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पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत की उम्मीद! रूस के बाद अब ईरान से भारी छूट पर तेल खरीदने की तैयारी में भारत​

देश में ईंधन की कीमतें काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती हैं कि भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल कितनी सस्ती दर पर मिल रहा है. सरकार और भारतीय तेल कंपनियां इसी कोशिश में लगातार जुटी हैं कि दुनिया के जिस भी कोने से सस्ता तेल मिले, उसे देश में लाया जाए. […]

देश में ईंधन की कीमतें काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती हैं कि भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल कितनी सस्ती दर पर मिल रहा है. सरकार और भारतीय तेल कंपनियां इसी कोशिश में लगातार जुटी हैं कि दुनिया के जिस भी कोने से सस्ता तेल मिले, उसे देश में लाया जाए. रूस से भारी छूट पर कच्चा तेल खरीदने की सफल रणनीति के बाद, अब भारत की नजरें ईरान पर टिक गई हैं. अगर अमेरिका 21 अगस्त के बाद भी ईरान पर लगे प्रतिबंधों में अपनी छूट को आगे बढ़ाता है, तो भारतीय रिफाइनरियां वहां से भी सस्ते तेल की बड़ी खेप खरीदने को पूरी तरह तैयार हैं. भारत का ये प्लान आने वाले समय में जनता को फायदा पहुंचा सकता है.

अगस्त तक पूरी तरह सुरक्षित है भारत का स्टॉक

भारत की सरकारी रिफाइनरी कंपनियों ने अपनी दूरदर्शिता का बेहतरीन परिचय दिया है. मध्य पूर्व में युद्ध और तनाव की स्थिति को भांपते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी दिग्गज कंपनियों ने अगस्त तक की अपनी जरूरत का क्रूड ऑयल पहले ही सुरक्षित कर लिया है. इसका मतलब है कि देश में तेल की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आने वाली है. फिलहाल कंपनियों का स्टोरेज फुल है, इसलिए वे अमेरिका द्वारा दी गई 60 दिनों की छूट का तुरंत फायदा उठाने की स्थिति में नहीं हैं. इसके बावजूद, भारतीय कंपनियां ईरानी व्यापारियों से लगातार बातचीत कर रही हैं, ताकि भविष्य में जैसे ही मौका मिले और अच्छा डिस्काउंट ऑफर हो, तो तुरंत डील पक्की की जा सके.

रूस का क्रूड ऑयल बना हुआ है पहली पसंद

मौजूदा समय में भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूस सबसे फायदे का सौदा साबित हो रहा है. केप्लर के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून महीने में रूस से भारत का तेल आयात रिकॉर्ड 27 लाख बैरल प्रतिदिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था. इस महीने भी इसके 26 लाख बैरल प्रतिदिन रहने की उम्मीद है. इसकी सबसे बड़ी वजह रूस से मिलने वाला बंपर डिस्काउंट है. ईरान जहां अपने तेल पर ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल की छूट दे रहा है, वहीं रूस का यूराल क्रूड 6 डॉलर प्रति बैरल तक की बड़ी छूट पर मिल रहा है. बाजार में प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि सऊदी अरब ने भी साल 2000 के बाद से अपने कच्चे तेल की कीमतों में सबसे बड़ी कटौती कर दी है. लेकिन, भारी माल ढुलाई लागत के कारण भारतीय कंपनियों के लिए सऊदी का तेल अभी उतना आकर्षक नहीं है, इसलिए रिफाइनरियों का झुकाव रूसी तेल की तरफ ही ज्यादा है.

वैश्विक बाजार में ईरान की स्थिति

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सुरक्षित आवाजाही शुरू होने और सीजफायर के बाद, मध्य पूर्वी कच्चे तेल की कीमतें काफी नीचे आ गई हैं. इस वजह से ईरान को अपने तेल के लिए नए खरीदार ढूंढने में थोड़ी मुश्किल हो रही है और उसका मुनाफा भी कम हुआ है. ऐसे में भारत एक बेहद स्मार्ट कूटनीतिक और व्यापारिक कदम उठा रहा है. भारतीय रिफाइनरियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि अगर पाबंदियों में ढील मिले, तो बाजार में कीमतें प्रतिस्पर्धी होने पर ईरान का सस्ता तेल खरीदने में वे सबसे आगे रहें.

ऊर्जा सुरक्षा को लकेर बड़ी तैयारी

सितंबर की डिलीवरी के लिए सरकारी तेल रिफाइनरियां जल्द ही सप्लायर्स के साथ बातचीत के अगले दौर की शुरुआत करेंगी. इसके साथ ही, भारत की पैनी नजर अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित स्थायी शांति समझौते पर भी बनी हुई है. भारत और ईरान के बीच ऊर्जा के क्षेत्र में संबंधों की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स एनर्जी समिट में भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद की खास मुलाकात हुई थी. दोनों नेताओं ने ऊर्जा सेक्टर में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की. गौरतलब है कि, 2018 में प्रतिबंध लगने से पहले ईरान भारत के शीर्ष सप्लायर्स में से एक था, जो देश के कुल तेल आयात का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा पूरा करता था.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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