देश में भारत मानक समय सिस्टम ऑफिशियली एक सितंबर 1947 को लागू हुआ था. भारत में मार्च 2027 से एक देशएक समय का नियम लागू होने जा रहा है. सरकार ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. यूं देश में एक ही टाइम ज़ोन लागू है लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में कुछ व्यवस्था स्थानीय सिस्टम के हिसाब से लागू है. अब ऐसा नहीं चलेगा. सबको इंडियन स्टैंडर्ड टाइम मानना होगा. बैंक, पोस्ट ऑफिस, स्कूल तथा अन्य सरकारी दफ्तर नई व्यवस्था के हिसाब से ही संचालित होंगे. आइए, भारतीय मानक समय लागू होने की 79वीं वर्षगांठ के बहाने जानते हैं कि छोटेछोटे देशों में अलगअलग टाइम ज़ोन लागू हैं तो फिर भारत और चीन में सिर्फ एक टाइम ज़ोन क्यों?

दुनिया में समय का बंटवारा टाइम ज़ोन के आधार पर होता है. पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है. इसलिए अलगअलग जगहों पर सूरज अलग समय पर दिखाई देता है. इसी कारण पूरी दुनिया को अलगअलग टाइम ज़ोन में बांटा गया है. आम तौर पर हर 15 डिग्री देशांतर पर समय में एक घंटे का अंतर माना जाता है. लेकिन हर देश इस नियम को पूरी तरह नहीं अपनाता. टाइम ज़ोन तय करना केवल भौगोलिक फैसला नहीं होता. इसमें राजनीति, प्रशासन, व्यापार, सुरक्षा और लोगों की सुविधा भी शामिल होती है. भारत और चीन इसका अच्छा उदाहरण हैं. दोनों देश बहुत बड़े हैं. दोनों के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में सूर्योदय के समय में काफी अंतर होता है. फिर भी दोनों देशों ने अपने पूरे मुख्य भूभाग के लिए एक ही आधिकारिक समय रखा है.
टाइम ज़ोन क्या होता है?
टाइम ज़ोन एक ऐसा क्षेत्र होता है, जहां घड़ी का समय एक जैसा रखा जाता है. दुनिया का आधार समय यूनिवर्सल टाइम कोऑर्डिनेटेड यानी यूटीसी है. इसके आधार पर अलगअलग देशों का समय आगे या पीछे होता है. भारत का आधिकारिक समय इंडियन स्टैंडर्ड टाइम यानी आईएसटी है. यह यूटीसी से 5 घंटे 30 मिनट आगे है. भारत पूरे देश में इसी समय का इस्तेमाल करता है. चीन का आधिकारिक समय चाइना स्टैंडर्ड टाइम है. इसे बीजिंग टाइम भी कहा जाता है. यह यूटीसी से 8 घंटे आगे है. चीन के पूरे मुख्य भूभाग में यही समय लागू है.
भारतीय मानक भारत और श्रीलंका में आधिकारिक रूप से मान्य समय है.
भारत में सिर्फ एक टाइम ज़ोन क्यों है?
भारत का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है. देश का पूर्वी भाग पश्चिमी भाग से काफी आगे सूरज की रोशनी प्राप्त करता है. अरुणाचल प्रदेश और असम जैसे राज्यों में सूर्योदय कई बार गुजरात और महाराष्ट्र से बहुत पहले हो जाता है. फिर भी भारत में एक ही टाइम ज़ोन रखा गया है. इसका एक बड़ा कारण प्रशासनिक एकरूपता है. पूरे देश में सरकारी कार्यालय, रेलवे, बैंक, स्कूल और कारोबार एक ही समय के अनुसार चलते हैं.
पहले भारत में अलगअलग स्थानीय समय का इस्तेमाल होता था. कई शहरों और क्षेत्रों में सूरज की स्थिति के आधार पर घड़ियां अलग रहती थीं. रेलवे के विकास के बाद एक समान समय की जरूरत महसूस हुई. इससे यात्रा और संचार आसान हुआ.
एक टाइम ज़ोन से देश में समन्वय सरल रहता है. सरकारी आदेशों में भ्रम कम होता है. ट्रेन और विमान का समय समझना आसान होता है. राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली कंपनियों को भी सुविधा रहती है. हालांकि, भारत में अलगअलग टाइम ज़ोन की मांग समयसमय पर उठती रही है. पूर्वोत्तर राज्यों में सूरज जल्दी निकलता है. वहां लोग सुबह जल्दी काम शुरू कर सकते हैं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अलग समय से बिजली की बचत हो सकती है.
दूसरी ओर, दो टाइम ज़ोन लागू करने से कई व्यावहारिक समस्याएं भी हो सकती हैं. रेलवे की समयसारणी बदलनी पड़ सकती है. राज्यों के बीच कार्यालयी काम में अंतर आ सकता है. सीमावर्ती क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में भ्रम बढ़ सकता है.
1 सितंबर 1947 को आधिकारिक रूप से इंडियन स्टैंडर्ड टाइम को पूरे देश में लागू किया गया.
चीन में एक ही टाइम ज़ोन क्यों है?
चीन का भूभाग पूर्व से पश्चिम तक बहुत फैला हुआ है. उसके पश्चिमी हिस्से में सूरज पूर्वी हिस्से की तुलना में काफी देर से दिखाई देता है. भौगोलिक दृष्टि से चीन में लगभग चार या पांच प्राकृतिक टाइम ज़ोन हो सकते हैं. इसके बावजूद चीन ने पूरे देश के लिए बीजिंग टाइम रखा है. इसका कारण राजनीतिक और प्रशासनिक एकता है. एक समय पूरे देश में एक जैसी घड़ी रखना सरकार के लिए आसान माना गया. चीन के पश्चिमी इलाकों में लोग स्थानीय जीवन के अनुसार अपने काम का समय बदल लेते हैं. कुछ क्षेत्रों में लोग बहुत देर से काम शुरू करते हैं. सूरज की रोशनी के अनुसार बाजार और दफ्तरों का समय अलग हो सकता है. चीन में कुछ समुदाय अनौपचारिक रूप से स्थानीय समय का भी उपयोग करते हैं. लेकिन रेल, हवाई यात्रा, सरकारी काम और राष्ट्रीय कारोबार के लिए बीजिंग टाइम ही मान्य है.
छोटे देशों में कई टाइम ज़ोन क्यों होते हैं?
किसी देश का आकार छोटा होने के बावजूद उसके द्वीप बहुत दूरदूर हो सकते हैं. अगर अलगअलग द्वीप कई सौ या हजार किलोमीटर की दूरी पर हों, तो वहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में बड़ा अंतर आ सकता है. ऐसे देशों के लिए कई टाइम ज़ोन रखना स्वाभाविक हो सकता है. इससे स्थानीय लोगों का दैनिक जीवन सूरज की रोशनी के साथ बेहतर मेल खाता है. कुछ देश प्रशासनिक रूप से छोटे हैं. लेकिन उनके द्वीप अलगअलग समुद्री क्षेत्रों में फैले हैं. इसलिए उनका कुल क्षेत्रफल या समुद्री विस्तार काफी बड़ा हो सकता है. कुछ ऐसे देशों के बारे जान लेना चाहिए.
किरिबाती में तीन टाइम ज़ोन
किरिबाती प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटा द्वीपीय देश है. इसके द्वीप बहुत बड़े समुद्री क्षेत्र में फैले हुए हैं. इस देश में तीन प्रमुख टाइम ज़ोन इस्तेमाल किए जाते हैं. किरिबाती का एक द्वीप समूह दूसरे समूह से बहुत दूर है. इसलिए वहां सूर्योदय और दिन की शुरुआत का समय अलग होता है. कई वर्षों तक इसके कुछ द्वीपों में तारीख का अंतर भी दिखाई देता था. 1990 के दशक के अंत में किरिबाती ने अपने टाइम ज़ोन में बदलाव किया. इसका उद्देश्य देश के सभी द्वीपों को एक ही कैलेंडर तारीख में लाना था. इससे राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक संपर्क मजबूत हुआ.
माइक्रोनेशिया में भी दो टाइम ज़ोन
फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया प्रशांत महासागर में स्थित है. यह कई द्वीपों और राज्यों से मिलकर बना देश है. इसके द्वीप काफी दूरी पर फैले हुए हैं. माइक्रोनेशिया में दो मुख्य टाइम ज़ोन इस्तेमाल होते हैं. पश्चिमी और पूर्वी द्वीपों में समय अलग रहता है. यह अंतर वहां की भौगोलिक स्थिति के कारण है. द्वीपों के बीच यात्रा करते समय लोगों को अपनी घड़ियां बदलनी पड़ सकती हैं. कारोबार और सरकारी काम के लिए स्थानीय समय को ध्यान में रखना जरूरी होता है.
न्यूजीलैंड और उसके बाहरी द्वीप
न्यूजीलैंड मुख्य रूप से एक ही टाइम ज़ोन का उपयोग करता है. लेकिन उसके कुछ बाहरी द्वीप अलग समय क्षेत्र में आते हैं. चैथम द्वीप न्यूजीलैंड के मुख्य द्वीपों से काफी दूर है. चैथम द्वीप का समय न्यूजीलैंड के मुख्य समय से 45 मिनट अलग रहता है. यह एक असामान्य उदाहरण है. दुनिया के अधिकतर टाइम ज़ोन पूरे घंटे या आधे घंटे के अंतर पर होते हैं. चैथम द्वीप में 45 मिनट का अंतर देखने को मिलता है.
इक्वाडोर और गैलापागोस द्वीप
इक्वाडोर दक्षिण अमेरिका का देश है. इसके मुख्य भूभाग और गैलापागोस द्वीपों में अलगअलग समय लागू होता है. गैलापागोस द्वीप मुख्य भूमि से काफी दूर हैं. वहां स्थानीय समय मुख्य भूभाग से अलग रखा गया है. इससे द्वीपों के लोगों और पर्यटकों को स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार जीवन चलाने में मदद मिलती है.
फ्रांस कई अलगअलग टाइम जोन फॉलो करता है. फोटो: Getty Images
कई टाइम ज़ोन फॉलो करता है फ्रांस
फ्रांस को अक्सर यूरोप का देश माना जाता है. लेकिन उसके कई समुद्री और विदेशी क्षेत्र दुनिया के अलगअलग हिस्सों में मौजूद हैं. इन्हीं क्षेत्रों के कारण फ्रांस दुनिया के सबसे अधिक टाइम ज़ोन वाले देशों में गिना जाता है.
फ्रांस के यूरोपीय मुख्य भूभाग में एक समय क्षेत्र है. लेकिन उसके द्वीप और विदेशी क्षेत्र प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागर में फैले हैं. वहां स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग समय लागू होता है. यह उदाहरण दिखाता है कि किसी देश के टाइम ज़ोन केवल उसके मुख्य भूभाग से तय नहीं होते. विदेशों में स्थित क्षेत्र भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं.
एक टाइम ज़ोन के कितने फायदे?
एक ही टाइम ज़ोन से प्रशासन आसान रहता है. देश भर में कार्यालयों का समय समान होता है. समाचार और प्रसारण में भ्रम कम होता है. रेलवे और विमान सेवाओं का संचालन सरल रहता है. राष्ट्रीय परीक्षाओं, सरकारी बैठकों और कारोबार में भी सुविधा होती है. लोग देश के किसी भी हिस्से में समय को आसानी से समझ सकते हैं.
कई टाइम ज़ोन के क्या हैं फायदे?
कई टाइम ज़ोन स्थानीय जीवन को सूरज के समय से जोड़ते हैं. इससे लोग प्राकृतिक रोशनी का बेहतर उपयोग कर सकते हैं. काम और स्कूल का समय स्थानीय जरूरत के अनुसार रखा जा सकता है. दूरदराज के द्वीपों में यह व्यवस्था अधिक उपयोगी होती है. वहां एक ही राष्ट्रीय समय रखने से लोगों की दिनचर्या बहुत असामान्य हो सकती है. टाइम ज़ोन का फैसला केवल नक्शे और देशांतर रेखाओं से नहीं होता. यह देश की भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक सोच पर भी निर्भर करता है. भारत ने प्रशासनिक सरलता और राष्ट्रीय समन्वय के लिए एक टाइम ज़ोन अपनाया है. चीन ने राजनीतिक एकता और केंद्रीकृत प्रशासन को प्राथमिकता दी है.