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अमेरिका के 144 अप्रवासी अरबपतियों में भारत के 19, देश की अरबपति संपत्ति का चौथाई हिस्सा इनके पास​

अमेरिका में अप्रवासियों को लेकर राजनीतिक बहस भले तेज हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका को नजरअंदाज करना मुश्किल है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका में इमिग्रेशन और अमेरिकी हितों को लेकर चर्चा जारी है. इसी बीच फोर्ब्स की नई रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर से अमेरिका पहुंचे लोगों ने […]

अमेरिका में अप्रवासियों को लेकर राजनीतिक बहस भले तेज हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका को नजरअंदाज करना मुश्किल है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका में इमिग्रेशन और अमेरिकी हितों को लेकर चर्चा जारी है. इसी बीच फोर्ब्स की नई रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर से अमेरिका पहुंचे लोगों ने वहां कितनी बड़ी आर्थिक ताकत खड़ी की है. खास बात यह है कि इस लिस्ट में भारत सबसे आगे है.

अमेरिका की 250वीं सालगिरह के मौके पर जारी फोर्ब्स की 2026 की अमेरिकाज रिचेस्ट इमिग्रेंट्स लिस्ट में 45 देशों और क्षेत्रों के 144 विदेशी मूल के अमेरिकी नागरिक शामिल हैं. इनकी कुल संपत्ति 2.2 ट्रिलियन डॉलर यानी 207.88 लाख करोड़ है. यह आंकड़ा पिछले साल के 125 अरबपतियों और 1.3 ट्रिलियन डॉलर से काफी ज्यादा है. यानी अमेरिका में रहने वाले अप्रवासी अरबपतियों की संख्या और संपत्ति, दोनों में तेज बढ़ोतरी हुई है.

अमेरिका की अरबपति संपत्ति का करीब एक चौथाई हिस्सा

फोर्ब्स के मुताबिक, ये 144 अरबपति अमेरिका के कुल अरबपतियों का करीब 15% हैं, लेकिन देश की कुल अरबपति संपत्ति का लगभग एक चौथाई हिस्सा इनके पास है. यानी अमेरिका में जन्मे अरबपतियों के अलावा, दुनिया के दूसरे देशों से आए लोगों ने भी अमेरिकी संपत्ति के टॉप हिस्से में अपनी मजबूत जगह बना ली है. इस लिस्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों में तीन अमेरिकी अप्रवासी हैं. दक्षिण अफ्रीका में जन्मे एलन मस्क, रूस में जन्मे सर्गेई ब्रिन और ताइवान में जन्मे जेनसन हुआंग की संयुक्त संपत्ति, सभी अप्रवासी अरबपतियों की कुल संपत्ति का 60% से ज्यादा है.

टॉप 10 अप्रवासी अरबपति कौन हैं?

फोर्ब्स की लिस्ट में सबसे ऊपर एलन मस्क हैं. इसके बाद गूगल के सहसंस्थापक सर्गेई ब्रिन और एनवीडिया के सहसंस्थापक जेनसन हुआंग का नंबर है. दक्षिण अफ्रीका में जन्मे एलन मस्क सबसे आगे हैं, जिनकी संपत्ति करीब 87.59 लाख करोड़ रुपये है. रूस में जन्मे सर्गेई ब्रिन की संपत्ति 25.71 लाख करोड़ रुपये, जबकि ताइवान में जन्मे जेनसन हुआंग की संपत्ति 16.63 लाख करोड़ रुपये है. हंगरी के थॉमस पीटरफाई के पास 10.11 लाख करोड़ रुपये हैं. इसके बाद इजराइल की मिरियम एडेलसन की संपत्ति 3.16 लाख करोड़ रुपये, ताइवान के डेविड सन और चीन के जॉन टू की 2.882.88 लाख करोड़ रुपये, जर्मनी के पीटर थील की 2.64 लाख करोड़ रुपये, ऑस्ट्रेलिया के रूपर्ट मर्डोक की 2.09 लाख करोड़ रुपये और ईरान के एडम फारूखी की 1.79 लाख करोड़ रुपये है.

भारत से जुड़े 19 अरबपति, पिछले साल से 7 ज्यादा

भारत लगातार दूसरी बार इस लिस्ट में सबसे ज्यादा अप्रवासी अरबपतियों वाला देश बना है. इस साल भारत में जन्मे 19 अरबपति अमेरिका में रह रहे हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 12 थी. यानी एक साल में भारत से जुड़े अरबपतियों की संख्या 7 बढ़ी है. फोर्ब्स के अनुसार, इस साल भारत ही ऐसा देश है, जहां से एक से ज्यादा नए अप्रवासी अरबपति लिस्ट में शामिल हुए हैं. इन नए नामों में वेंचर कैपिटलिस्ट हेमंत तनेजा, एस्टेरा लैब्स के सहसंस्थापक संजय गजेंद्र और जितेंद्र मोहन, तथा पालांटिर के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर श्याम शंकर शामिल हैं. भारत की ओर से लिस्ट में सबसे ऊपर विनोद खोसला हैं. वह 14वें स्थान पर हैं और उनकी संपत्ति 13.9 अरब डॉलर बताई गई है. इसके बाद 25वें स्थान पर जय चौधरी हैं, जिनकी संपत्ति 8.2 अरब डॉलर है.

अमेरिका में पढ़ाई से कारोबार तक का सफर

फोर्ब्स की रिपोर्ट सिर्फ संपत्ति का आंकड़ा नहीं देती, बल्कि यह भी दिखाती है कि कई अप्रवासी अमेरिका में पढ़ाई या नौकरी के लिए आए थे और बाद में वहीं कारोबार खड़ा कर अरबपति बने. एस्टेरा लैब्स के सहसंस्थापक जितेंद्र मोहन बताते हैं कि वह भारत से मास्टर्स करने अमेरिका आए थे. उनका इरादा पढ़ाई पूरी करने, कुछ साल नौकरी करने और फिर भारत लौटने का था. लेकिन कारोबार के मौकों ने उन्हें अमेरिका में ही रोक लिया. आज उन्हें अमेरिका आए 32 साल हो चुके हैं. उनके सहसंस्थापक संजय गजेंद्र भी कहते हैं कि अमेरिका आने का सपना अपना कारोबार शुरू करना था. जॉर्डन में जन्मे रियलीट के सहसंस्थापक अमजद मसाद के मुताबिक, अमेरिका आज भी मौकों और इनोवेशन का बड़ा सेंटर है.

सिर्फ संपत्ति नहीं, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान भी

फोर्ब्स की लिस्ट में शामिल अरबपतियों की कहानी बताती है कि अमेरिका में अप्रवासियों का योगदान सिर्फ उनकी निजी संपत्ति तक सीमित नहीं है. टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, चिप निर्माण, सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में इनकी कंपनियों ने बड़े कारोबार खड़े किए हैं. यही वजह है कि इमिग्रेशन पर राजनीतिक बहस के बीच यह रिपोर्ट आर्थिक तस्वीर का दूसरा पहलू सामने रखती है. ट्रंप के अमेरिका में अप्रवासन को लेकर नीतिगत चर्चाएं भले अलग दिशा में हों, लेकिन फोर्ब्स के आंकड़े दिखाते हैं कि दुनिया भर से आए लोगों ने अमेरिकी कारोबार और संपत्ति के टॉप लेवल पर कितनी मजबूत जगह बनाई है.

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संपादकीय टीम

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