भारतीय खाद्य निगम (FCI) तीन महीने की अवधि के लिए देश के अलग-अलग अनुसूचित बैंकों से 50,000 करोड़ रुपये का अल्पकालिक कर्ज जुटाने जा रहा है। एक बड़े सरकारी अधिकारी ने सोमवार को ये जानकारी दी। इसमें अतिरिक्त 25,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए ‘ग्रीन शू’ विकल्प भी शामिल है। ये धनराशि खाद्यान्न की खरीद और वितरण से उत्पन्न होने वाले नकदी प्रवाह असंतुलन को संभालने के लिए जुटाई जा रही है। इस संबंध में जमा निविदाएं 22 मई को खोली जाएंगी। अधिकारी ने बताया कि निविदा के तहत कुल उधारी किसी भी समय 75,000 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होगी।
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एफसीआई की परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग चरणों में किया जाएगा कर्ज वितरण
ये अल्पकालिक कर्ज बिना किसी प्रतिभूति के आधार पर लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि खाद्य ऋण के लिए एफसीआई को उपलब्ध भारत सरकार की 6,000 करोड़ रुपये की गारंटी इन उधारियों पर लागू नहीं होगी। निविदा की शर्तों के अनुसार, प्रस्ताव 31 अगस्त तक वैध रहने चाहिए और कर्ज वितरण एफसीआई की परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग चरणों में किया जाएगा। बताते चलें कि भारतीय खाद्य निगम राशन कार्ड धारकों और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को खाद्यान्न की खरीद और वितरण से जुड़ी सरकार की नोडल एजेंसी है।
2026-27 के लिए सरकार ने तय किया है 3.449 करोड़ टन गेहूं खरीद का लक्ष्य
भारतीय खाद्य निगम अभी सक्रिय गेहूं खरीद सत्र का आयोजन कर रही है। चालू विपणन सत्र 2026-27 (मार्च–अप्रैल) में एफसीआई और राज्य एजेंसियों ने अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से कुल 2.297 करोड़ टन गेहूं की खरीद की है। इस खरीद में पंजाब 1.051 करोड़ टन के साथ सबसे आगे है। इस लिस्ट में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश (67.2 लाख टन), तीसरे स्थान पर हरियाणा (25.8 लाख टन) और चौथे स्थान पर राजस्थान (17.7 लाख टन) है। केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य 3.449 करोड़ टन तय किया है।





