
जुआ खेलना हमेशा से ही बुरा काम माना गया है। इस्लाम में सट्टा खेलना (Islam me Satta) यानी जुआ खेलना हराम है। क्योंकि जुआ खेलने से बहुत से लोग तबाह हो चुके हैं और बहुत से घर बर्बाद हो चुके हैं। इस बुरी लत ने न जाने कितने रिश्ते बर्बाद कर दिए। कुरान में सट्टा खेलने वाले को सख्त सजा सुना दी गई है। हदीस में लिखा है कि जुआ खेलने वाला इंसान कभी सुकून से नहीं रह पाता है। क्योंकि नशे की तरह ही जुआ खेलना भी एक ऐसी लत है जिससे पीछा छुड़ाना बहुत मुश्किल है। अल्लाह हम सबको सट्टेबाजी से महफूज फरमाए। आइए हम आपको कुरान और हदीस की रौशनी में सट्टेबाजी (Islam me Satta) का मसला बता देते हैं।
इस्लाम धर्म के अंदर जुआ खेलना (Islam me Satta) एक बहुत बड़ा गुनाह माना गया है। चूंकि जुआ खेलना समय और पैसों की बेतहाशा बर्बादी है। सट्टेबाजी शरीयत के खिलाफ हे। सट्टे में पैसे हारने के बाद कई मुसलमान खुदकुशी भी कर लेते हैं। दीन की कमी की वजह से आज भी कई मुसलमान सट्टेबाजी की बुरी लत का शिकार हैं। हमें उनको सुधारने की कोशिश करनी चाहिए और अल्लाह से उनके लिए तौबा की दुआ करनी चाहिए।
हदीस में क्या लिखा है ?
हुज़ूर ए अक्दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया “जिसने जुआ खेला गोया उसने खिंज़ीर (सुवर) के गोश्त और ख़ून में हाथ धोया”
(मुस्लिम शरीफ़/अबुदावुद शरीफ़/मुकाशिफ़्तुल क़ुलुब,बाब-99,सफ़ा-635)
अब आप खुद ही सोचे कि जब नबी ए करीम ने इतनी खतरनाक बात कही है तो मतलब इस गुनाह की सजा कितनी गजब होगी। अल्लाह हमें सट्टेबाजी से सुरक्षित रखें। अगर आपके आसपास भी कोई मुसलमान सट्टे (Islam me Satta) में लिप्त है तो उसे ये हदीस बताएं।
क्यों मना है मुसलमानों का जुआ खेलना ?
इस्लाम में हर वो अमल मना है जिसके बाद इस्लान बेहिस और पागल सा हो जाता है। नशे की तरह ही जुआ खेलने वाले को नमाज का वक्त याद नहीं रहता है। लोग सट्टे (Islam me Satta) में मग्न होकर नमाज से बेखबर हो जाते हैं। साथ ही पैसा लगाने की वजह से आपस में लड़ाई झगड़ा भी करते हैं। कई लोग जुआ खेलकर दान कर देते है। जबकि हराम का पैसा जकात खैरात में भी देना मना है। लिहाज़ा जरा से लालच में अपनी दुनिया और आख़िरत बर्बाद मत करे और अल्लाह के वास्ते आज से ही सट्टेबाजी के दलदल से बाहर आ जाए।





