केंद्र सरकार ने ईकॉमर्स सेक्टर से जुड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नियमों में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने इन्वेंट्रीआधारित ईकॉमर्स मॉडल में सिर्फ निर्यात के उद्देश्य से विदेशी निवेश की अनुमति दे दी है. यानी अब विदेशी निवेश वाली ईकॉमर्स कंपनियां भारत में स्टॉक रखकर विदेशों में सामान बेच सकेंगी, लेकिन घरेलू ग्राहकों को इस मॉडल के जरिए बिक्री की अनुमति नहीं होगी.

सरकार का मानना है कि इस फैसले से भारत में बने उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान होगी और देश के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, घरेलू ईकॉमर्स बाजार में पहले से लागू FDI नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
क्या है इन्वेंट्रीआधारित ईकॉमर्स मॉडल?
ईकॉमर्स में मुख्य रूप से दो तरह के बिजनेस मॉडल होते हैं. पहला मार्केटप्लेस मॉडल, जिसमें कंपनी केवल खरीदार और विक्रेता को जोड़ने का काम करती है. दूसरा इन्वेंट्रीआधारित मॉडल, जिसमें कंपनी खुद सामान खरीदकर अपने गोदाम में रखती है और सीधे ग्राहकों को बेचती है.
भारत में विदेशी निवेश वाली कंपनियों को अब तक इन्वेंट्रीआधारित मॉडल के जरिए घरेलू बाजार में बिक्री की अनुमति नहीं थी. सरकार ने इस व्यवस्था को बरकरार रखते हुए केवल निर्यात गतिविधियों के लिए इसमें छूट दी है.
निर्यात बढ़ाने की रणनीति
सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाना है. नई व्यवस्था के तहत विदेशी निवेश वाली ईकॉमर्स कंपनियां भारत में उत्पादों का भंडारण कर उन्हें दुनिया के अलगअलग देशों में भेज सकेंगी. इससे भारतीय निर्माताओं, खासकर एमएसएमई , छोटे कारोबारियों और स्थानीय उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ जैसी सरकारी पहलों को भी मजबूती देगा. साथ ही, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन सेक्टर में नए निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं.
घरेलू कारोबार पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल निर्यात के लिए है. यानी विदेशी निवेश वाली ईकॉमर्स कंपनियां इन्वेंट्री मॉडल के जरिए भारत के भीतर ऑनलाइन रिटेल कारोबार नहीं कर सकेंगी. घरेलू बाजार में FDI से जुड़े मौजूदा नियम पहले की तरह लागू रहेंगे.
इसका मतलब है कि घरेलू रिटेल कारोबार और पारंपरिक दुकानदारों के हितों की सुरक्षा के लिए पहले से लागू प्रतिबंधों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकार का प्रयास एक तरफ निर्यात को बढ़ावा देना है, वहीं दूसरी ओर घरेलू व्यापारियों के हितों का भी संतुलन बनाए रखना है.
नई नीति को भारत के निर्यात बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. यदि विदेशी कंपनियां इस अवसर का प्रभावी ढंग से उपयोग करती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत से होने वाले ईकॉमर्स निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.