HealthViral

एक काम अधूरा छोड़ दूसरे में लग जाते हैं? बातचीत के दौरान अचानक भटक जाता है ध्यान? कहीं ये ADHD तो नहीं!

एक काम अधूरा छोड़ दूसरे में लग जाते हैं? बातचीत के दौरान अचानक भटक जाता है ध्यान? कहीं ये ADHD तो नहीं!

विहान दिल्ली के एक पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा का छात्र है। उसका दिमाग बहुत तेज है, लेकिन उसे पढ़ी हुई चीजों को याद रखने और लंबे समय तक किसी एक काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है। वह स्कूल का लगभग पूरा सिलेबस कवर करता है और परीक्षा की अच्छी तैयारी भी करता है, लेकिन जब आंसर शीट में लिखने की बारी आती है तो उसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं होता। क्लास में एक घंटे तक लगातार बैठना उसके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। पढ़ाई के दौरान उसका ध्यान बार-बार खेलकूद या दूसरी गतिविधियों की ओर भटक जाता है। वह एक विषय का काम शुरू करता है, लेकिन उसे पूरा किए बिना दूसरे काम में लग जाता है। विहान अपनी पढ़ाई और जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाना चाहता है, नियमित रूप से क्लास अटेंड करना चाहता है, लेकिन चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाता।

एक काम अधूरा छोड़ दूसरे में लग जाते हैं? बातचीत के दौरान अचानक भटक जाता है ध्यान? कहीं ये ADHD तो नहीं!
एक काम अधूरा छोड़ दूसरे में लग जाते हैं? बातचीत के दौरान अचानक भटक जाता है ध्यान? कहीं ये ADHD तो नहीं!

मेडिकल भाषा में विहान की यह समस्या सिर्फ लापरवाही या अनुशासन की कमी नहीं है, बल्कि यह अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) नामक एक न्यूरो डेवलपमेंटल विकार का संकेत हो सकती है। विहान की यह परेशानी केवल उसकी नहीं है, ऐसे कई बच्चे, किशोर और वयस्क हैं जो रोजाना इसी तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ध्यान भटकना एक आम बात लग सकती है। लेकिन जब ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, अत्यधिक बेचैनी या आवेगपूर्ण व्यवहार किसी व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।  

ADHD के लक्षण आखिर कैसे दिखते हैं?

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि कोई व्यक्ति आपसे बात कर रहा हो, लेकिन कुछ ही सेकंड में आपका ध्यान खिड़की के बाहर, मोबाइल की नोटिफिकेशन या किसी दूसरे विचार पर चला जाए? या फिर आपने पूरे उत्साह के साथ कोई काम शुरू किया हो, लेकिन उसे पूरा करने से पहले ही किसी दूसरे काम में लग गए हों? अगर ऐसा कभी-कभार होता है तो यह सामान्य हो सकता है, लेकिन जब यह व्यवहार बार-बार होने लगे और पढ़ाई, नौकरी या रिश्तों को प्रभावित करने लगे, तो यह ADHD का संकेत हो सकता है।

हमारे आसपास ऐसे कई बच्चे, युवा और वयस्क हैं जो इन समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। ADHD दिमाग के फ्रंटल लोब से जुड़ा एक विकार है, जो ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, आवेगों को नियंत्रित करने की योग्यता और याददाश्त को प्रभावित करता है। फोर्टिस हेल्थकेयर में अदायु माइंडफुलनेस हॉस्पिटल में सलाहकार मनोचिकित्सक डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया ADHD के लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग तरीके से दिखाई दे सकते हैं जैसे

  1. इन अटेंशन:  मान लीजिए आप किसी मीटिंग में बैठे हैं या क्लास में टीचर पढ़ा रहे हैं। शुरुआत में आप ध्यान से सुनते हैं, लेकिन कुछ ही मिनटों में आपका ध्यान पूरी तरह कहीं और चला जाता है। बाद में आपको समझ ही नहीं आता कि सामने वाले ने क्या कहा था। यह ADHD का एक सामान्य लक्षण हो सकता है।
  2. अधूरे काम छोड़ देना: आपने तय किया कि आज अलमारी साफ करेंगे। अलमारी खोलते ही कोई पुरानी किताब मिल गई और आप उसे पढ़ने लग गए। फिर अचानक मोबाइल उठा लिया और अलमारी वैसे ही खुली रह गई। ADHD से जूझ रहे लोग अक्सर एक काम शुरू करते हैं लेकिन उसे पूरा करने से पहले दूसरे काम में लग जाते हैं।
  3. भुलक्कड़पन: घर से निकलते समय चाबी कहां रखी, चश्मा कहां उतारा या मोबाइल किस कमरे में छोड़ दिया-ऐसी बातें बार-बार भूल जाना भी ADHD का संकेत हो सकता है। कई लोग महत्वपूर्ण अपॉइंटमेंट, मीटिंग या जरूरी काम भी भूल जाते हैं।
  4. टाइम मैनेजमेंट में परेशानी: ऐसे लोगों को अक्सर समय का सही अंदाजा नहीं होता। वे सोचते हैं कि कोई काम 10 मिनट में पूरा हो जाएगा, लेकिन उसमें आधा घंटा लग जाता है। नतीजा यह होता है कि वे अक्सर लेट पहुंचते हैं, डेडलाइन मिस कर देते हैं या काम को आखिरी समय तक टालते रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्षणों का होना हमेशा ADHD नहीं होता, लेकिन जब ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें और व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी या सामाजिक जीवन को प्रभावित करने लगें, तब विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

मनोचिकित्सक की सलाह

मनोचिकित्सकों का कहना है कि ADHD से जूझ रहे बच्चे या वयस्क जानबूझकर ऐसा नहीं करते। उनके मस्तिष्क में ध्यान और आवेगों को नियंत्रित करने वाली प्रक्रियाएं अलग तरह से काम करती हैं। आपको बता दूं कि मेडिकल साइंस में यह एक न्यूरो डेवलपमेंट डिसऑर्डर है, जिसमें मस्तिष्क के कुछ हिस्से ध्यान, आवेग कंट्रोल और कार्यों को व्यवस्थित करने की क्षमता को प्रभावित करता हैं। इस कारण व्यक्ति चाहकर भी लंबे समय तक किसी एक काम पर फोकस नहीं कर पाता।

 ADHD मानसिक परेशानी है जिसके लिए पीड़ित जिम्मेदार नहीं

विहान जैसे बच्चों को अक्सर माता-पिता और शिक्षक जिद्दी, भुलक्कड़ या कमजोर छात्र मानकर डांटते या सजा देते हैं। इससे बच्चे का आत्मविश्वास टूट जाता है। अगर बच्चा खेलकूद में बहुत तेज है लेकिन पढ़ाई की बारी आते ही उसका दिमाग थक जाता है या वह एक जगह बैठ नहीं पाता, तो उसे डांटने के बजाय डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए। क्योंकि इस तरह की परेशानी के लिए न्यूरोलॉजिकल स्थिति जिम्मेदार होती है। इसमें मस्तिष्क के डोपामिन, की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक लगभग 70 से 80 प्रतिशत मामलों में आनुवंशिक कारण इस परेशानी के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। यह किसी एक जीन की वजह से नहीं बल्कि कई जीनों के संयुक्त प्रभाव से विकसित होने वाली स्थिति है। इसके अलावा कुछ पर्यावरणीय कारक भी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

इस बीमारी का पता कैसे चलता है?

मान लीजिए आपका बच्चा पढ़ाई में होशियार है, लेकिन बार-बार चीजें भूल जाता है, क्लास में ध्यान नहीं लगा पाता या हर काम अधूरा छोड़ देता है। ऐसे में कई माता-पिता सोचते हैं कि शायद कोई टेस्ट या ब्लड जांच करवाकर ADHD का पता लगाया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं है। ADHD की पहचान किसी ब्लड टेस्ट या लैब जांच से नहीं होती। इसके लिए मनोचिकित्सक या साइकोलॉजिस्ट बच्चे या वयस्क के व्यवहार, आदतों और मेडिकल हिस्ट्री का विस्तार से मूल्यांकन करते हैं। अगर ध्यान की कमी, बेचैनी या आवेगपूर्ण व्यवहार जैसे लक्षण लगातार छह महीने या उससे अधिक समय तक घर, स्कूल या कार्यस्थल जैसी एक से अधिक परिस्थितियों में दिखाई दें, तब ADHD की संभावना पर विचार किया जाता है।

मनोचिकित्सकों के अनुसार, ADHD से पीड़ित व्यक्ति जानबूझकर ध्यान नहीं भटकाता और न ही वह आलसी होता है। इसलिए उसे समझने और सहयोग देने की जरूरत होती है। समय पर विशेषज्ञ की सलाह, CBT थेरेपी और परिवार के समर्थन से वे पढ़ाई, करियर और जीवन में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकता हैं।

ADHD का इलाज और एकाग्रता बढ़ाने के उपाय

वैसे मेडिकल साइंस में इस बीमारी का इलाज संभव है। डॉक्टर मरीज की स्थिति को समझते हुए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी के जरिए मरीज को अपने विचारों को व्यवस्थित करना और समय का सही मैनेजमेंट करना सिखाते हैं। गंभीर मामलों में मनोचिकित्सक कुछ ऐसी दवाएं प्रिसक्राइब करते हैं जो दिमाग में डोपामाइन के स्तर को संतुलित करती हैं। इस बीमारी से उबरने में लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें भी सुधार करती है।

Khabar Monkey

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ADHD के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। केवल किसी एक या कुछ लक्षणों के आधार पर स्वयं निदान (Self-diagnosis) नहीं करना चाहिए। यदि आप या आपके बच्चे में ध्यान की कमी, अत्यधिक बेचैनी या आवेगपूर्ण व्यवहार जैसे लक्षण लंबे समय से दिखाई दे रहे हैं, तो सही जांच और उपचार के लिए किसी योग्य क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से परामर्श अवश्य लें।

Leave a Reply