
झारखंड के निलंबित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को शीर्ष अदालत से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। हजारीबाग वनभूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद अब निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे का जेल से बाहर आने का मार्ग पूरी तरह से साफ हो गया है।
हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद पहुंचे थे शीर्ष अदालत
इससे पूर्व विनय कुमार चौबे ने इस मामले में रिहाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 28 अप्रैल को उनकी जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां उनके वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने उन्हें राहत देने का फैसला सुनाया।
हजारीबाग डीसी रहने के दौरान का है पूरा मामला
दरअसल यह पूरा विवाद विनय कुमार चौबे के हजारीबाग जिले में उपायुक्त (DC) के पद पर तैनात रहने के दौरान का है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए वन विभाग की भूमि की अवैध खरीद-बिक्री और वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा दिया। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कांड संख्या 11/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी कार्रवाई के क्रम में एसीबी ने विनय चौबे को नवंबर 2025 में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।