Arshad Warsi Birthday Special Story: 19 अप्रैल को मुंबई में जन्मे अरशद वारसी आज बॉलीवुड के ‘कॉमेडी किंग’ के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन उनकी जिंदगी की शुरुआत बेहद कठिन परिस्थितियों में हुई थी। कम उम्र में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया, जिससे उनका बचपन संघर्षों में बीता। उनके पिता एक सफल बिजनेसमैन नहीं बन सके और आर्थिक तंगी ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

अरशद वारसी की मां गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रही थीं, जिनके इलाज के लिए हर हफ्ते डायलिसिस करवाना पड़ता था। उस समय अरशद जो भी कमाते थे, वह मां के इलाज में ही खर्च हो जाता था। माता-पिता के निधन के बाद अरशद पूरी तरह अकेले हो गए। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि वे बचपन में बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे, जहां वे अक्सर खुद को बेहद अकेला महसूस करते थे।
अकेलेपन ने बनाया मजबूत
अरशद वारसी को कई बार छुट्टियों में भी स्कूल में ही रहना पड़ता था, क्योंकि उन्हें लेने कोई नहीं आता था। इस अकेलेपन से निपटने के लिए वे खुद को ही चिट्ठियां लिखते थे। इन परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बना दिया और जिंदगी से लड़ने की ताकत दी। अरशद वारसी ने अपने करियर की शुरुआत कोरियोग्राफर के रूप में की थी। वे गानों को कोरियोग्राफ करते थे और धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रहे थे।
जया बच्चन ने दिया काम करने का मौका
अरशद वारसी को कभी नहीं लगा था कि वे एक दिन अभिनेता बनेंगे, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। जया बच्चन की नजर उन पर पड़ी और उन्हें फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ में काम करने का मौका मिला, जो की कंपनी एबीसीएल के बैनर तले बनी थी। शुरुआती फिल्मों जैसे ‘बेताबी’, ‘मेरे दो अनमोल रत्न’ और ‘हीरो हिंदुस्तानी’ से उन्हें खास पहचान नहीं मिली।
सर्किट बनकर बदली किस्मत
साल 2003 में आई फिल्म ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’ में निभाया गया ‘सर्किट’ का किरदार अरशद वारसी के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसके बाद ‘गोलमाल’ सीरीज में ‘माधव’ के किरदार ने उन्हें कॉमेडी का सुपरस्टार बना दिया। की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कठिनाइयां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हिम्मत और मेहनत हो तो सफलता जरूर मिलती है। आज वे न सिर्फ एक सफल अभिनेता हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा भी हैं।





