रविवार, 6 सितंबर 2026 ब्रेकिंग
ग्रेटर नोएडा के KFC चिकन में मिला कीड़ा, खाद्य सुरक्षा विभाग ने शुरू की जांच​ | बच्चा टॉफी-चॉकलेट खाने की करता है जिद, बनाकर खिलाएं ये हेल्दी और टेस्टी चीजें​ | Delhi Building Collapse: दिल्ली में 5 मंजिला बिल्डिंग गिरी, PG में रहते थे कई स्टूडेंट्स, मलबे में कई लोग दबे, 2 लोगों की मौत​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

EPFO: 28 दिसंबर तक निपटा लें PF से जुड़ा ये जरूरी काम, रिटायरमेंट फंड पर पड़ेगा असर!​

EPFO: नौकरीपेशा लोगों की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हिस्सा कटकर प्रॉविडेंट फंड में जमा होता है. इतनी ही रकम कंपनी भी डालती है, जिसमें से 3.67 फीसदी EPF में तथा 8.33 फीसदी EPS में जाता है. ये पैसा रिटायरमेंट के बाद बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा बनता है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अक्सर खाताधारकों […]

EPFO: नौकरीपेशा लोगों की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हिस्सा कटकर प्रॉविडेंट फंड में जमा होता है. इतनी ही रकम कंपनी भी डालती है, जिसमें से 3.67 फीसदी EPF में तथा 8.33 फीसदी EPS में जाता है. ये पैसा रिटायरमेंट के बाद बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा बनता है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अक्सर खाताधारकों के हितों की रक्षा के लिए नए नियम लाता रहता है. इसी कड़ी में EPFO ने पीएफ ट्रस्ट्स के लिए एक खास पहल की थी. जून महीने में शुरू की गई इस योजना की डेडलाइन अब करीब आ रही है, जिसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनका पीएफ सीधे EPFO में न जाकर कंपनियों के अपने ट्रस्ट के जरिए मैनेज होता है.

जून में आई थी एमनेस्टी स्कीम

EPFO ने कुछ चुनिंदा PF ट्रस्ट्स के लिए ‘वनटाइम एमनेस्टी स्कीम’ की शुरुआत जून में की थी. इसके तहत ऐसे पीएफ ट्रस्ट्स को अपनी कागजी स्थिति सुधारने का मौका दिया जा रहा है. कई कंपनियां अपने कर्मचारियों का पीएफ सीधे EPFO के पास जमा करने के बजाय अपने खुद के ट्रस्ट के जरिए मैनेज करती हैं. इसके लिए उन्हें EPF कानून के तहत विशेष छूट हासिल करनी होती है.

28 दिसंबर तक का मिला समय

ये सुविधा स्थायी नहीं है बल्कि एक तय समयसीमा के साथ आई है. पात्र पीएफ ट्रस्ट्स को अपनी स्थिति रेगुलराइज करने के लिए 28 दिसंबर 2026 तक का वक्त दिया गया है. असल में कुछ कंपनियों ने इनकम टैक्स विभाग से तो मान्यता ले ली थी, लेकिन EPFO के नियमों के तहत औपचारिक छूट प्राप्त नहीं की थी. इसके बावजूद उन्हें टैक्स बेनिफिट मिल रहे थे. अब इसी रेगुलेटरी खामी को दूर करने के लिए ये स्कीम लाई गई थी.

पीएफ ट्रस्ट्स को क्या करना होगा

जो ट्रस्ट्स लंबे समय से तकनीकी पेंच में फंसे हैं, उनके लिए ये एक बड़ी राहत है. नियम के मुताबिक, ऐसे छूट प्राप्त ट्रस्ट्स को अपने कर्मचारियों को कम से कम उतने ही फायदे देने होते हैं, जितने सीधे EPFO के तहत मिलते हैं. उन्हें निवेश के नियम, सही रिकॉर्ड मेंटेनेंस तथा अन्य मापदंडों का कड़ाई से पालन करना होता है. इस सुविधा से उन कंपनियों का रेगुलेटरी स्टेटस स्पष्ट हो जाएगा, जो अब तक अधर में लटके हुए थे.

कर्मचारियों के फंड पर पड़ेगा असर

पीएफ ट्रस्ट सिर्फ किसी कंपनी तथा सरकार के बीच का कागजी मामला नहीं है. इसमें लाखों कर्मचारियों की जीवनभर की गाढ़ी कमाई जुड़ी होती है. ट्रस्ट के निवेश के नियम, सही अकाउंटिंग तथा रेगुलेटरी स्थिति सीधे तौर पर कर्मचारियों के फायदे से जुड़े होते हैं. अगर ट्रस्ट सही ढंग से काम करेगा, तो कर्मचारियों के पैसे ज्यादा सुरक्षित रहेंगे. इस एमनेस्टी स्कीम के जरिए EPFO ये सुनिश्चित कर रहा है कि प्राइवेट ट्रस्ट के जरिए कटने वाले पीएफ पर भी खाताधारकों को वही सुरक्षा मिले, जो सीधे सरकारी सिस्टम में मिलती है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY