होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह अहम समुद्री रास्ता कब तक खुल सकता है. दुनिया की तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर है. मौजूदा हालात को चार बड़े संकेतों से समझा जा सकता है

1. US-ईरान फिर शुरू कर सकते हैं बातचीत
हाल ही में इस्लामाबाद में हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी, लेकिन अब फिर से बातचीत की उम्मीद दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों की टीमें इस हफ्ते के अंत तक फिर से इस्लामाबाद लौट सकती हैं. अगर बातचीत आगे बढ़ती है और कोई समझौता बनता है, तो होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का रास्ता भी निकल सकता है.
2. सऊदी ने अमेरिका पर दबाव बनाया
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबित, सऊदी अरब ने अमेरिका से साफ कहा है कि वह नाकेबंदी खत्म करे और ईरान के साथ बातचीत फिर शुरू करे. सऊदी को डर है कि अगर तनाव बढ़ा तो ईरान फिर से हमले कर सकता है. ईरान ने बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्तों पर हमले की धमकी दी है.. इस रास्ते से भी सऊदी का तेल निर्यात होता है. खाड़ी के देश नहीं चाहते कि होर्मुज जैसे अहम रास्ते पर किसी एक देश का कंंट्रोल हो, क्योंकि इससे उनकी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा.
3. फ्रांस और ब्रिटेन की पहल
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस हफ्ते एक वर्चुअल मीटिंग करने जा रहे हैं. शुक्रवार को होने वाली मीटिंग में कई देश शामिल होंगे. इस मीटिंग का मकसद है होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को फिर से सुरक्षित और सामान्य बनाना. अगर इस बैठक से कोई संयुक्त योजना बनती है, तो अंतरराष्ट्रीय दबाव के जरिए रास्ता खुलवाने की कोशिश तेज हो सकती है.
4. चीन की सक्रियता और ईरान का रुख
ईरान ने कुछ चीनी जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है, जिससे यह साफ होता है कि पूरी तरह से रास्ता बंद नहीं किया गया है. वहीं चीन ने शांति के लिए है. इसमें क्षेत्रीय देशों के बीच शांति, संप्रभुता का सम्मान, संयुक्त राष्ट्र आधारित व्यवस्था को मजबूत करना और विकास के साथ सुरक्षा को जोड़ना. अगर इन प्रस्तावों पर सहमति बनती है, तो हालात सामान्य होने की उम्मीद बढ़ सकती है.





