गुरुवार, 6 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
Explained: मिसाइल-बम ने फूंका इतना फ्यूल, जिससे 15 महीने रोशन होती भारत की इकोनॉम​ | PCB: Asian Legends खेलने पर Mohammad Irfan हो सकते हैं दो साल के लिए बैन​ | Rudrabhishek In Sawan: महादेव की कृपा के लिए क्यों जरूरी है Rudrabhishek? जानें इसके Benefits और नियम​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

कच्चे तेल की नरमी का कमाल! RBI के ‘पॉज’ के बावजूद 1 महीने के हाई पर पहुंचा रुपया​

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने भारतीय रुपये को एक नई संजीवनी दी है. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों पर ‘पॉज बटन’ दबाए रखने के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की नरमी ने डॉलर के मुकाबले रुपये को तेज उछाल दिया. इसके दम पर भारतीय रुपया अपने 1 […]

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने भारतीय रुपये को एक नई संजीवनी दी है. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों पर ‘पॉज बटन’ दबाए रखने के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की नरमी ने डॉलर के मुकाबले रुपये को तेज उछाल दिया. इसके दम पर भारतीय रुपया अपने 1 महीने के सबसे ऊपरी स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट में रुपए को लेकर किस तरह के आंकड़े देखने को मिले हैं…

रुपए में आया उछाल

बुधवार को भारतीय रुपया एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुआ. इसमें कच्चे तेल की कम कीमतों से मदद मिली, जबकि सेंट्रल बैंक की पॉलिसी में कोई बदलाव न करने की उम्मीद ने करेंसी की शुरुआती बढ़त को कुछ कम कर दिया. रुपया 0.5 फीसदी बढ़कर 94.92 प्रति अमेरिकी डॉलर पर खुला, जो 1 जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था. इसके तुरंत बाद, इसने अपनी बढ़त का लगभग आधा हिस्सा गंवा दिया और 95.1175 पर बंद हुआ, जो 7 जुलाई के बाद का सबसे मजबूत क्लोजिंग लेवल था.

HDFC सिक्योरिटीज के फॉरेन एक्सचेंज रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दरों को स्थिर रखने के फैसले और डॉलर व तेल की कीमतों में रिकवरी के कारण रुपया अपने इंट्राडे हाई से नीचे आ गया. उन्होंने कहा कि टेक्निकल नजरिए से, डॉलर के मुकाबले रुपया 94.75 के आसपास तुरंत सपोर्ट और 95.60 के पास रेजिस्टेंस मिल रहा है. हालांकि इस जोड़ी के लिए मैक्रो रुझान संरचनात्मक रूप से कमजोर बना हुआ है, लेकिन शॉर्टटर्म में कम कीमत पर खरीदारी करेंसी को रेजिस्टेंस लेवल की ओर धकेल सकती है.

तेल का खेल

पांच महीने से चल रहे अमेरिकाईरान संघर्ष में कूटनीतिक सफलता की उम्मीदों के कारण बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड कॉन्ट्रैक्ट पिछले दो सेशन में 12 फीसदी से अधिक गिर गया. हालांकि, बुधवार को यमन के ईरानसमर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी तेल टैंकर पर हमला करने के बाद तेल की कीमतों में फिर से उछाल आया. इस सप्ताह की शुरुआत में आई तेज गिरावट ने रुपए के लिए पॉजिटिव ट्रेंड को मजबूत किया, जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन में 1.4 फीसदी मजबूत हुआ है. ट्रेडर्स ने यह भी कहा कि हाल ही में फॉरेक्स इनफ्लो में बढ़ोतरी ने भी बाजार की धारणा को काफी हद तक बेहतर बनाया है. बाजार के जानकारों का कहना है कि रुपए के 95प्रतिडॉलर के स्तर से ऊपर जाने पर डॉलर की मांग बनी रहेगी.

RBI का फैसला

RBI ने बुधवार को अपनी प्रमुख दर और पॉलिसी के रुख में कोई बदलाव नहीं किया. पॉलिसी मेकर्स इस बात के स्पष्ट सबूत का इंतजार कर रहे हैं कि क्या तेल की अस्थिर कीमतें व्यापक महंगाई के दबाव को बढ़ा रही हैं. हालांकि, मार्केट के जानकारों की राय बंटी हुई है. सरकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री सोनल बधान को उम्मीद है कि दिसंबर में कम से कम एक बार 25बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी होगी, ताकि वास्तविक ब्याज दरों को नेगेटिव होने से रोका जा सके और रुपए को बचाया जा सके. स्पॉट मार्केट में आए बदलावों के कारण डॉलर/रुपए के फॉरवर्ड प्रीमियम में आज नरमी देखी गई. एक साल की इम्प्लाइड यील्ड 7 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 2.79 फीसदी हो गई.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY