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ग्रीन कार्ड की रेस में लगा ‘ब्रेक! ट्रंप के इस एक फैसले ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हजारों भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए बड़ी खबर है. ट्रंप प्रशासन ने एक नई नीति की घोषणा की है, जिसके तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले अधिकांश विदेशी नागरिकों को अब अमेरिका छोड़कर अपने गृह देश से आवेदन करना होगा. यह बदलाव उन लोगों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है जो अमेरिका में रहते हुए ही स्थायी निवास हासिल करने की उम्मीद कर रहे थे.

Khabar Monkey

ग्रीन कार्ड की रेस में लगा ‘ब्रेक! ट्रंप के इस एक फैसले ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन
ग्रीन कार्ड की रेस में लगा ‘ब्रेक! ट्रंप के इस एक फैसले ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

क्या है नया नियम?
संयुक्त राज्य नागरिकता और आव्रजन सेवाएं (USCIS) द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रह रहे विदेशी नागरिकों को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के लिए सामान्य रूप से अपने देश लौटना होगा. पहले कई मामलों में लोग अमेरिका के भीतर रहकर ही ‘स्टेटस एडजस्टमेंट’ प्रक्रिया के जरिए ग्रीन कार्ड प्राप्त कर सकते थे. अब इस प्रक्रिया को केवल असाधारण परिस्थितियों में ही अनुमति दी जाएगी और प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच होगी.

छात्रों और H-1B वीजाधारकों पर सबसे ज्यादा असर
नई नीति का सबसे अधिक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय छात्रों, H-1B वर्क वीजा धारकों और पर्यटक वीजा पर अमेरिका पहुंचे लोगों पर पड़ सकता है. ये वे लोग हैं जो अमेरिका में रहते हुए स्थायी निवास प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करने की उम्मीद रखते थे. प्रशासन का कहना है कि अस्थायी वीजा पर अमेरिका आने वालों का उद्देश्य सीमित अवधि के लिए रहना होता है, इसलिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को उसी का विस्तार नहीं माना जाना चाहिए.

ट्रंप प्रशासन ने क्यों लिया ये फैसला?
USCIS के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य अमेरिकी आव्रजन कानूनों को उनके मूल स्वरूप में लागू करना है. अधिकारियों का कहना है कि इससे वीजा अवधि समाप्त होने के बाद अवैध रूप से अमेरिका में रुकने की घटनाओं को कम किया जा सकेगा. गृह सुरक्षा विभाग का भी कहना है कि यह नीति आव्रजन प्रणाली में मौजूद कथित खामियों को दूर करने और नियमों के सख्त पालन को सुनिश्चित करने के लिए लाई गई है.

भारतीयों पर क्या होगा असर?
अमेरिका में भारतीय समुदाय सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रवासी समूहों में शामिल है. वित्त वर्ष 2024 में लगभग 49700 भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी. इस आंकड़े के साथ भारतीय, मेक्सिको के बाद अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने वाला दूसरा सबसे बड़ा समूह बने. नई नीति के बाद ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों, छात्रों और परिवारों को अपनी योजनाओं पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है.

संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का दावा
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ग्रीन कार्ड आवेदनों को विदेश स्थित अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में स्थानांतरित करने से USCIS के संसाधन अन्य प्राथमिक कार्यों के लिए उपलब्ध हो सकेंगे. इनमें नागरिकता आवेदन, मानव तस्करी और हिंसक अपराधों के पीड़ितों के लिए विशेष वीजा मामलों की प्रक्रिया शामिल है. नई नीति ने अमेरिका में रह रहे लाखों प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रीन कार्ड प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है. फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि इस बदलाव का व्यावहारिक असर कितना व्यापक होगा और क्या भविष्य में इसमें कोई संशोधन किया जाएगा या नहीं.

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