अगर आपने हाल के दिनों में Blinkit, Zepto या दूसरे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर Diet Coke ऑर्डर करने की कोशिश की है, तो कीमत देखकर जरूर चौंके होंगे. भारत में आमतौर पर 40 रुपये में मिलने वाला 330 ml का Diet Coke कैन अब 199 रुपये तक में बिक रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह देश में एल्युमीनियम कैन की कमी, आयात पर बढ़ती निर्भरता और ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटें हैं. इसी कारण अब इंपोर्टेड ड्रिंक्स ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महंगे दामों में बेचे जा रहे हैं.

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में पिछले कुछ हफ्तों से Diet Coke के लोकल कैन की सप्लाई प्रभावित रही है. अप्रैल के बीच में तो कई जगहों पर इसकी सप्लाई लगभग खत्म हो गई थी. इसके बाद बाजार में इंपोर्टेड कैन की एंट्री बढ़ गई. ये कैन UAE, दक्षिण-पूर्व एशिया और दूसरे देशों से मंगाए जा रहे हैं और इन्हें अलग-अलग इंपोर्टर्स ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेच रहे हैं. Blinkit पर 330 ml का इंपोर्टेड Diet Coke कैन 199 रुपये में बिक रहा है, जबकि भारत में बना इसका सामान्य वर्जन करीब 40 रुपये में मिलता है. इसी तरह Coke Zero Sugar, Pepsi Zero Sugar Lemon और 7 Up Zero Sugar जैसे ड्रिंक्स भी 199 से 209 रुपये के बीच बेचे जा रहे हैं.
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सप्लाई चेन की है इसमें भूमिका?
यह सिर्फ ब्रांड प्राइसिंग का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे सप्लाई चेन और आयात लागत की बड़ी भूमिका है. भारत में इस्तेमाल होने वाले छोटे साइज के एल्युमीनियम कैन का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है. खासतौर पर 300 ml कैन के लिए कंपनियां मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर निर्भर रहती हैं. पश्चिम एशिया में सप्लाई प्रभावित होने और वैश्विक स्तर पर एल्युमीनियम की कीमत बढ़ने से समस्या और गंभीर हो गई है. कैन बनाने में इस्तेमाल होने वाले एल्युमीनियम की कीमत सालभर में करीब 50 फीसदी बढ़कर 3,600 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है. इससे इंपोर्टेड कैन की लागत काफी बढ़ गई.
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में एल्युमीनियम कैन बनाने वाली बड़ी कंपनियां Ball Beverage Packaging और Canpack फिलहाल मांग के मुताबिक उत्पादन नहीं कर पा रही हैं. इसी वजह से कंपनियों को इंपोर्टेड कैन का सहारा लेना पड़ रहा है. Diet Coke की स्थिति बाकी सॉफ्ट ड्रिंक्स से थोड़ी अलग है. आम कोल्ड ड्रिंक्स PET बोतलों या कांच की बोतलों में भी उपलब्ध रहती हैं, लेकिन Diet Coke मुख्य रूप से कैन में ही बिकती है. यही कारण है कि कैन की कमी का असर इस प्रोडक्ट पर सबसे ज्यादा पड़ा.
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