Indian Origin Pia Dandiya: के में भारतीय मूल की 39 वर्षीय पिया डांडिया ने शानदार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराकर अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जगह बनाई है। पिया की यह जीत बेहद खास है। क्योंकि नए परिसीमन के बाद इस सीट पर रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को जीत दिलाई।

पिया डांडिया की सफलता की कहानी काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारत की राजधानी दिल्ली की झुग्गीबस्तियों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाने से की थी। इसके बाद वह अमेरिका में शिक्षिका बनीं, महज 28 साल की उम्र में हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनीं और फिर व्हाइट हाउस फेलोशिप के जरिए अमेरिकी सरकार की नीति निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा बनीं। उन्होंने से लेकर दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी ऐपल तक में काम किया है। अब वो फ्लोरिडा की सासंद हैं। आइए जानते हैं कौन हैं पिया डांडिया, उनका भारत से क्या कनेक्शन है?
पिया डांडिया का भारत से क्या है कनेक्शन?
पिया डांडिया पहली पीढ़ी की भारतीयअमेरिकी नागरिक हैं। उनका जन्म और पालनपोषण अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के पाम बीच काउंटी में हुआ। उनके मातापिता भारत से अमेरिका जाकर बस गए थे। पिया ने अपने करियर में शिक्षा, सरकारी नीतियों और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम किया है।
में आने से पहले उनकी पहचान एक शिक्षाविद और नीति विशेषज्ञ के रूप में रही है। वह हमेशा से शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम मानती रही हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में दिल्ली की झुग्गीबस्तियों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाया।
इसके बाद वह अमेरिका लौटकर वहां मिडिल स्कूल और हाई स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करने लगीं। धीरेधीरे उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और जरूरतमंद बच्चों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
कम उम्र में कैसे बनीं प्रिंसिपल?
पिया डांडिया महज 28 साल की उम्र में एक हाई स्कूल की स्थापना की और उसकी संस्थापक की जिम्मेदारी संभाली। इस उपलब्धि के साथ वह अमेरिका की सबसे कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में शामिल हो गईं। इसके साथ ही जिस स्कूल का उन्होंने नेतृत्व किया, वहां करीब 86 फीसदी विद्यार्थी कम आय वाले परिवारों से आते थे। पिया ने ऐसे बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और उन्हें कॉलेज तक पहुंचाने के लिए काम किया।
उनका उद्देश्य था कि आर्थिक तंगी किसी भी बच्चे की पढ़ाई और भविष्य के रास्ते में बाधा न बने। उन्होंने स्कूल में ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करने पर जोर दिया, जहां कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें।
व्हाइट हाउस में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
पिया डांडिया ने की नीति निर्माण प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें प्रतिष्ठित व्हाइट हाउस फेलोशिप प्रोग्राम के लिए चुना गया था।
व्हाइट हाउस फेलोशिप अमेरिका का एक प्रतिष्ठित कार्यक्रम है। इसके तहत अलगअलग क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पेशेवरों को सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ काम करने का मौका मिलता है।
पिया ने व्हाइट हाउस की डोमेस्टिक पॉलिसी काउंसिल और अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया। इस दौरान उन्हें शिक्षा और सरकारी नीतियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करने का अनुभव मिला। खास बात यह है कि उन्होंने डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियों के प्रशासन के दौरान काम किया।
इसके अलावा उन्होंने टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी अपनी जगह बनाई और ऐपल जैसी बड़ी कंपनी में काम किया। इस तरह शिक्षा, प्रशासन और तकनीक के क्षेत्र में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
फ्लोरिडा में कैसे मिली जीत?
पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उनके सामने रिपब्लिकन पार्टी के केसी असकर थे, जो अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के पूर्व सैनिक और कारोबारी हैं। असकर ने राष्ट्रपति और उनकी नीतियों के समर्थन में प्रचार किया था। इस कड़े मुकाबले में पिया ने 51.9 फीसदी वोट हासिल किए, जबकि केसी असकर को 48.1 फीसदी वोट मिले। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पिया को कुल 1,51,926 वोट मिले, जबकि असकर के खाते में 1,40,933 वोट आए।
इस तरह पिया ने करीब 10,993 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और फ्लोरिडा के 22वें डिस्ट्रिक्ट में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति बरकरार रखी।