हमारी डाइट और लाइफस्टाइल इतना ज्यादा खराब हो गया है कि हमारी बॉडी को पोषक तत्व कम और टॉक्सिन ज्यादा मिलते हैं। हम जो भी खाना खाते हैं उसमें कुछ न कुछ टॉक्सिन जरूर होते हैं। ये टॉक्सिन या तो ग्रीसी पार्टिकल्स हो सकते हैं जो इंटेस्टाइन में चिपक जाते हैं या फिर छोटे-छोटे डर्टी पार्टिकल्स होते हैं जो खाने के जरिए हमारी बॉडी में पहुंच जाते हैं। अगर आपको सिगरेट या अल्कोहल लेने की ज्यादा हैबिट्स है तो ये टॉक्सिन बॉडी में ज्यादा मात्रा में जमा होते हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि हमारा खराब लाइफस्टाइल और खराब डाइट की कुछ आदतें आंतों की अंदरूनी परत (Gut Lining) को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। जब यह परत कमजोर होती है, तो शरीर बीमारियों का घर बनने लगता है।

आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के जानकार डॉक्टर सलीम जैदी, जो पिछले करीब 15 वर्षों से प्राकृतिक और पारंपरिक तरीकों से लोगों का इलाज कर रहे हैं, के अनुसार खराब गट हेल्थ के पीछे हमारी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें बड़ी वजह बन सकती हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते इन कारणों पर ध्यान न दिया जाए, तो पाचन तंत्र धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि गट हेल्थ बिगाड़ने वाले कौन-कौन से कारण हैं? गट हेल्थ बिगड़ने पर कौन कौन से लक्षण दिखते हैं और उनका इलाज कैसे किया जा सकता है।
आंतों की कमजोर लाइनिंग के लिए जिम्मेदार कारण
- डॉक्टर जैदी के मुताबिक, गट हेल्थ बिगाड़ने वाले प्रमुख कारणों में जरूरत से ज्यादा प्रोसेस्ड और जंक फूड का सेवन,
- छोटी-छोटी तकलीफ में बार-बार पेनकिलर या एंटीबायोटिक दवाएं लेना
- लगातार तनाव और जरूरत से ज्यादा सोचते रहना यानी ओवर थिंकिंग
- देर रात तक जागना, अनियमित नींद और लेट नाइट डिनर की आदत पाचन पर बुरा असर डालती है।
- लंबे समय से गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं को नजरअंदाज करना भी आंतों की सेहत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है।
गट लाइनिंग कमजोर होने पर बॉडी में दिखने वाले लक्षण
- बार-बार गैस और एसिडिटी होना
- पेट भारी या फूला हुआ महसूस होना
- कब्ज या पाचन खराब रहना
- बिना वजह थकान महसूस होना
- मूड खराब रहना या उदासी महसूस होना
- छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन होना
- एंजाइटी और बेचैनी बढ़ना
- काम करने का मन न करना या मोटिवेशन कम होना
- खाना खाने के बाद असहजता महसूस होना
- शरीर में सुस्ती और एनर्जी की कमी रहना
एक्सपर्ट के अनुसार गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल से आंतों की अंदरूनी लाइनिंग कमजोर होने लगती है, जिससे टॉक्सिन्स ब्लड में पहुंच सकते हैं। इस स्थिति को लीकी गट कहा जाता है। गट हेल्थ सुधारने के लिए सिर्फ कम खाना नहीं, बल्कि सही और संतुलित खाना जरूरी है। कई लोग कम खाने के बावजूद गैस, कब्ज और पेट भारी रहने की समस्या से परेशान रहते हैं। इसकी बड़ी वजह डाइट में फाइबर की कमी है, क्योंकि गट के गुड बैक्टीरिया का मुख्य भोजन फाइबर ही होता है।
गट हेल्थ सुधारने के लिए कैसी डाइट का करें सेवन
फाइबर रिच फूड्स खाएं
गट को दुरुस्त रखने के लिए फाइबर बेहद जरूरी है। यह आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया को पोषण देता है और पाचन को बेहतर बनाता है। फाइबर की कमी से गैस, ब्लोटिंग और कब्ज बढ़ सकती है। रोजाना दलिया, ओट्स, ज्वार, बाजरा, सब्जियां और साबुत फलों को डाइट में शामिल करें। मेडिकल जर्नल Cell Host & Microbe और The Lancet में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार जब हम फाइबर से भरपूर चीजें खाते हैं, तो हमारे पेट के बैक्टीरिया इसे तोड़कर शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFAs) जैसे कि ‘ब्यूटायरेट’ बनाते हैं। यह एसिड आंतों की परत को मजबूत करते हैं, सूजन रोकते हैं और कब्ज को पूरी तरह खत्म करते हैं।
प्रोबायोटिक फूड्स को डाइट का हिस्सा बनाएं
Harvard Health Publishing और Journal of Applied Microbiology की एक रिपोर्ट के मुताबिक दही, छाछ और किण्वित (Fermented) खाद्य पदार्थों जैसे इडली-डोसा में प्रचुर मात्रा में लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) जैसे जीवित गुड बैक्टीरिया होते हैं। रिसर्च साबित करती है कि इनका नियमित सेवन आंतों में खराब बैक्टीरिया की संख्या को कम करते है, जिससे भोजन का अवशोषण बेहतर होता है और दस्त, गैस व एसिडिटी में तुरंत राहत मिलती है। दही, छाछ, कांजी, इडली और डोसा जैसे प्रोबायोटिक फूड्स आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने में मदद करते हैं। ये पाचन को मजबूत बनाकर गैस, एसिडिटी और पेट की गड़बड़ी कम कर सकते हैं। नियमित सेवन से गट बैलेंस बेहतर होता है और पेट हल्का महसूस होता है।
प्रीबायोटिक फूड जरूर खाएं
प्रीबायोटिक फूड्स आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया की ग्रोथ बढ़ाने में मदद करते हैं। प्याज, लहसुन, केला, ओट्स और जीरा जैसे फूड्स पाचन को सपोर्ट करते हैं। इन्हें नियमित खाने से गट माइक्रोबायोम मजबूत होता है, जिससे कब्ज, गैस और पेट से जुड़ी कई समस्याओं में राहत मिल सकती है।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
कम पानी पीने से पाचन धीमा हो सकता है और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। शरीर को हाइड्रेट रखना आंतों की सफाई और भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद करता है। रोजाना 8–10 गिलास पानी पीने से पेट साफ रहता है और गट हेल्थ बेहतर बनी रहती है।
Khabar Monkey
जीरा, धनिया और पुदीना पानी का सेवन करें
जीरा, धनिया और पुदीना से बना पानी पेट को ठंडक देने के साथ पाचन सुधारने में मदद करता है। यह गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी को कम कर सकता है। नियमित सेवन से पेट हल्का महसूस होता है और आंतों का बैक्टीरिया बैलेंस बेहतर बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी घरेलू उपाय, आयुर्वेदिक या डाइट संबंधी बदलाव को अपनाने से पहले डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। यदि गैस, कब्ज, एसिडिटी या पेट से जुड़ी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो मेडिकल जांच कराना जरूरी है।





