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अब दिल्ली से नेपाल सिर्फ 8 घंटे में! गोरखपुर-सोनौली हाईवे तैयार, यहां देखें 830 किलोमीटर का पूरा रूट​

GorakhpurSonauli Highway: दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों लोगों के लिए नेपाल की यात्रा जल्द ही पहले से कहीं अधिक आसान और तेज होने वाली है. भारतनेपाल को जोड़ने वाला गोरखपुरसोनौली फोरलेन हाईवे अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. इस हाईवे के शुरू होने के बाद दिल्लीNCR से नेपाल के सोनौली बॉर्डर तक […]

GorakhpurSonauli Highway: दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों लोगों के लिए नेपाल की यात्रा जल्द ही पहले से कहीं अधिक आसान और तेज होने वाली है. भारतनेपाल को जोड़ने वाला गोरखपुरसोनौली फोरलेन हाईवे अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. इस हाईवे के शुरू होने के बाद दिल्लीNCR से नेपाल के सोनौली बॉर्डर तक का सफर काफी करीब 8 से 9 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. वर्षों से ट्रैफिक जाम, संकरी सड़कों और लंबी यात्रा से परेशान यात्रियों को इस परियोजना से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. आइए जानते दिल्ली से नेपाल का सफर कैसे सुपरफास्ट होगा…

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग 89 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. रिपोर्टों के अनुसार, फोरलेन हाईवे को सितंबर 2026 तक पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. गोरखपुर से सोनौली बॉर्डर तक बनने वाला यह हाईवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि भारत और नेपाल के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कॉरिडोर है.

महाराजगंज जिले में स्थित सोनौली बॉर्डर भारतनेपाल के सबसे व्यस्त सीमा मार्गों में से एक है. हर दिन हजारों पर्यटक, श्रद्धालु, व्यापारी और मालवाहक वाहन इसी रास्ते से दोनों देशों के बीच आवाजाही करते हैं. वर्तमान में दोलेन सड़क होने के कारण यहां अक्सर लंबा जाम लगता है, जिससे यात्रियों और व्यापारियों को काफी परेशानी होती है. फोरलेन हाईवे बनने के बाद इस समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है.

79.5 किलोमीटर लंबा फोरलेन कॉरिडोर

यह परियोजना गोरखपुर के जंगल कौड़िया से लेकर सोनौली तक लगभग 79.5 किलोमीटर लंबी है. इसे करीब ₹1458 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है. पूरे हाईवे को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इसे छह लेन तक विस्तारित किया जा सके. फिलहाल परियोजना फोरलेन के रूप में विकसित की जा रही है.

हाईवे पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए इस परियोजना में आधुनिक बुनियादी ढांचे का विशेष ध्यान रखा गया है. हाईवे पर एक रेलवे ओवरब्रिज, दो फ्लाईओवर, 24 अंडरपास, 105 कलवर्ट और लगभग 68 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण किया जा रहा है.

इसके अलावा पूरे मार्ग पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जा रहा है. इसके तहत सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले साइनबोर्ड और रियलटाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग जैसी हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध होंगी. इससे दुर्घटनाओं की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सकेगी और ट्रैफिक प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा.

दिल्लीNCR से नेपाल का सफर होगा आसान

इस हाईवे का सबसे बड़ा फायदा दिल्लीएनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बिहार के यात्रियों को मिलेगा. पहले नेपाल बॉर्डर तक पहुंचने में ट्रैफिक और खराब सड़क के कारण काफी समय लगता था, लेकिन अब यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आरामदायक होगी.

दिल्ली से नेपाल जाने वाले यात्री यमुना एक्सप्रेसवे, आगरालखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए सीधे गोरखपुर पहुंच सकेंगे. वहां से नया गोरखपुरसोनौली फोरलेन हाईवे उन्हें नेपाल सीमा तक तेज और सुगम कनेक्टिविटी देगा. इस पूरे रूट की कुल दूरी लगभग 815 से 830 किलोमीटर है. बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण यात्रा का समय 8 से 9 घंटे लगेगा.

सबसे तेज रूट और यात्रा गाइड

  • 1 यमुना एक्सप्रेस वे और आगरालखनऊ एक्सप्रेसवे: दिल्ली से अपनी कार या टैक्सी लेकर सबसे पहले यमुना एक्सप्रेसवे और फिर आगरालखनऊ एक्सप्रेसवे पकड़ें.
  • 2 पूर्वांचल एक्सप्रेसवे/गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे: लखनऊ के पास से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और फिर गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए सीधे गोरखपुर पहुंचें.
  • 3 गोरखपुरसोनौली फोरलेन हाईवे: गोरखपुर के ‘जंगल कौड़िया’ से सोनौली बॉर्डर तक का यह नया हाईवे लगभग पूरी तरह तैयार है.
  • 4 कुल दूरी: दिल्ली से नेपाल करीब 815 से 830 किलोमीटर है. नॉनस्टॉप ड्राइविंग या न्यूनतम स्टॉपेज के साथ इस नए एक्सप्रेसवे रूट के जरिए 8 से 9 घंटे में पहुंच सकते हैं.

व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बड़ा लाभ

गोरखपुरसोनौली हाईवे का लाभ केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा. सोनौली बॉर्डर भारत और नेपाल के बीच सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है. फोरलेन हाईवे बनने से मालवाहक वाहनों की आवाजाही तेज होगी, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और लॉजिस्टिक्स को नई गति मिलेगी.

इसके अलावा यह हाईवे बौद्ध सर्किट के प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी बेहतर कनेक्टिविटी देगा. गोरखपुर, कुशीनगर और नेपाल स्थित भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा. इससे धार्मिक पर्यटन के साथसाथ क्षेत्रीय पर्यटन उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की संभावना है.

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संपादकीय टीम

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