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दिल्ली की नई EV पॉलिसी पर बवाल! फैसला बदलने की मांग, आखिर क्यों विरोध में उतरी ट्रांसपोर्ट यूनियन?​

दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को लेकर ट्रांसपोर्ट यूनियन ने अपनी नाराजगी जताई है. दिल्ली NCR ट्रांसपोर्ट एकता मंच ने सरकार से इस नीति पर दोबारा विचार करने की मांग की है. यूनियन का कहना है कि दिल्ली में अभी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में […]

दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को लेकर ट्रांसपोर्ट यूनियन ने अपनी नाराजगी जताई है. दिल्ली NCR ट्रांसपोर्ट एकता मंच ने सरकार से इस नीति पर दोबारा विचार करने की मांग की है. यूनियन का कहना है कि दिल्ली में अभी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में सभी नए ऑटो और दूसरे वाहनों को जबरन इलेक्ट्रिक बनाने का फैसला लाखों ड्राइवरों और छोटे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है.

यूनियन ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को एक पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर की है. पत्र में कहा गया है कि 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए रजिस्ट्रेशन वाले सभी ऑटोरिक्शा केवल इलेक्ट्रिक होंगे. लेकिन इससे पहले सरकार को चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग सेंटर और आसान फाइनेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए.

क्या है ट्रांसपोर्ट यूनियन का तर्क?

दिल्ली NCR ट्रांसपोर्ट एकता मंच के महासचिव श्याम सुंदर ने कहा कि इस समय राजधानी में पर्याप्त संख्या में EV चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं. बैटरी स्वैपिंग की सुविधा भी बहुत सीमित है. इसके अलावा ड्राइवरों और छोटे वाहन मालिकों के लिए सस्ते लोन और आसान फाइनेंस की भी व्यवस्था नहीं है. वहीं, पुरानी लिथियमआयन बैटरियों की सेफ स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग को लेकर भी कोई स्पष्ट नीति नहीं है.

इन लोगों को हो सकता है नुकसान

यूनियन का कहना है कि अगर इन सभी जरूरी तैयारियों के बिना इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना अनिवार्य किया गया, तो इसका सीधा असर लाखों ऑटो चालकों, छोटे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और व्यक्तिगत वाहन मालिकों पर पड़ेगा. उन्हें नया वाहन खरीदने के लिए भारी रकम खर्च करनी पड़ेगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है.

हालांकि, ट्रांसपोर्ट यूनियन ने यह भी साफ किया कि वह स्वच्छ पर्यावरण और आधुनिक तकनीक के खिलाफ नहीं है. संगठन का कहना है कि वह इलेक्ट्रिक वाहनों का समर्थन करता है, लेकिन किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले सरकार को पूरी तैयारी करनी चाहिए. साथ ही, ट्रांसपोर्ट यूनियन, ड्राइवर संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से विस्तार से बातचीत करनी चाहिए ताकि सभी की समस्याओं को समझकर व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके.

EV पॉलिसी

यूनियन ने सरकार से के अनिवार्य प्रावधानों की तुरंत समीक्षा करने की मांग की है. उनका कहना है कि बिना पर्याप्त तैयारी के इस तरह का फैसला लागू करना उचित नहीं होगा. गौरतलब है कि दिल्ली सरकार की नई EV पॉलिसी के तहत 1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक थ्रीव्हीलर का ही नया रजिस्ट्रेशन होगा. इसके अलावा अप्रैल 2028 से राजधानी में रजिस्टर होने वाले सभी नए दोपहिया वाहन भी केवल इलेक्ट्रिक होंगे. सरकार का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाना है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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