेक्टर्स के निर्यातकों के लिए अवसर पैदा करेगा. उन्होंने कहा कि एक बार पूरी तरह से लागू होने के बाद, भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के मौजूदा निर्यात के 95 फीसदी हिस्से को टैरिफ खत्म होने या टैरिफ में भारी कटौती से फायदा होगा, जिससे हमारे कई प्रमुख निर्यात सेक्टर्स में नए अवसर पैदा होंगे. न्यूजीलैंड के कुछ उत्पादों पर टैरिफ में कटौती की गई है, जिनमें शहद, सेब, कीवीफ्रूट, मिल्क एल्बुमिन सहित एल्बुमिन, वाइन, फार्मास्यूटिकल्स, पॉलिमर और एल्युमीनियम जैसे उत्पाद शामिल हैं.
भारतीय छात्रों को गारंटीड वर्क वीजा के साथ तेज कस्टम क्लीयरेंस
शिक्षा के लिए न्यूजीलैंड जाने वाले युवा भारतीयों को अब गारंटीड वर्क वीजा दिया जाएगा, जिससे वे एक तय अवधि के लिए देश में प्रशिक्षण ले सकेंगे और काम कर सकेंगे. ये समझौता कार्गो के लिए 48 घंटे के भीतर और एक्सप्रेस व जल्दी खराब होने वाले सामानों के लिए 24 घंटे के भीतर कस्टम क्लीयरेंस प्रदान करता है. योग्य स्टेटस होल्डर्स के लिए डिजिटल सर्टिफिकेशन और रूल्स ऑफ ओरिजिन के सेल्फसर्टिफिकेशन का उद्देश्य प्रक्रिया में होने वाली देरी और अनुपालन लागत को कम करना है.
घरेलू किसानों की सुरक्षा के साथ कृषि तकनीक में साझेदारी
पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय किसानों को फलों, सब्जियों, मसालों और अन्य कृषि उत्पादों के लिए व्यापक बाजार पहुंच मिलेगी, साथ ही उत्पादकता में सुधार, उच्च आय में सहायता और आजीविका को मजबूत करने के लिए सहयोग मिलेगा. एफटीए समझौता घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए टैरिफरेट कोटा, न्यूनतम आयात मूल्य और अन्य सुरक्षा उपायों के माध्यम से न्यूजीलैंड के सेब, कीवीफ्रूट और मनुका शहद के लिए संतुलित बाजार पहुंच प्रदान करता है. इसमें सेब, कीवीफ्रूट और शहद के लिए उत्पादकता में सुधार, तकनीक अपनाने और सप्लाई चेन पर केंद्रित कृषि सहयोग पहल भी शामिल है. समझौते के हिस्से के रूप में, भारत और न्यूजीलैंड एक कृषि उत्पादकता साझेदारी शुरू करेंगे. ये पहल कई क्षेत्रों में भारत के कृषि इकोसिस्टम को बेहतर बनाने के लिए सटीक खेती और संबंधित तकनीकों में न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता का उपयोग करेगी.
भारत ने इन उत्पादों को समझौते से रखा बाहर
भारत ने डेयरी उत्पादों, प्याज, चीनी, चना, मटर, मक्का, बादाम और विभिन्न वसा व तेलों, जेम्स एंड ज्वैलरी, एल्युमीनियम, तांबा, हथियार और गोलाबारूद को इस समझौते से बाहर रखा है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि ये संबंध केवल बाजार पहुंच और एकदूसरे को अधिक निर्यात करने के बारे में नहीं हैं, बल्कि फोकस एक मजबूत और स्थायी आर्थिक साझेदारी बनाने पर है. अग्रवाल ने कहा कि न्यूजीलैंड का 60 से 70 फीसदी व्यापार एशियाप्रशांत क्षेत्र में केंद्रित है, जहां कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के उस देश के साथ भारत की तुलना में अधिक मजबूत व्यापारिक संबंध हैं.