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ITR भरने वालों के लिए अलर्ट! 30 जून से पहले आ सकता है आयकर विभाग का नोटिस​

आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए इस साल आयकर विभाग ने जांच प्रक्रिया को और मजबूत कर दिया है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आयकर अधिनियम की धारा 143 के तहत होने वाली स्क्रूटिनी व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य करदाताओं द्वारा दाखिल किए गए […]

आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए इस साल आयकर विभाग ने जांच प्रक्रिया को और मजबूत कर दिया है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आयकर अधिनियम की धारा 143 के तहत होने वाली स्क्रूटिनी व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य करदाताओं द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न में दी गई जानकारी की पुष्टि करना और किसी भी तरह की गड़बड़ी या असंगति की जांच करना है.

आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 202526 से जुड़े रिटर्न के लिए स्क्रूटिनी नोटिस जारी करने की अंतिम तारीख 30 जून 2026 तय की है. यदि किसी करदाता को इस तारीख तक नोटिस नहीं मिलता है, तो उसका रिटर्न इस फाइनेंशियल ईयर में जांच के लिए नहीं चुना जाएगा.

क्या है सेक्शन 143 ?

आयकर अधिनियम की धारा 143 आकलन अधिकारी को यह अधिकार देती है कि वह किसी करदाता के रिटर्न की विस्तृत जांच कर सके. यदि अधिकारी को लगता है कि रिटर्न में आय कम दिखाई गई है, नुकसान अधिक बताया गया है या टैक्स कम चुकाया गया है, तो वह करदाता को नोटिस भेज सकता है.

नोटिस मिलने के बाद करदाता को अपने दावों के समर्थन में जरूरी दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैं. इसमें आय का विवरण, निवेश से जुड़े दस्तावेज, टैक्स छूट और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं.

किन मामलों में बढ़ सकता है जांच का खतरा?

विशेषज्ञों के मुताबिक AIS, Form 26AS और ITR में अंतर, बड़े वित्तीय लेनदेन, असामान्य टैक्स छूट के दावे या जोखिम वाले प्रोफाइल वाले मामलों को स्क्रूटिनी के लिए चुना जा सकता है. हालांकि, जांच के लिए चुना जाना किसी कर चोरी या गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जाता.

नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं

कर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्क्रूटिनी नोटिस मिले तो घबराने की जरूरत नहीं है. करदाता को समय पर जवाब देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स सलाहकार की मदद लेनी चाहिए. सही दस्तावेज और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने से जांच प्रक्रिया आसानी से पूरी हो सकती है. विभाग का मकसद करदाताओं को परेशान करना नहीं, बल्कि टैक्स अनुपालन को बेहतर बनाना है.

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संपादकीय टीम

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