खाने पीने के सामान की कीमतों में इजाफा होने से अप्रैल के महीने में रिटेल महंगाई में मामूली ही सही लेकिन बढ़ोतरी देखने को मिली है. अप्रैल के महीने में रिटेल महंगाई में 0.08 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है. खास बात तो ये है कि अक्टूबर के बाद से महंगाई में लगातार इजाफा देखने को मिल चुका है. महंगाई में ये लगातार 6वें महीने बढ़ोतरी देखने को मिली है. वैसे महंगाई के आंकड़े अभी भी आरबीआई के टॉलरेंस लेवल 4 फीसदी से नीचे बने हुए हैं. जानकारों की मानें अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबे समय तक बना रहता है तो आने वाले दिनों में महंगाई में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर देश में रिटेल महंगाई किस दर से बढ़ती हुई दिखाई दे रही है.

अप्रैल में महंगाई में कितना हुआ इजाफा
सरकारी आंकड़ों को देखें तो अप्रैल के महीने में देश में रिटेल महंगाई 3.48 फीसदी पर आ गई है. जबकि मार्च के महीने में ये आंकड़ा 3.40 फीसदी पर थी. वैसे अक्टूबर 2025 के महीने में देश मं रिटेल महंगाई 0.25 फीसदी पर आ गई थी. उसके बाद से इसमें लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है. नवंबर के महीने में ये आंकड़ा 0.71 फीसदी पर आया. दिसंबर के महीने में 1.33 फीसदी पर देखने को मिला. जनवरी के महीने में रिटेल महंगाई 2.74 फीसदी पर देखी गई. जबकि फरवरी में रिटेल महंगाई का आंकड़ा 3.21 फीसदी पर आ गया. इसका मतलब है कि लगातार तीन महीनों से रिटेल महंगाई का आंकड़ा 3 फीसदी से ज्यादा देखने को मिला है.
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फूड इंफ्लेशन में तेजी
रिटेल इंफ्लेशन में इजाफे का प्रमुख कारण फूड इंफ्लेशन को माना जा रहा है. जिसमें अच्छी तेजी देखने को मिली है. अप्रैल, 2025 की तुलना में अप्रैल, 2026 के महीने के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) पर आधारित साल-दर-साल महंगाई दर 4.20 फीसदी (अनंतिम) है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए संबंधित महंगाई दरें क्रमशः 4.26 फीसदी और 4.10 फीसदी हैं. इसका मतलब है कि शहरों के मुकाबले में गांवों में फूड इंफ्लेशन ज्यादा बढ़ा है. खास बात तो ये है कि मार्च के महीने में खाद्य महंगाई 3.87 फीसदी पर देखने को मिली थी.





