कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि सरफेस कोल और लिग्नाइट गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की 37,500 करोड़ रुपए की योजना के तहत पांच कंपनियों से सात प्रोजेक्ट के लिए आवेदन मिले हैं. इन कंपनियों में NTPC और अडानी एंटरप्राइजेज शामिल हैं. अन्य आवेदकों में तालचर फर्टिलाइजर्स, अडानी एंटरप्राइजेज, गैलेंट इस्पात और श्याम सेल एंड पावर शामिल हैं. अडानी एंटरप्राइजेज ने यूरिया बनाने वाले प्रोजेक्ट के लिए तीन अलगअलग आवेदन जमा किए हैं.

तालचर फर्टिलाइजर्स ने भी यूरिया प्रोजेक्ट के लिए मदद मांगी है. गैलेंट स्टील ने डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन और सिनगैस बनाने के प्रोजेक्ट का प्रस्ताव दिया है, जबकि NTPC ने सिंथेटिक नेचुरल गैस प्रोजेक्ट के लिए आवेदन किया है. श्याम सेल एंड पावर ने सिनगैस प्रोडक्शन प्रोजेक्ट का प्रस्ताव दिया है. कोयला मंत्रालय ने जुलाई में आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी और पहला राउंड 7 सितंबर को खत्म हुआ.
घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना योजना का मकसद
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस साल मई में 37,500 करोड़ रुपए के कुल वित्तीय खर्च वाली इस योजना को मंजूरी दी थी. इसका मकसद कोयले और लिग्नाइट के गैसीफिकेशन को बढ़ावा देना और घरेलू संसाधनों को सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसे ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों में बदलना है.
- इस पहल का मकसद लिक्विफाइड नेचुरल गैस , यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है. वित्त वर्ष 2025 में इन उत्पादों का आयात लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपए का था.
- सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से 25 प्रोजेक्ट में 2.53 लाख करोड़ रुपए का निवेश आएगा और लगभग 50,000 डायरेक्टर और इनडायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी.
- सरकार की योजना 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीफिकेशन क्षमता बनाने की भी है. इसमें से 75 मिलियन टन क्षमता 37,500 करोड़ रुपए की योजना के तहत विकसित होने की उम्मीद है.
- यह कार्यक्रम नेशनल कोल गैसीफिकेशन मिशन और जनवरी 2024 में मंजूर की गई 8,500 करोड़ रुपए की वित्तीय प्रोत्साहन योजना पर आधारित है. पिछली योजना के तहत आठ प्रोजेक्ट अभी लागू किए जा रहे हैं.
पहले राउंड के बाद क्या होगा?
पहले राउंड में जमा किए गए आवेदनों की समीक्षा अब योजना के दिशानिर्देशों और रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल के आधार पर की जाएगी. कोयला मंत्रालय ने 8 सितंबर को आवेदन का दूसरा दौर शुरू किया. रोलिंग एप्लीकेशन प्रोसेस के तहत, हर दो महीने में नए विंडो खोले जाएंगे. इससे कंपनियों को अपने प्रस्ताव तब जमा करने की सुविधा मिलेगी, जब उनके प्रोजेक्ट स्कीम की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार हों.