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क्या है इंपोस्टर सिंड्रोम? विराट कोहली है शिकार, डॉक्टर से जानें इस बीमारी की छोटी से बड़ी डिटेल्स

नई दिल्ली: क्रिकेटर विराट कोहली ने अपने करियर को लेकर इमोशनल खुलासा किया है. कहोली ना कहना है कि वह लंबे समय तक इंपोस्टर सिंड्रोम की समस्या से जुझते रहे. विराट कोहली ने बताया है कि कप्तानी के दौरान वह मानसिक रूप से थक चुके थे. इस दौरान वह मेंटली ड्रेन हो गए थे. क्रिकेट खेलने का असली आनंद कहीं गायब हो गया था. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि इंपोस्टर सिंड्रोम क्या होता है.

क्या है इंपोस्टर सिंड्रोम? विराट कोहली है शिकार, डॉक्टर से जानें इस बीमारी की छोटी से बड़ी डिटेल्स
क्या है इंपोस्टर सिंड्रोम? विराट कोहली है शिकार, डॉक्टर से जानें इस बीमारी की छोटी से बड़ी डिटेल्स

इंपोस्टर सिंड्रोम क्या है?
फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर विनीत बंगा के अनुसार इंपोस्टर सिंड्रोम एक मेंटल कंडीशनल है जिसमें लोग सफल होने के बाद भी खुद को फ्रॉड महसूस करते हैं. डॉक्टर के अनुसार यह कोई बीमारी नहीं बल्कि एक मेंटल कंडीशन है जिसमें इंसान को लगता है कि सफलता केवल एक तुक्का है. इस स्थिति में मरीज सेल्फ डाउट करता है. इंसान का दिमाग उसे धोखेबाज महसूस कराता है. इस कंडीशन में लोग खुद को कम आंकते हैं. विराट कोहली ही नहीं अल्बर्ट आइंस्टीन और टॉम हैंक्स जैसे महान लोग भी इस कंडीशन से गुजर चुके हैं.

इंपोस्टर सिंड्रोम के लक्षण
बढ़िया काम करना लेकिन उसका क्रेडिट ना लेना
फेल होने का डर रहना
दूसरों से तुलना करना
हर समय ज्यादा मेहनत करना
कॉन्फिडेंस की कमी
खुद के लिए निगेटिव इवैल्युएशन
ज्यादा काम करके खुद को बर्नआउट करना
कामयाबी आने के बाद भी उसे नकार देना

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डिसऑर्डर नहीं है ये इंपोस्टर सिंड्रोम
एक्सपर्ट के अनुसार इंपोस्टर सिंड्रोम एक क्लीनिकल डिसऑर्डर नहीं बल्कि एक फिनोमिना है. स्ट्रिक माहौल बच्चों की इस मानसिक स्थिति का कारण बन सकता है. लेकिन ये सिंड्रोम स्टूडेंट और प्रोफेशन लोग इस सिंड्रोम से ज्यादा पीड़ित होते हैं.

क्या ठीक हो सकता है ये सिंड्रोम
इस सिंड्रोम को बाहर से बाहर आने के लिए सेल्फ-टॉक बेहद जरूरी है. आप खुद से बात करके गलत और सही पहचान सकते हैं. इसके अलावा आप थेरेपी का सहारा ले सकते हैं. हर काम में इंसान परफेक्ट नहीं होता है. गलतियों से इंसान सीखता है ना की गलतियां नाकामी का सबूत है.

तुलना करने की आदत बदल लें. सोशल मीडिया या ऑफिस से दूसरों तुलना करना इंपोस्टर सिंड्रोम को बढ़ाता है. अपनी मेहनत को क्रेडिट दें. सफलता किस्मत से नहीं बल्कि मेहनत का फल होता है.

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