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E-20 से कितना घटेगा माइलेज, कितना बढ़ेगा खर्च…इन 6 प्वाइंट्स में समझिए पूरा मामला​

देशभर में E20 लागू होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे गाड़ियों का माइलेज कम होगा और आम लोगों की जेब पर कितना असर पड़ेगा. भारत जैसे प्राइस सेंसिटिव और माइलेज सेंसिटिव देश में ज्यादातर वाहन मालिक हर लीटर पेट्रोल और हर किलोमीटर के एवरेज पर नजर रखते हैं. ऐसे में […]

देशभर में E20 लागू होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे गाड़ियों का माइलेज कम होगा और आम लोगों की जेब पर कितना असर पड़ेगा. भारत जैसे प्राइस सेंसिटिव और माइलेज सेंसिटिव देश में ज्यादातर वाहन मालिक हर लीटर पेट्रोल और हर किलोमीटर के एवरेज पर नजर रखते हैं. ऐसे में E20 को लेकर लोगों की चिंता स्वाभाविक है. अगर कोई व्यक्ति रोजाना 50 किलोमीटर का सफर करता है, तो E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर उसकी ईंधन खपत और मासिक खर्च में कितना बदलाव आ सकता है? माइलेज में संभावित गिरावट कितनी है और क्या यह फर्क वास्तव में इतना बड़ा है कि आम उपभोक्ता इसे महसूस करे? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए टीवी9 ने एक्सपर्ट से बात की. आइए अलगअलग सवालों पर एक्सपर्ट की राय के जरिए पूरा मामला समझिए हैं.

1. कितने लीटर बढ़ जाएगी खपत

इसको एक उदाहरण से समझते हैं मान लीजिए पहले आपकी कार 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी और इथेनॉल के बाद उसमें गिरावट आकर 14.2 किली प्रति लीटर रह जाती है तो आपकी जेब का खर्च महीने के हिसाब से बढ़ जाएगा. इसका हिसाब लगाने के लिए मान के चलते हैं कि आप रोजाना 50 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं तो आपको महाने में करीब 99 लीटर तेल लगता है. तो कम माइलेज की वजह से वह बढ़कर 102 लीटर प्रति महीना पहुंच जाएगा. अब तेल ज्यादा लगेगा तो जाहिर सी बात है खर्च बढ़ जाएगा. कितना खर्च बढ़ेगा ये समझने के लिए दिल्ली में इथेनॉल का रेट जानते हैं. अभी दिल्ली में E20 पेट्रोल 102 रुपये प्रति लीटर के करीब है. तो इसके हिसाब से अगर आपका महीने के तेल 3 लीटर ज्यादा खर्च हुआ तो पैसे में वह 300 रुपये से थोड़ा हो जाएगा.इस पर ऑटो एक्सपर्ट टूटू धवन ने कहा कि अगर आपका बजट हर महीने का बहुत टाइट रहता है तब तो यह आपको परेशान करेगा. वरना ये बहुत बड़ी रकम नहीं है लोग इतने रुपये की तो महीने में आइसक्रीम खा जाते हैं.

2. माइलेज और मेंटेनेंस पर एक्सपर्ट की राय

माइलेज और मेंटेनेंस से जुड़े सवाल पर ऑटो एक्सपर्ट अविक चट्टोपाध्याय ने कहा कि माइलेज पर असर पड़ता है. साथ में मेंनेटेंस भी बढ़ा है. उन्होंने कहा कि कंज्यूमर के नजरिए से देखा जाए तो खर्चा बढ़ गया है. इसके अलावा अगर नई गाड़ी है तो उसमें डैमेज थोड़ा कम होगा मगर अगर पुरानी गाड़ी है तो उसमें डैमेज का रिक्स बढ़ा है. ऐसे में माइलेज तो कम होगा ही साथसाथ मेंटनेंस का खर्च भी बजट में जुड़ जाएगा. कुल मिलाकर पुरानी गाड़ी वालों पर इसकी मार नए के मुकाबले ज्यादा पड़ेगी.

3. E10 में 810% कम हो सकता है माइलेज

वर्ल्ड ऑटो फोरम के CEO अनुज गुगलानी ने कहा कि एआरएआई ने बोला है कि अगर आप E20 फ्यूल E20 कंप्लाइंड व्हीकल में डालेंगे तो 2 से 6% माइलेज ड्रॉप होगा और उसमें ये भी है कि अगर आप E10 कंप्लाइट में डालेंगे तो वो और ज्यादा 8 से 10% तक माइलेज गिर सकता है. हालांकि, उन्होंने इस फैसले के लिए सरकार की सरहना भी की उनका कहना था कि ग्लोबल क्राइसिस के समय में जहां पूरी दुनिया में तेल के दाम रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई. पाकिस्तान में दाम 3040 प्रतिशत तक दाम बढ़ गए. वहीं, भारत में सिर्फ 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इसमें इथेनॉल की प्रमुख भूमिका रही है.

4. एनर्जी डेंसिटी में क्या है अंतर

इथेनॉल अल्कोहल है उसकी एनर्जी डेंसिटी उतनी नहीं है जितनी पेट्रोल की है. एनर्जी डेंसिटी मतलब उतना ही हिस्सा जलने में कितनी एनर्जी प्रोड्यूस होगी. इस पर वेक्टर के एडिटर आशीष झा ने कहा कि एनर्जी डेंसिटी को लेकर एक और एस्पेक्ट है. पेट्रोल इंपोर्ट के ऊपर हम लोग इतनी चर्चा कर रहे हैं उसमें एक चीज बहुत ही ज्यादा क्रूशियल है कि आप प्योर पेट्रोल वर्सेस इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल का अगर रेश्यो देखेंगे तो फॉर इजी कैलकुलेशन मान के चलते हैं कि 100 का आंकड़ा लेते हैं तो उसमें आपका अगर 100% फ्यूल है तो ऑफ कोर्स 100 वो हो गया. लेकिन E20 में 20% इथेनॉल पेट्रोल होता है. अगर आप इसको एक्स्ट्राट करेंगे तो हम लोग 104 के आसपास का फिगर शायद पकड़ेंगे. उसमें 2 से 4% का इंक्रीमेंटल वैल्यू होगा. तो नेट जो आपका पेट्रोलियम जो आप स्पेंड कर रहे हैं गाड़ी में वो करीब 8283 के आसपास का होगा.

5. कितनी कम हो सकती है फ्यूल एफिशियंसी

इस पर Ask Car Guru के संस्थापक अमित खरे ने कहा कि मेरे हिसाब से ये 1012% के आसपास है. उन्होंने कहा कि जितनी छोटी साइज के इंजन होंगे उतना ही ज्यादा उन पर असर देखने को मिलेगा और जितनी बड़ी साइज के इंजन होंगे उन पर असर उतना ही कम होगा. इसका मतलब यह है कि कार का इंजन कितना तगड़ा है एफिशियंसी उस पर भी निर्भर करेगी.

6. क्या यह उपभोक्ता नियमों के खिलाफ है

क्या यह नीति उपभोक्ता नियमों के तहत ठीक है इस पर हमने कंज्यूमर एक्सपर्ट प्रो. बेजॉन मिश्रा से पूछा. तो उन्होने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत हमारा हक है कि हमको सारी इंफॉर्मेशन सही ढंग से मिले. उस भाषा में मिले जो हम समझ सकते हैं और वह यदि नहीं दिया जा रहा है तो गलत हो रहा है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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