इंडियन प्रीमियर लीग 2026 (IPL 2026) में पंजाब किंग्स के प्रदर्शन में गिरावट काफी चौंकाने वाला रहा है। शुरुआती 7 मैचों में एक भी हार न झेलने वाली श्रेयस अय्यर की अगुआई वाली टीम लगातार 6 मैच हारकर प्लेऑफ की रेस से बाहर होने की कगार पर है। पंजाब किंग्स के साथ ऐसा क्या हुआ कि 7 मैच में ही 13 अंक जुटाने के बाद वह प्लेऑफ की रेस में पिछड़ गई? इस सवाल का जवाब है दो घरेलू मैदान। पंजाब किग्स अपने घरेलू मैच न्यू चंडीगढ़ और धर्मशाला में खेलती है और यही उसके लिए दिक्कत की बात है।

न्यू चंडीगढ़ में का प्रदर्शन अच्छा है, लेकिन धर्मशाला में ऐसा नहीं है। आईपीएल 2026 में वह न्यू चंडीगढ़ में सिर्फ एक मैच हारी तो धर्मशाला में तीनों मैच हार गई। 2023 में टीम ने धर्मशाला में फिर से खेलना शुरू किया था। तब से यहां 8 में से 7 मैच हारी है। यही वजह है कि वह प्लेऑफ की रेस में पिछड़ गई। आईपीएल के प्लेऑफ में पहुंचने और टॉप-2 में रहने के लिए किसी भी टीम को 8 से 9 मैच जीतना जरूरी है। 10 टीमों के खिलाफ 14 मैचों में ऐसा करना काफी मुश्किल है। यही कारण है कि ऑक्शन में कोई भी टीम अपने घरेलू मैदान को केंद्र में रखकर स्क्वाड बनाने की कोशिश करती है, क्योंकि उसकी सोच अपने घरेलू मैदान को अभेद किला बनाने की होती है। उसकी सोच होती है कि वह घर पर 7 में से 5-6 जीत दर्ज करे।
चेन्नई सुपर किंग्स और गुजरात टाइटंस हैं उदाहरण
पांच बार की चैंपियन टीम चेन्नई सुपर किंग्स जब अपने उरूज पर थी तब उसने चेपक को अपना गढ़ बना लिया था। इसका एक और उदाहरण गुजरात टाइटंस है, जिसने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को गढ़ बना लिया है। गुजरात टाइटंस डेब्यू के बाद से सबसे निरंतर टीम रही है। वजह है अहमदाबाद में घरेलू मैदान। भारत में आईपीएल होने पर 2014 में कोलकाता नाइट राइडर्स और 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स के अलावा कोई भी टीम दो घरेलू मैदान पर खेलकर खिताब नहीं जीती है। दोनों मौकों पर टीमों को अपने नियंत्रण से बाहर के कारणों से अपना दो घरेलू मैदान चुनना पड़ा।
दो घरेलू मैदान को केंद्र में रखकर कैसे बनेगा स्क्वाड
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आईपीएल में सफलता में घरेलू परिस्थितियां कितनी अहम भूमिका निभाती हैं और पंजाब किंग्स कहां मात खा रही है। दो घरेलू मैदान होने के कारण पंजाब किंग्स को नुकसान हो रहा है क्योंकि दोनों वेन्यू एक दूसरे से काफी अलग हैं। न्यू चंडीगढ़ में बड़ी आउटफील्ड है। फील्डर्स के फैलने के बाद रन बनना धीरे-धीरे मुश्किल होता जाता है। वहीं धर्मशाला का मैदान छोटा है। कई बार यहां टॉस की भूमिका अहम होती है। दो विपरित परिस्थितियों वाले मैदान को केंद्र में रखकर स्क्वाड बनाना काफी मुश्किल है।
धर्मशाला में चहल का इस्तेमाल करना मुश्किल
आईपीएल 2026 में धर्मशाला में पहले दो मैचों की बात करें तो नतीजा तय करने में टॉस और पिच ने बड़ी भूमिका निभाई। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मैच में ऐसी पिच का इस्तेमाल हुआ जहां गेंद तेजी से आ रही थी। पहली बार ऐसी परिस्थिति का सामना करने के बाद भी पंजाब किंग्स ने 200 का आंकड़ा पार किया। हालांकि, पिच की प्रकृति और ज्यादा ओस के कारण पंजाब ने फ्रंटलाइन स्पिनर युजवेंद्र चहल का इस्तेमाल ही नहीं किया।
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मुंबई इंडियंस के खिलाफ ओस ने पलटा मैच
मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में पिच अलग थी। धीमी पिच पर मुंबई इंडियंस के पेसरों ने क्रॉस-सीम डिलीवरी का इस्तेमाल किया, बैक-ऑफ-ए-लेंथ एरिया को टारगेट किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी पंजाब काफी दिक्कत में दिखी। धीमी पिच चहल के काम आई। उन्होंने रोहित शर्मा को आउट किया और अपने पहले तीन ओवर में सिर्फ 12 रन दिए, लेकिन आखिरी 10 ओवर में ओस ने मैच को फिर से पलट दिया। गेंद बल्ले पर बेहतर आ रही थी।
आखिरी पांच ओवर में लगभग 80 रन
मुंबई इंडियंस ने आखिरी पांच ओवर में लगभग 80 रन बनाकर 201 रन के लक्ष्य को हासिल कर लिया। चहल ने अपने आखिरी ओवर में 22 रन दिए। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ पंजाब किंग्स को दूसरी पारी में बल्लेबाजी करनी तो मैच दिन में था। ओस की कोई भूमिका ही नहीं थी। भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड जैसे गेंदबाजों के सामने पंजाब किंग्स के बल्लेबाज नतमस्तक दिखे।
IPL में इन कोचों पर लग चुका है जुर्माना
गुजरात टाइटंस के कोच आशीष नेहरा और दिल्ली कैपिटल्स के गेंदबाजी कोच मुनाफ पटेल पर आईपीएल 2025 में मैच अधिकारियों से बहस करने के कारण जुर्माना लगा था। मुंबई इंडियंस के बल्लेबाजी कोच कीरोन पोलार्ड ने सूर्यकुमार यादव को वाइड के लिए रिव्यू लेने का इशारा किया था। प्रवीण आमरे मैच के दौरान मैदान पर अंपयारों से बहस करने पहुंच गए थे। ।





