राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े परिवर्तन किए गए. बड़े फैसले और बदलाव के बाद मंदिर में नई कार्यप्रणाली को धरातल पर उतर जा रहा है और सभी व्यवस्थाओं को नए रूप से लागू किया जा रहा है. यही नहीं व्यवस्थाओं के साथसाथ पुराने कर्मचारियों की वापसी भी ट्रस्ट में की जा रही है.

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बने गोविंद देव पुराने फैसलों में लगातार बदलाव कर रहे हैं. जिन कर्मचारियों को दान चोरी का मामा सामने आने के बाद हटा दिया गया था, अब उनकी वापस होने लगी है. बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों में विनोद राव और अनिल मिश्रा के खास लोग भी शामिल हैं. इन सभी को उनके पुराने पदों पर तैनात किया जा रहा है. गोविंद देव के फैसले से यह संकेत मिलता है कि राम मंदिर का प्रबंधन एक बार फिर पुराने हाथों में जाने लगा है.
शिकायत मिलने पर हटाए गए थे कर्मचारी
राम मंदिर दान चोरी का मामला सामने आने के बाद चंपत राय ने महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया. कृष्ण मोहन ने व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए, जिन कर्मचारियों के खिलाफ उन्हें शिकायत मिली थी, उनको उन्होंने हटा दिया. साथ ही कर्मचारियों को नोटिस देना शुरू किया और कई के पटल बदलने का काम किया. इन कर्मचारियों में विनोद राव और अनिल मिश्रा के भी खास लोग थे.
कृष्ण मोहन के फैसलों को पलटना शुरू
कृष्ण मोहन ने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों के पटल बदले और नोटिस जारी. हालांकि नोटिसों पर अमल अभी तक नहीं किया गया था. 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में सीईओ के ऐलान के बाद महासचिव की जिम्मेदारी गोविंद देव को सौंपी गई. गोविंद देव आते ही कृष्ण मोहन के फैसलों को पलटना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने गोपाल राव के सबसे करीबी माने जाने वाले सोमेश अलंदी को तीर्थ क्षेत्र पुरम से वापस राम मंदिर में तैनात करने का आदेश दिया गया.
केडी तिवारी और बजरंग पाठक बहाल
इसके अलावा कृष्ण मोहन ने जिन दर्जनों कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, उन नोटिसों को वापस लेने के साथसाथ नोटिसों को निष्प्रभावी करने का भी आदेश दे दिया गया. दो दिन पहले शहीद कार सेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे संदीप गुप्ता के साथ ही केडी तिवारी और बजरंग पाठक को पुरानी जिम्मेदारियों के साथ बहाल कर दिया गया. तीर्थ यात्री सेवा केंद्र में लॉकर व्यवस्था में लगाए गए कर्मचारी संदीप गुप्ता को विदेशी महिला की शिकायत के बाद व्यवस्था से हटा दिया गया था.
विदेशी महिला ने की थी शिकायत
संदीप गुप्ता पर एक विदेशी महिला ने लाकर में सामान रखने को लेकर हुई कहासुनी के बाद ट्रस्ट को शिकायती पत्र भेजा गया था. जिसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने इस शिकायती पत्र के आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी कर पहले जवाब मांगा और जवाब मिलने पर संतुष्ट न होने की दशा में उन्हें काम से पूरी तरह हटा दिया गया था.
संदीप गुप्ता को बहाल करने की सिफारिश
फिलहाल आर्थिक रूप से कमजोर शहीद कारसेवक के परिजनों की स्थिति को ध्यान में रखकर राम मंदिर में काम दिया गया. नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आगमन पर उनसे लोगों ने संदीप गुप्ता को बहाल करने की सिफारिश की थी. इस सिफारिश के आधार पर पुनः उन्हें बहाल कर यथास्थान नियुक्त कर दिया गया है.
कारण बताओ नोटिस वापस
उधर, कृष्ण मोहन के कार्यकाल में राम मंदिर में कार्यरत दर्जनों कर्मचारियों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को भी वापस लेने या नोटिसों को निष्प्रभावी करने का भी आदेश हो गया है. इसके अलावा राम मंदिर में पटल परिवर्तन के जरिए दायित्व परिवर्तन के आदेश को भी दोबारा पलटकर पूर्व आदेश को भी प्रभावी रखने का निर्देश दिया गया है. इनमें पूर्व ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र के खास बताए जाने वाले केडी तिवारी को पुराने दायित्व को सौंपना खास चर्चा का विषय बन गया है. इसके पहले राम मंदिर में अलगअलग एजेंसियों के लंबित सभी भुगतान का भी आदेश दे दिया गया था.