नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में 2026 का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 1213 सितंबर को नई दिल्ली में हो रहा है। इस बार भारत ने ब्रिक्स के एजेंडे को चार प्रमुख शब्दों—लचीलापन , नवाचार , सहयोग और सततता —के इर्दगिर्द तैयार किया है।

चार शब्दों में भारत की रणनीति
लचीलापन: वैश्विक आर्थिक संकट, स्वास्थ्य, ऊर्जा और आपूर्तिश्रृंखला जैसे झटकों से निपटने की क्षमता मजबूत करना।
नवाचार: नई तकनीक, डिजिटल क्षेत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शोध में सहयोग बढ़ाना।
सहयोग: सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना।
सततता: पर्यावरण, जलवायु और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता देना।
भारत का जोर “मानवता पहले” और जनकेंद्रित विकास पर भी है। मौजूदा 11 सदस्यीय ब्रिक्स समूह दुनिया की करीब 49.5% आबादी, 40% वैश्विक जीडीपी और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।
ऐसे में भारत की कोशिश है कि ब्रिक्स केवल राजनीतिक मंच न रहकर व्यावहारिक आर्थिक, तकनीकी और विकास संबंधी सहयोग का प्रभावी मंच बने। 2026 में भारत की अध्यक्षता के दौरान 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
संपादकीय टीम
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