नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर 2 घंटे में सोनम वांगचुक को जंतरमंतर नहीं भेजा तो वे संसद मार्च के लिए निकल जाएंगे। वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। आज उनकी भूख हड़ताल का 23वां दिन है। वांगचुक ने अस्पताल को पत्र लिखकर कहा, ‘संसद मार्च में जाना है, मुझे डिस्चार्ज करें।’

उधर, सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने के लिए पहुंचे हैं। इससे पहले सुबह 10 बजे पुलिस ने जंतरमंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। इससे कई लोगों को चोटें आई हैं और कई लोगों के सिर भी फूट गए हैं। हालांकि, पुलिस ने इससे इनकार किया है।
जंतरमंतर से संसद तक के 1.5 किमी के रास्ते में सिर्फ प्रदर्शनकारी ही दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारी राजीव चौक और मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन में घुस गए। कई लोग बैरिकेडिंग तोड़कर पार्लियामेंट थाने तक भी पहुंचे। इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
सोनम वांगचुक को अब नहीं चाहिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा? शर्तों में जिक्र नहीं
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू करने वाले सोनम वांगचुक की हालिया शर्तों से शिक्षा मंत्री का नाम ही गायब है। दरअसल अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने 19 जुलाई को एक पत्र लिखकर कहा है कि अगर सरकार उनकी कुछ शर्तें मान लें तो वे अपना अनशन तोड़ने को तैयार हैं। इस पत्र में उन्होंने 3 शर्तों का जिक्र किया है। हालांकि इनमें कहीं भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग नहीं की गई है। अब सवाल उठने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से एक बयान में इसकी सफाई दी गई है।
इससे पहले पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सोमवार को अपना अनशन खत्म करने का संकेत दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक हाथ से लिखे नोट को शेयर करते हुए वांगचुक ने इसमें लिखा कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में विफलता और पेपर लीक की जिम्मेदारी लेती है, तो वह तुरंत अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे।
क्या हैं 3 शर्तें?
अनशन खत्म करने के लिए सोनम वांगचुक ने मुख्य रूप से तीन शर्तें रखी हैं। उन्होंने कहा कि वे अपना अनशन तोड़ देंगे अगर, सरकार हाल ही में हुई पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था की नाकामियों की जिम्मेदारी ले। दूसरी शर्त यह है कि सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी के नेता संसद पहुंचें, जहां अलगअलग राजनीतिक दलों के सांसद उन्हें यह आश्वासन दें कि आगामी मानसून सत्र में वे शिक्षा से जुड़े अहम मुद्दे को उठाएंगे। तीसरी शर्त यह है कि बड़ी पार्टी के शीर्ष नेता अस्पताल में आकर उनसे मुलाकात करें और मांगें पूरी करने का आश्वासन दें।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर वांगचुक की चुप्पी
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि सोनम वांगचुक द्वारा रखी गईं नई शर्तों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कोई जिक्र नहीं है। यह इसीलिए अहम है कि क्योंकि 20 जून से जंतरमंतर पर शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में CJP की मुख्य मांग यही रही थी। खुद वांगचुक कई बार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात कर चुके थे।