रविवार, 9 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
‘राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत का अपमान बर्दाश्त नहीं, यह भारत की आन-बान-शान’, तिरंगा यात्रा में गरजे सीएम योगी​ | 2026 Maruti Brezza vs Tata Nexon: कीमत से लेकर सेफ्टी और परफॉर्मेंस तक, जानिए कौन-सी SUV है सबसे बेहतर​ | Mahesh Babu Birthday: 9 साल का ब्रेक और South Cinema का ‘बादशाह’ बनने तक का सफर, जानें अनसुने Facts​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

US-Iran Deal से भारत को राहत! 10 साल की बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट​

अमेरिका और ईरान के बीच अस्थाई समझौते की खबरों का भारतीय बाजारों पर भी दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भारतीय सरकारी बॉन्ड में खरीदारी बढ़ी और 10 साल की बॉन्ड यील्ड 12 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गई. इससे अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है. बाजार में […]

अमेरिका और ईरान के बीच अस्थाई समझौते की खबरों का भारतीय बाजारों पर भी दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भारतीय सरकारी बॉन्ड में खरीदारी बढ़ी और 10 साल की बॉन्ड यील्ड 12 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गई. इससे अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है. बाजार में 6.94% 2036 सरकारी बॉन्ड की यील्ड 3.2 बेसिस पॉइंट घटकर 6.8637% पर आ गई. यह 25 मार्च के बाद का सबसे निचला इंट्राडे स्तर है. हालांकि यह अभी भी संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर से करीब 20 बेसिस पॉइंट ऊपर बनी हुई है.

कच्चे तेल में गिरावट से बढ़ी राहत

अमेरिका और ईरान के अधिकारियों ने मध्यपूर्व में तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में शुरुआती समझौते की जानकारी दी. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड का भाव 4.5% गिरकर 83.40 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 10 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले संघर्ष बढ़ने के दौरान तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं.

भारत के लिए क्यों अहम है तेल की कीमतों में गिरावट?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है. ऐसे में तेल की कीमतों में कमी से देश के आयात बिल पर दबाव घट सकता है. इसके अलावा महंगाई नियंत्रित रखने, रुपये को मजबूती देने और चालू खाते के घाटे को कम करने में भी मदद मिल सकती है. इस सकारात्मक माहौल का असर मुद्रा बाजार में भी देखने को मिला. भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 94.5750 के स्तर पर पहुंच गया, जो करीब पांच सप्ताह का उच्चतम स्तर माना जा रहा है.

विदेशी निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर वैश्विक संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बॉन्ड बाजार के लिए अनुकूल साबित हो सकती है. एडेलवाइस म्यूचुअल फंड के प्रेसिडेंट एवं CIO धवल दलाल के अनुसार, सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश बढ़ने से 10 साल की यील्ड निकट भविष्य में 6.75% से 6.80% के दायरे तक आ सकती है.

वहीं निवेशकों की नजर ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में भारत को संभावित रूप से शामिल किए जाने पर भी बनी हुई है. पिछले छह कारोबारी सत्रों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड में 1.6 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिससे बाजार का भरोसा मजबूत हुआ है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY