शरीर को स्वस्थ और हाइड्रेटेड रखने के लिए डॉक्टर रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पीने की सलाह देते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स यूरिन के जरिए बाहर निकल जाते हैं। किडनी पानी का उपयोग करके शरीर से अपशिष्ट और हानिकारक तत्वों को फिल्टर करती है, जिससे शरीर की सफाई होती रहती है और शरीर बेहतर तरीके से काम करता है। लेकिन क्या आपके साथ ऐसा होता है कि दिनभर खूब पानी पीने के बाद भी आपको सिर्फ 2 से 3 बार ही पेशाब आता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स और यूरोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, इस स्थिति को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना किडनी या ब्लैडर के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

Paras Hospitals पटना के डायरेक्टर Ajay Kumar न्यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी और ट्रांसप्लांट विभाग के जाने-माने निदेशक (Director) और प्रमुख मूत्र रोग विशेषज्ञ (Urologist) हैं, ने बताया पेशाब का बहुत ज्यादा या बहुत कम आना दोनों ही स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संकेत हो सकते हैं। यूरिन का सीधा संबंध किडनी की कार्यक्षमता से जुड़ा होता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार सामान्य से कम पेशाब आ रहा है, तो यह किडनी से जुड़ी बीमारी या उसकी कार्यप्रणाली में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि इस समस्या के पीछे क्या मुख्य कारण हो सकते हैं।
हेल्दी आदमी को दिन में कितनी बार करना चाहिए पेशाब
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, एक स्वस्थ व्यक्ति को दिनभर में आमतौर पर 1.5 से 2 लीटर तक यूरिन पास करना चाहिए, हालांकि इसकी मात्रा पानी पीने की आदत, मौसम और शरीर की जरूरतों पर निर्भर करती है। आमतौर पर लोग दिन में करीब 4 से 8 बार पेशाब करते हैं, जिसे सामान्य माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बहुत कम पेशाब आए या बार-बार पेशाब की जरूरत महसूस हो, तो यह शरीर में पानी की कमी, यूरिन इंफेक्शन, डायबिटीज या किडनी से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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यूरिन कम आने के संभावित कारण और उससे जुड़ी समस्याएं
कम यूरिन आना सिर्फ पानी कम पीने का संकेत नहीं होता, बल्कि यह शरीर में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है। अगर लंबे समय तक पेशाब कम आए, तो इसके पीछे ये कारण हो सकते हैं
- किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होना या किडनी फेलियर
- किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन
- शरीर में पानी की कमी
- लो ब्लड प्रेशर की समस्या
- हार्ट से जुड़ी बीमारियां, जिससे किडनी तक पर्याप्त ब्लड सप्लाई नहीं पहुंचती
- पेशाब की नली में रुकावट या पथरी होना
- लिवर संबंधी समस्याएं
- पेट, पैरों या शरीर में सूजन आना
- डायबिटीज या हाई ब्लड शुगर
- कुछ दवाइयों का ज्यादा सेवन
- मानसिक तनाव या न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
- एनीमिया
- गंभीर मामलों में मिर्गी या दौरे की स्थिति कारण बन सकती है।
- अगर पेशाब कम आने के साथ थकान, सूजन, जलन, सांस फूलना या कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज न होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
यूरिन कम आने पर क्या करें?
- अगर आपको सामान्य से कम पेशाब आ रहा है, या फिर दिन में दो से तीन बार पेशाब आता है तो इसे नजरअंदाज नहीं करें। सही खानपान और लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।
- शरीर को हाइड्रेट रखें और दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। आमतौर पर रोजाना 2 से 3 लीटर पानी पीना फायदेमंद माना जाता है।
दस्त, उल्टी या डिहाइड्रेशन की स्थिति में सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि नारियल पानी, ORS, नींबू पानी और अन्य लिक्विड फूड्स का सेवन भी करें, ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे।
अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। संतुलित डाइट लें और ज्यादा मीठी व रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों से बचें।
हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी पर असर डाल सकता है, इसलिए तली-भुनी और ज्यादा नमक वाली चीजों का सेवन कम करें।
धूम्रपान और शराब की आदत किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इनसे दूरी बनाना बेहतर है।
पेशाब में जलन, सूजन, कमजोरी या लंबे समय तक कम यूरिन जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और जरूरी जांच कराएं।
डाइट में संतुलित मात्रा में नमक लें, क्योंकि ज्यादा नमक शरीर में पानी रोक सकता है और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
अगर समस्या लगातार बनी रहे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें बताए गए उपाय और सुझाव विशेषज्ञों की राय एवं सार्वजनिक जानकारी पर आधारित हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, दवा या उपचार को अपनाने से पहले डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।












