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आकाश आनंद की उड़ान को मायावती ने फिर रोका, भतीजे के खिलाफ गुस्से की क्या है वजह?​

बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद का राजनीतिक सफर एक बार फिर बड़े झटके पर आकर ठहर गया है. कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर पेश किए गए आकाश आनंद को अब पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया है. तीन सितंबर को लखनऊ में हुई पार्टी की अहम बैठक में […]

बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद का राजनीतिक सफर एक बार फिर बड़े झटके पर आकर ठहर गया है. कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर पेश किए गए आकाश आनंद को अब पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया है. तीन सितंबर को लखनऊ में हुई पार्टी की अहम बैठक में मायावती ने साफ कहा कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है और उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा. इसके बाद आकाश आनंद के राजनीतिक कद को लेकर नई बहस छिड़ गई है.

हालांकि यह कहना कि सिर्फ 1617 अगस्त की पोस्ट के कारण ही मायावती ने उन्हें हटाया, आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं है,लेकिन इस पोस्ट के बाद आकाश और की राजनीतिक लाइन में अंतर को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हुई थीं.

अंकित कुमार का मामला बना सियासी मुद्दा

विवाद की शुरुआत लखनऊ के दलित कैब ड्राइवर अंकित कुमार के मामले से हुई. अंकित ने आरोप लगाया था कि उनकी कैब में बैठे रेलवे कर्मचारियों ने एक दलित वरिष्ठ अधिकारी को लेकर जातिसूचक टिप्पणियां कीं. विरोध में अंकित ने यात्रियों को बीच रास्ते उतार दिया. इसके बाद उनके मुताबिक Rapido ने उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया था.

इसी मामले को आकाश आनंद ने सोशल मीडिया पर उठाया. उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी व्यक्ति की योग्यता पर सवाल है तो उसका नाम लिया जाए, पूरी जाति को बदनाम क्यों किया जा रहा है? इसके बाद उन्होंने इस पूरे प्रकरण को जातिवाद और सामाजिक सम्मान के बड़े सवाल से जोड़ दिया.

मोहन भागवत पर सीधा सवाल

यहीं से आकाश आनंद की पोस्ट ने नया राजनीतिक रंग ले लिया. उन्होंने आरक्षण को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियों का संदर्भ देते हुए सवाल उठाया कि अंकित जैसे दलित युवाओं के सवालों का जवाब कौन देगा? उन्होंने आरक्षण को सामाजिक बदलाव और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष से जोड़ते हुए अपनी बात रखी.

यही वह हिस्सा था, जिसने राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा पैदा की. क्योंकि मायावती खुद भी मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान पर हमला बोल चुकी थीं, लेकिन आकाश का अंदाज और सीधे सवाल करने का तरीका पार्टी की रणनीति के संदर्भ में चर्चा का विषय बन गया.

पोस्ट डिलीट होने से और बढ़ी चर्चा

आकाश की पोस्ट बाद में सोशल मीडिया से हटा दी गई. इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चलती रही कि क्या मायावती आकाश के इस आक्रामक रुख से असहज थीं. हालांकि पोस्ट हटाने के पीछे मायावती की नाराजगी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक सूत्रों और चर्चाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.

फिर आई ‘अंकल’ वाली राजनीति

आकाश आनंद ने इसके बाद यूपी की सियासत में दोबारा आक्रामक तेवर दिखाए. हाथरस की सभा में उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहकर संबोधित किया. उनका तर्क था कि वह करीब 30 साल के हैं और अखिलेश लगभग 50 के, इसलिए उन्हें अंकल कहना स्वाभाविक है. अखिलेश यादव ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मुद्दा ‘अंकल’ का नहीं बल्कि शिक्षा और आरक्षण जैसे सवालों का है.

और अब मायावती का बड़ा फैसला

इन तमाम घटनाक्रमों के बीच सितंबर की शुरुआत में मायावती ने आकाश आनंद को फिर बड़ी जिम्मेदारी से दूर कर दिया. यह 2024 के बाद तीसरी बार है जब आकाश को पार्टी में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. अब वह पार्टी में सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करेंगे.

मायावती ने इसके पीछे मुख्य वजह आकाश की राजनीतिक अपरिपक्वता बताई है. पार्टी की राष्ट्रीय स्तर की बैठक में उनका यह भी संकेत रहा कि विधानसभा चुनाव बेहद करीब हैं और ऐसे समय में संगठन की बड़ी जिम्मेदारी किसी ऐसे नेता को देना उचित नहीं होगा जिसे अभी और राजनीतिक अनुभव की जरूरत है.

सवाल सिर्फ एक पोस्ट का नहीं…

आकाश आनंद के मामले को सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट से जोड़कर देखना शायद पूरी तस्वीर नहीं होगी. पिछले ढाई साल में उनका राजनीतिक सफर लगातार उभार, विवाद, हटाए जाने और वापसी के दौर से गुजरा है. 2024 में विवादित भाषण के बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक पद और उत्तराधिकारी की भूमिका से हटाया था. बाद में उनकी वापसी हुई और अगस्त 2025 में उन्हें फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। अब एक बार फिर वही कहानी दोहराई गई है.

यानी सवाल यह नहीं है कि आकाश आनंद की एक पोस्ट ने उनकी कुर्सी छीन ली, बल्कि सवाल यह है कि क्या उनकी लगातार आक्रामक राजनीतिक शैली मायावती की उस रणनीति से टकरा रही है जिसमें अंतिम राजनीतिक नियंत्रण उनके हाथ में ही रहता है?

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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