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RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें! साल के आखिर में होम, कार और पर्सनल लोन हो सकते हैं महंगे​

भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल आने वाले कुछ समय तक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता. हालांकि, ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म BofA Securities का मानना है कि दिसंबर 2026 से RBI कुल 50 बेसिस प्वाइंट तक ब्याज दरें बढ़ा सकता है, क्योंकि महंगाई का दबाव अब घरेलू कारणों से बढ़ने की आशंका है. रिपोर्ट के […]

भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल आने वाले कुछ समय तक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता. हालांकि, ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म BofA Securities का मानना है कि दिसंबर 2026 से RBI कुल 50 बेसिस प्वाइंट तक ब्याज दरें बढ़ा सकता है, क्योंकि महंगाई का दबाव अब घरेलू कारणों से बढ़ने की आशंका है.

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले जहां अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा वैश्विक भूराजनीतिक तनाव था, वहीं अब मौसम और मानसून जैसे घरेलू कारक ज्यादा अहम हो गए हैं. आने वाले समय में RBI की मौद्रिक नीति तय करने में इनकी बड़ी भूमिका हो सकती है.

FY27 में GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया

BofA Securities ने भारत की वित्त वर्ष 202627 की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में खपत और निवेश बढ़ने से आर्थिक विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

महंगाई फिलहाल काबू में, लेकिन आगे बढ़ सकता है दबाव

रिपोर्ट में FY27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई का अनुमान 4.8% लगाया गया है, जो पहले के अनुमान से कम है. हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है और अल नीनो का असर बढ़ता है, तो वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.

इन वजहों से मिल सकती है राहत

रिपोर्ट के अनुसार, देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार, वैश्विक कमोडिटी कीमतों में नरमी और व्यापार की बेहतर स्थिति महंगाई के दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकती है.

वहीं, FY27 में कम कच्चे तेल की कीमतों के चलते भारत का चालू खाता घाटा GDP के 1.2% तक सीमित रहने का अनुमान है. साथ ही राजकोषीय घाटा 4.5% रहने का अनुमान जताया गया है.

NBFC को होगा फायदा, लेकिन कर्ज महंगा हो सकता है

रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत आर्थिक माहौल से नॉनबैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों को फायदा मिलेगा. खासकर रिटेल लोन, वाहन ऋण और MSME लोन की मांग बढ़ सकती है.

हालांकि, यदि RBI साल के आखिर में ब्याज दरें बढ़ाता है, तो बैंकों और NBFC के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ सकती है. इसका असर लोन की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे हो सकते हैं.

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संपादकीय टीम

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