आईबीएस यानी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम एक फंक्शनल गट डिसऑर्डर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम बड़ी आंत को प्रभावित करता है। आज वर्ल्ड आईबीएस डे है इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम क्यों होता है यानी किस-किस वजह से आईबीएस का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा आज हम आपको इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के कुछ लक्षणों के बारे में भी बताएंगे।

आईबीएस क्यों होता है- हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लिए कई फैक्टर्स जिम्मेदार हो सकते हैं। मानसिक तनाव यानी मेंटल स्ट्रेस की वजह से आईबीएस हो सकता है। तनाव को कम करने के लिए आप योग-मेडिटेशन की मदद ले सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खान-पान में बदलाव भी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का कारण बन सकता है। आंत में संक्रमण होने पर आईबीएस हो सकता है।
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण- आइए जानते हैं कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के दौरान आपको किस तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं। पेट दर्द या फिर ऐंठन महसूस होने पर आपको सावधान हो जाना चाहिए। गैस और पेट फूलना, इस तरह के लक्षण भी आईबीएस की तरफ इशारा कर सकते हैं। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के दौरान दस्त या फिर कब्ज जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अक्सर खाने के बाद पेट में असहजता महसूस होने पर भी आपको अलर्ट हो जाना चाहिए।
डॉक्टर से कब कंसल्ट करना चाहिए- अगर आपको एक साथ इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के सभी लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो समय रहते आपको डॉक्टर से अपना चेकअप करवा लेना चाहिए वरना बाद में आपको लेने के देने भी पड़ सकते हैं। अगर आपका वजन कम हो रहा हो, मल में खून आ रहा हो या फिर बुखार हो रहा हो, तो आपको डॉक्टर से कंसल्ट करने में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए वरना बाद में आपको पछताना पड़ सकता है।





