Panchayat Actor: अक्सर कहा जाता है कि देश में जातिगत भेदभाव नहीं है. लेकिन सच्चाई अब भी कुछ और ही है, जो इसका सामना करता है, वो ही हकीकत बयां कर सकता है. कोई फर्क नहीं पड़ता आपने अपने शानदार काम से कितना नाम कमाया है, पर कुछ लोग जाति-धर्म से दूसरे को देखते हैं. पॉपुलर वेब सीरीज ‘पंचायत के सीजन 4’ में धमाल मचा चुके एक्टर ने बचपन में हुए जातिगत भेदभाव का खुलासा किया है. एक्टर ने बताया कि कैसे गांव में दलितों को अलग रखा जाता है. यहां तक कि उन्हें मंदिर में जाने की भी इजाजत नहीं होती. अपने जीवन के संघर्षों के बारे में बताते हुए एक्टर ने बचपन का किस्सा भी बताया.

यह कहानी है विनोद सूर्यवंशी की. जी हां, पहले भी आपने कई फिल्मों और वेब सीरीज में यह नाम सुना होगा. एक्टर ने वेब सीरीज में सचिव का रोल किया था. उनकी फिल्मों की लिस्ट में ‘थामा’, ‘सत्यमेव जयते’ और ‘जॉली एलएलबी 3’ समेत कुछ और फिल्में भी शामिल हैं. लेकिन अब एक्टर ने जातिवाद को लेकर दिल कचोटने वाली बात कही है. जिसका वो खुद ही शिकार भी हुए हैं.
पंचायत एक्टर का बड़ा खुलासा
‘पंचायत’ एक्टर विनोद सूर्यवंशी ने बताया कि उनके पैतृक गांव में आज भी जातिवाद मौजूद है. इस दौरान उन्होंने वहां बड़े होते समय अपने सामने आई कुछ कठोर सच्चाइयों का भी जिक्र किया. वो कहते हैं- “कर्नाटक में मेरे गांव में, जातिवाद आज भी मौजूद है. उस गांव में दो हिस्से हैं, एक ऊंची जातियों के लिए और दूसरा नीची जातियों के लिए. जिस हिस्से में दलित रहते हैं, वो गांव से एकदम अलग है.”
जब पिता का हुआ अपमान, धोने पड़े बर्तन
एक्टर ने यह भी बताया कि जब वो अपने पिता के साथ गांव गए थे, तब महज 12 साल के थे. आगे कहते हैं- ”हमने एक होटल में खाना खाया, तो हमें अपनी प्लेटें खुद ही धोनी पड़ीं और खाने के पैसे भी देने पड़े. मेरे गांव में आज भी एक ऐसा मंदिर है, जहां हमें अंदर जाने की इजाजत नहीं है.” साथ ही विनोद ने बहुत ज्यादा गरीबी में बड़े होने के बारे में भी बात की. वो बताते हैं कि- ”जहां ज्यादातर लोग त्योहार आने पर खुश होते हैं, वहीं वो और उनका परिवार रोते थे, क्योंकि वो त्योहारों को वैसे नहीं मना पाते थे.
“मैंने अक्सर अपने माता-पिता को रोते देखा. जब त्योहार आते थे, तो मैं सोचता था कि ये आ ही क्यों रहे हैं. दिवाली क्यों आ रही है. त्योहार हमें और ज़्यादा रुलाते थे, क्योंकि हम उन्हें कभी दूसरों की तरह नहीं मना पाते थे. हमारी हालत बहुत खराब थी. अगर कोई हमें कुछ देता था, तभी हम त्योहार मना पाते थे. यही हमारी असलियत थी”
एक्टिंग से पहले चौकीदारी की
पंचायत एक्टर ने बताया कि एक्टर के तौर पर संघर्ष करते हुए उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए. चौकीदारी करते थे, जिसके चलते उनके पैरों में छाले पड़ गए थे. जिसने उन्हें समझाने में मदद की और बताया कि समाज किसी भी इंसान को उसके काम से जज करता है. वो कहते हैं- ”काम जितना बड़ा होगा, इज्जत उतनी ही ज्यादा मिलेगी”.





