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Houthi Attack Saudi Arabia: मक्का के पास ड्रोन को लेकर सऊदी-हूती आमने-सामने, हूतियों ने किया इनकार, F-15 गिराने का भी दावा​

Houthi Attack Saudi Arabia: और के बीच बढ़ता तनाव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, इससे पहले कि वह पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होता। हालांकि, हूती पक्ष ने […]

Houthi Attack Saudi Arabia: और के बीच बढ़ता तनाव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, इससे पहले कि वह पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होता। हालांकि, हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है।

इस घटना के बादमें सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। दूसरी ओर यमन में हूती ठिकानों पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की सैन्य कार्रवाई जारी रहने की खबर है। हाल के दिनों में दक्षिणी सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें नागरिकों के घायल होने की जानकारी दी गई है। तनाव का असर सऊदी अरब के तेल और समुद्री ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है। लाल सागर के यानबू बंदरगाह पर तेल लोडिंग रोके जाने की रिपोर्ट सामने आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में तेल आपूर्ति और प्रमुख समुद्री रास्तों को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है।

मक्का में पहली बार ‘एयर रेड अलर्ट’

सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच मक्का शहर में पहली बार ‘एयर रेड अलर्ट’ जारी किया गया। सऊदी सिविल डिफेंस ने शहर में हवाई सुरक्षा को लेकर आपातकालीन चेतावनी जारी की। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, एक हूती ड्रोन को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। खतरा टलने के बाद कुछ ही देर में अलर्ट वापस ले लिया गया। हालांकि, मक्का जैसे बेहद संवेदनशील और पवित्र शहर में इस तरह की हवाई सुरक्षा चेतावनी जारी होना अपने आप में असामान्य घटना रही। इसे सितंबर 2026 के दौरान बढ़े क्षेत्रीय तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा गया।

मक्का को निशाना बनाने के दावे पर हूतियों का इनकार

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता के मुताबिक, मक्का की ओर बढ़ रहे ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराया गया। सऊदी पक्ष ने इस घटना को गंभीर सुरक्षा मामला बताया है। वहीं, हूती प्रतिनिधियों ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज किया है। उनका कहना है कि पवित्र स्थलों को निशाना बनाने का दावा गलत है। ऐसे में ड्रोन के वास्तविक लक्ष्य को लेकर दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर है।

हूतियों का दावा सऊदी F15 लड़ाकू विमान मार गिराया

मक्का ड्रोन विवाद के बीच हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने एक और बड़ा दावा किया है। उनके मुताबिक, हूती बलों ने यमन के मारिब गवर्नरेट के आसमान में सऊदी अरब के एक F15 लड़ाकू विमान को सतह से हवा में मार करने वाली से निशाना बनाकर गिरा दिया। हूती पक्ष का दावा है कि यह विमान मारिब में चल रहे सैन्य अभियान के दौरान हमले के लिए पहुंचा था। सरी ने यह भी कहा कि विमान के मलबे की तलाश में पहुंचे अन्य सऊदी लड़ाकू विमानों को भी निशाना बनाया गया। हालांकि, F15 को मार गिराए जाने के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से इस दावे पर तत्काल पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

OIC ने मक्कामदीना को लेकर जताई चिंता

मक्का और मदीना से जुड़े घटनाक्रम के बीच ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन ने पवित्र स्थलों और नागरिक इलाकों को निशाना बनाए जाने की निंदा की है। संगठन ने धार्मिक स्थलों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है।

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यमन सरकार ने बताया क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

यमन सरकार ने भी हूतियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताई है। सरकार के मुताबिक, हालात अब केवल यमन के अंदर चल रहे संघर्ष तक सीमित नहीं हैं और इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। यमन में सऊदी समर्थित सरकारी बलों और हूती लड़ाकों के बीच कई इलाकों में संघर्ष तेज होने की खबर है। हाल के दिनों में ताइज और लाल सागर के तटीय इलाकों में भी सैन्य कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई है।

सऊदी क्राउन प्रिंस ने मिस्र में की अहम बैठक

बढ़ते तनाव के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अलसिसी से काहिरा में मुलाकात की। दोनों देशों के बीच बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा और लाल सागर में समुद्री आवाजाही जैसे मुद्दे अहम रहे हैं। लाल सागर और बाब अलमंदब स्ट्रेट की सुरक्षा इस पूरे घटनाक्रम में खास महत्व रखती है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।

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यानबू में तेल लोडिंग पर भी असर

सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह से तेल लोडिंग रोके जाने की रिपोर्ट ने इस संघर्ष के आर्थिक असर को भी सामने ला दिया है। शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि यह कदम सऊदी अरब की तेल सप्लाई से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हुए हालिया हमलों के बाद उठाया गया। इस बीच यमन में हवाई हमले, ड्रोन और मिसाइल हमले तथा सीमा क्षेत्रों में झड़पों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में सऊदी अरब और हूतियों के बीच आगे की सैन्य कार्रवाई पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

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संपादकीय टीम

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