क्या आप जानते हैं कि शादीशुदा जिंदगी जीने वाले लोगों की ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर तरीके से कंट्रोल में रह सकती है. दरअसल, एक स्टडी में शादीशुदा लाइफ और ब्लड शुगर के लेवल के बीच में एक अनोखा कनेक्शन सामने आया है. इस स्टडी का जिक्र न्यूट्रिशनिस्ट और गट हेल्थ एक्सपर्ट दीप्ति शिखा जैन ने अपने इंस्टा अकाउंट पर किया है. रिपोर्ट कहती है कि शादीशुदा लोगों में हाई एचबीए1सी का खतरा उन लोगों की तुलना में कम हो सकता है जो सिंगल, तलाकशुदा और जीवनसाथी को खो चुके हैं.

दरअसल, एचबीए1सी एक ब्लड शुगर टेस्ट है जिसे हर 2 से 3 महीने बाद कराया जाता है. अगर इसका लेवल 5.5 से ऊपर है तो टेस्ट कराने वाले को प्रीडायबिटीक माना जाता है. शुगर लेवल 6.7 से ऊपर है तो डायबिटीज हो गई है. चलिए आपको बताते हैं कि इस मैरिड लाइफ और ब्लड शुगर कंट्रोल का क्या कनेक्शन है.
न्यूट्रिशनिस्ट ने क्या बताया
जब हम रिलेशनशिप में होते हैं तो पार्टनर की वजह से हमें इमोशनल सपोर्ट मिलता है. ऐसे में वो स्ट्रेस को संभालने में हमारी हेल्प करता है. कई रिसर्च में सामने आया है कि शुगर के होने या इसका लेवल के बढ़ने में मानसिक तनाव एक बड़ा कारण होता है. इसलिए जब हमें पार्टनर का सपोर्ट मिलता है तो काफी हद तक स्ट्रेस को कंट्रोल करके डायबिटीज से बचा जा सकता है. इतना ही नहीं हमारी ओवरऑल हेल्थ पर पॉजिटिव इंपैक्ट भी पड़ता है.
न्यूट्रिशनिस्ट दीप्ति शिखा के मुताबिक यूएस में करीब 8000 लोगों पर स्टडी की गई. इसमें चार ग्रुप बनाए गए और हर किसी में मैरिड लाइफ वाले, अविवाहित, तलाकशुदा और जीवनसाथी को खो चुके लोग शामिल किए गए. स्टडी में पाया गया कि जो लोग शादीशुदा लाइफ जी रहे थे उनके एचबीए1सी का लेवल दूसरों की तुलना में कम था. उनका ब्लड शुगर रिस्पॉन्स भी बेहतर था. इसका बड़ा कारण एक स्ट्रांग सोशल टच हो सकता है.
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दीप्ति शिखा जैन के मुताबिक, साथ रहने वाले जॉइंट्स में स्ट्रेस का स्तर कम हो सकता है, वे एक साथ एक्सरसाइज करते हैं, खानपान पर ध्यान देते हैं और एकदूसरे को बेहतर आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं. इन सबका ब्लड शुगर पर सकारात्मक असर पड़ सकता है.
मैरिड लाइफ और ब्लड शुगर के कनेक्शन पर स्टडी
बीएमजे ओपन डायबिटीज रिसर्च एंड केयर जर्नल में इस स्टडी को प्रकाशित किया गया. इसके जरिए ये जानने की कोशिश की गई कि शादीशुदा जिंदगी और पार्टनर के साथ रहने का सेहत पर क्या असर पड़ता है. इसमें उन लोगों को हिस्सा बनाया गया जो 50 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे और उन्हें शुगर नहीं थी.
शोधकर्ताओं ने साल 2004 से 2013 के अंतराल में 89 साल की उम्र के करीब 3300 लोगों पर अध्ययन किया. टाइमटाइम पर सभी के ब्लड सैंपल लिए गए और एचबीए1सी की जांट की गई. इस दौरान कंटेस्टेंट्स की शादीशुदा लाइफ और टाइम संग उनके रिलेशनशिप में हुए चेंजिस पर भी नजर रखी गई.
रिसर्च बताती है कि शुरू में करीब 76 फीसदी लोग मैरिड थे या अपने पार्टनर संग रह रहे थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि वैवाहिक स्थिति में बदलाव, जैसे तलाक, HbA1c लेवल और प्रीडायबिटीज होने की आशंका से जुड़ा हो सकता है.