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OMG! मरने से पहले इंसान के कानों में गूंजते हैं ये शब्द, मौत से पीछा छुड़ाकर आए बंदे ने खोली ये सच्चाई

मौत के बेहद करीब जाकर वापस लौटे लोगों के अनुभव हमेशा से जिज्ञासा और हैरानी का विषय रहे हैं. कई लोग बताते हैं कि उन्हें एक सुरंग दिखाई दी, किसी को तेज रोशनी नजर आई, तो कुछ ने अपने Departed Loved Ones से मिलने जैसी फील्लिंग का जिक्र किया, लेकिन हाल ही में हुई एक नई स्टडी ने इस विषय को एक अलग ही दिशा दे दी है, जिसमें यह जानने की कोशिश की गई कि मृत्यु के ठीक पहले या उसके दौरान इंसान क्या सुनता है.

OMG! मरने से पहले इंसान के कानों में गूंजते हैं ये शब्द, मौत से पीछा छुड़ाकर आए बंदे ने खोली ये सच्चाई
OMG! मरने से पहले इंसान के कानों में गूंजते हैं ये शब्द, मौत से पीछा छुड़ाकर आए बंदे ने खोली ये सच्चाई

इस शोध में खासतौर पर उन लोगों को शामिल किया गया, जो कार्डियक अरेस्ट यानी दिल के अचानक बंद हो जाने के बाद भी बच गए. इन मरीजों ने अपने अनुभव शेयर किए, जो बेहद चौंकाने वाले थे. कई लोगों ने बताया कि जब उनका दिल धड़कना बंद हो चुका था, तब भी उन्हें अपने आसपास की आवाजें सुनाई दे रही थीं. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि ज्यादातर लोगों ने लगभग एक जैसी बातें सुनीं. कई मरीजों ने बताया कि उन्होंने डॉक्टरों को कहते हुए सुना कि Time of death, Weve lost him, Hes gone या Declare the time of death जैसे वाक्य. यानी जब डॉक्टर उन्हें मृत घोषित कर रहे थे, उस समय भी वे उन शब्दों को सुन पा रहे थे. इससे यह संकेत मिलता है कि दिल की धड़कन बंद होने के बाद भी कुछ समय तक इंसान की सुनने की क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं होती.

यह निष्कर्ष एक बड़े शोध का हिस्सा है, जिसमें सैकड़ों कार्डियक अरेस्ट मरीजों को शामिल किया गया. इनमें से 40% से अधिक लोगों ने बताया कि उन्हें CPR के दौरान किसी न किसी रूप में Consciousness का एक्सपीरियंस हुआ. कुछ लोगों को सिर्फ धुंधली यादें थीं, जबकि कुछ ने बहुत स्पष्ट रूप से डॉक्टरों की बातचीत, मशीनों की आवाज और आसपास हो रही गतिविधियों को याद किया. कुछ मरीजों के अनुभव और भी ज्यादा रोचक थे. उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने शरीर से अलग होकर ऊपर से सब कुछ देख रहे हों. उन्होंने डॉक्टरों को खुद को बचाने की कोशिश करते हुए देखा और उनकी बातचीत भी सुनी.

दिल रुकने के बाद एक्टिव रहता है दिल

इस तरह के एक्सपीरियंस के करीब होने पर होने वाले अनुभव कहा जाता है. रिसर्चर के मुताबिक, ये अनुभव केवल भ्रम या कल्पना नहीं हो सकते. पहले यह माना जाता था कि दिल बंद होने के कुछ ही मिनटों के भीतर दिमाग काम करना बंद कर देता है और परमेंनेट रूप से डेमेज हो जाता है, लेकिन इस नई स्टडी के परिणाम इस धारणा को चुनौती देते हैं. इसमें पाया गया कि दिल रुकने के बाद भी दिमाग कुछ समय तक एक्टिव रह सकता है.

इस दौरान दिमाग में ऐसी तरंगें देखी गईं, जो सामान्य रूप से सोचने और समझने की प्रक्रिया से जुड़ी होती हैं. इसका मतलब यह हो सकता है कि उस समय दिमाग एक विशेष अवस्था में पहुंच जाता है, जिसे सुपर-फोकस्ड स्टेट कहा जा सकता है. इस स्थिति में व्यक्ति अपने आसपास की आवाजों को और भी स्पष्ट रूप से महसूस कर सकता है. एक मरीज ने बताया कि उसने साफ-साफ सुना कि डॉक्टर उसे मृत घोषित कर रहे थे. वहीं दूसरे ने पूरी टीम की बातचीत याद रखी, जिसमें वे उसकी स्थिति पर चर्चा कर रहे थे. इन अनुभवों से यह संकेत मिलता है कि मौत के करीब पहुंचने पर चेतना पूरी तरह समाप्त नहीं होती, बल्कि एक अलग तरह से सक्रिय हो सकती है.

यह रिसर्च न केवल मेडिकल साइंस के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन और मृत्यु को लेकर हमारी समझ को भी गहराई से प्रभावित करता है. यह सवाल उठाता है कि क्या वास्तव में मौत एकदम से होती है, या यह एक धीमी प्रक्रिया है जिसमें दिमाग कुछ समय तक सक्रिय बना रहता है. हालांकि, इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है. वैज्ञानिक अभी भी यह पूरी तरह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इन अनुभवों के पीछे असली कारण क्या है. लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि मौत के अंतिम क्षणों में इंसान का अनुभव उतना सरल या सीधा नहीं होता, जितना हम पहले समझते थे.

khabarmonkey@gmail.com

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