SEBI CAS System: शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी कैस को लेकर काफी चर्चा हो रही है. नई व्यवस्था के लागू होने के बाद से सूचकांकों में काफी उतारचढ़ाव देखने को मिला है. अब सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने इसे लेकर पूरी स्थिति साफ कर दी है. मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान 10 सितंबर को उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार में कैस की व्यवस्था पहले की तरह ही काम करती रहेगी. सेबी फिलहाल सिर्फ इस बात पर विचार कर रहा है कि फ्यूचर एंड ऑप्शंस के सेटलमेंट प्राइस के लिए क्या कोई दूसरा तरीका अपनाया जा सकता है.

कैस व्यवस्था पर सेबी का स्पष्ट रुख
बाजार में 3 अगस्त से ही कैस सिस्टम काम कर रहा है. इसके लागू होने के बाद निवेशकों के मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल थे. सेबी चेयरमैन ने इन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि व्यवस्था में कोई भी बदलाव नहीं होगा. उन्होंने बताया कि MSCI ने भी माना है कि कैस के तहत हाल में हुई रीबैलेंसिंग में कोई तकनीकी दिक्कत नहीं आई. इसलिए कैस अपनी जगह पर बना रहेगा. हालांकि एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव्स के लिए क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है. ये बड़ा कदम मार्केट से मिल रहे फीडबैक के आधार पर उठाया गया है.
शुरुआती दिक्कतों के बाद बढ़ेगी लिक्विडिटी
नई व्यवस्था जब भी लागू होती है, तो शुरुआत में कुछ परेशानियां सामने आना आम बात है. सेबी प्रमुख ने बताया कि कई दूसरे देशों के शेयर बाजारों में भी कैस लागू करने के दौरान ऐसी ही चुनौतियां आई थीं. हर जगह शुरुआत में लिक्विडिटी को लेकर थोड़ी बहुत दिक्कतें देखने को मिली हैं. लेकिन आने वाले समय में बाजार में लिक्विडिटी जरूर बढ़ेगी. सेबी का ये बयान काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि 10 सितंबर को ही कैस के दौरान निफ्टी 50 व बीएसई सेंसेक्स का इंडिकेटिव क्लोजिंग प्राइस कुछ समय के लिए 1 फीसदी से ज्यादा उछल गया था.
सूचकांकों में उतारचढ़ाव की स्थिति
कैस के लागू होने के बाद से बाजार में प्राइस फ्लक्चुएशन का असर बिल्कुल साफ दिखा है. 8 सितंबर के आंकड़ों पर गौर करें तो कैस के दौरान निफ्टी का इंडिकेटिव क्लोजिंग प्राइस 1.8 फीसदी तक गिर गया था. जबकि कैस शुरू होने से पहले दोपहर 3:15 बजे निफ्टी सिर्फ 0.58 फीसदी की गिरावट पर था. इस तरह के भारी उतारचढ़ाव को देखते हुए ही सेबी ने पिछले हफ्ते कहा था कि डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने की प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा होगी. मार्केट पार्टिसिपेंट्स से मिले सुझावों पर संस्था काफी गंभीरता से विचार कर रही है.
क्या है क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का सिस्टम
सेबी ने पिछले महीने इस नई व्यवस्था की शुरुआत की थी. इसका मुख्य मकसद सिक्योरिटीज के सही क्लोजिंग प्राइसेज तय करना है. दरअसल कैस कारोबार खत्म होने के वक्त कुछ समय का एक खास ऑक्शन होता है. इसमें किसी भी शेयर के ऑफिशियल प्राइस को तय करने के लिए बाय तथा सेल ऑर्डर्स मैच कराए जाते हैं. ये कोई एकदम नया कॉन्सेप्ट नहीं है. चीन, हांगकांग, ताइवान सहित दक्षिण कोरिया जैसे कई बड़े एशियाई देशों के शेयर बाजारों में ये सिस्टम पहले से ही सफलतापूर्वक काम कर रहा है. अब भारतीय बाजार को भी इस ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से ढाला जा रहा है.