दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल ने हाई कोर्ट में खुद बहस की. उन्होंने कहा कि जितनी तेजी से उनके खिलाफ और विपक्षी पार्टियों के केस में सुनवाई हो रही है, उतनी तेजी दूसरे मामलों में नजर नहीं आती. इस पर जज ने पूछा कि तो आप क्या कहना चाहते हैं कि ‘मैं राजनीतिक रूप से बायस्ड हूं?’

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने फैसला दिया था, जो 500 पेज का था. इस फैसले में कोर्ट ने हर एक आरोप को ध्यान से जांचकर डिटेल में फाइंडिंग्स दिए. लेकिन CBI ने सिर्फ 4 घंटे के अंदर ही इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल कर दी. इतनी जल्दी में इतनी बड़ी जजमेंट को ठीक से पढ़ना और समझना संभव नहीं था. CBI की अपील में ट्रायल कोर्ट की किसी भी खास फाइंडिंग को चुनौती नहीं दी गई. यानी अपील मजबूत ग्राउंड पर नहीं हैं. इसलिए यह अपील डिफेक्टिव है. इसे पहले ही दिन खारिज कर देना चाहिए था. लेकिन इसके बावजूद कोर्ट ने इस डिफेक्टिव पेटीशन पर एक व्यापक आदेश पास कर दिया.
इसके साथ ही केजरीवाल ने जज के अधिवक्ता परिषद की मीटिंग में 4 बार शामिल होने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, “उस संगठन की विचारधारा मेरी विचारधारा के खिलाफ है. आप 4 बार उसमें शामिल हो चुकी हैं। मेरे खिलाफ केस भी राजनीतिक है. इससे मेरे मन में शंका उठती है कि मुझे आपकी कोर्ट से न्याय मिलेगा?”





