दिल्ली सरकार ने पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के कैग ऑडिट का आदेश दिया है. यह कदम रेगुलेटरी एसेट्स के तौर पर जमा हुए 38,500 करोड़ रुपये के बकाया को देखते हुए उठाया गया है, जिसे कंज्यूमर्स से वसूला जाना है. दिल्ली सरकार के बिजली विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, भारत का कैग उन हालात का गहन ऑडिट करेंगे जिनके तहत डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां राजधानी पावर लिमिटेड , बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लि. रेगुलेटरी एसेट्स की वसूली किए बिना काम करती रही हैं.

पावर सेक्टर में, रेगुलेटरी एसेट्स एक डेफर्ड कॉस्ट होती है. जब किसी बिजली कंपनी की बिजली सप्लाई की कॉस्ट उसके द्वारा प्राप्त रेवेन्यू से अधिक हो जाती है, तो रेगुलेटर इस नुकसान को स्थगित कर देते हैं ताकि कंज्यूमर्स को तत्काल, तीव्र मूल्य वृद्धि से बचाया जा सके. बिजली कंपनी को कानूनी रूप से इस राजस्व अंतर की वसूली भविष्य में, आमतौर पर ब्याज सहित, करने की अनुमति होती है.

तीन महीने में पूरा करना होगा ऑडिट

आदेश में कहा गया है कि ऑडिट का काम आदेश मिलने की तारीख से तीन महीने के भीतर पूरा करना होगा. हालांकि, ऑडिट के दायरे और जटिलता को देखते हुए कैग समय सीमा बढ़ाने पर विचार कर सकता है. इस आदेश पर टिप्पणी करते हुए बीआरपीएल के प्रवक्ता ने कहा कि दिल्ली की डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के कैग ऑडिट का मामला अभी अदालतों में विचाराधीन है. चूंकि मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत है, इसलिए इस पर आगे कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा. इस बारे में दूसरी डिस्ट्रब्यूशन कंपनियों से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है. अगर डिस्ट्रब्यूशन कंपनियां कानूनी रास्ता नहीं अपनाती हैं, तो 2002 में पावर डिस्ट्रब्यूशन के प्राइवेटाइजेशन के बाद यह पहली बार होगा जब दिल्ली में डिस्कॉम का कैग ऑडिट होगा. इससे पहले, तत्कालीन आप सरकार ने डिस्कॉम के कैग ऑडिट की कोशिश को 2015 में हाई कोर्ट ने रोक दिया था.

आएगी ट्रांसपेरेंसी

आदेश के अनुसार, 29 जून को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक में जनहित में उन हालात की गहन कैग ऑडिट की सिफारिश की गई, जिनमें डिस्कॉम रेगुलेटरी एसेट्स की वसूली किए बिना काम करती रहीं. पावर मिनिस्टर आशीष सूद ने गुरुवार को कहा कि डिस्कॉम की कैग ऑडिट का औपचारिक आदेश दिल्ली के पावर सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और कामकाज में सुधारों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है. उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के हर बिजली उपभोक्ता और हर ईमानदार करदाता की जीत है. सूद ने कहा कि दिल्ली के लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि लगभग 38,000 करोड़ रुपए की रेगुलेटरी एसेट्स कैसे बढ़ती गईं और इससे किसे फायदा हुआ….. कैग ऑडिट सच्चाई सामने लाएगा.