Gold Reserve: मिडिल ईस्ट संकट के बीच पीएम मोदी ने लोगों से आग्रह किया है कि अगले एक साल तक सीने की खरीद से बचें. तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि सरकार खुद अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोना खरीद रही है.
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मिडिल ईस्ट संकट के बीच पीएम मोदी ने लोगों से आग्रह किया है कि अगले एक साल तक सीने की खरीद से बचें. तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि सरकार खुद अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोना खरीद रही है. पिछले छह महीनों में आरबीआई का गोल्ड रिजर्व 104.2 टन बढ़ा है. मोटेतौर पर तीन सालों के भीतर आरबीआई ने 280 टन सोना जुटाया है. इस वक्त भारत के पास 880 टन गोल्ड रिजर्व है.
भारत ही नहीं दुनिया के देशों के सेंट्रल बैंक भी इसी अवधि में ही अधिकाधिक सोना जमा कर रहे हैं. पड़ोसी चीन समेत यूरोपीय देश, ब्राजील, पोलैंड जैसे देश भी गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं. जुलाई 2025-जनवरी 2026 के बीच बैंक ऑफ फ्रांस ने न्यूयॉर्क स्थित फेडरल रिजर्व में सुरक्षित रखा अपना बकाया 129 टन सोना वापस ले लिया है. इस कदम के साथ ही फ्रांस का कुल करीब 2,437 टन सोना अब पेरिस के सेंट्रल बैंक के पास पहुंच गया है. फ्रांस के इस कदम का मकसद अपने सोने को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में रखने से है.
देश क्यों कर रहे ऐसा?
दरअसल तीन-चार साल पहले जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था तो अमेरिका ने लगाम लगाने के मकसद से रूस के 300 अरब डॉलर विदेशी रिजर्व के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. यूरोपीय देशों में जमा इस राशि को फ्रीज कर दिया गया. इसका असर ये हुआ कि देशों का डॉलर पर भरोसा कम हो गया और सोने की खरीदने की इच्छा बढ़ी. साथ ही जो सोना देशों ने बाहर के मुल्कों के चेस्ट में सुरक्षा के लिहाज से रखा था, उसको भी अपने मुल्क में ही रखने की इच्छा बलवती हुई ताकि संकट में कम से कम सोने को बेचकर अपना काम चलाया जा सके.
पहले भारत भी अपना सोना बाहर के मुल्कों में रखता था लेकिन अब उसने भी घर में ही रखना शुरू कर दिया है. 2023 में आरबीआई का 38 प्रतिशत सोना ही देश में था लेकिन अब ये आंकड़ा बढ़कर 77 फीसद तक पहुंच गया है. इसके पीछे का मूलभाव ये है कि वैश्विक अस्थिरता, युद्ध जैसे संकट के समय में गोल्ड रिजर्व होने से सुरक्षा सुनिश्चित होती है. अपना सोना अपने ही देश में होने से दूसरे पर निर्भरता भी नहीं होती.





