पैनिक अटैक में बिना किसी खतरे के भी शरीर में ऐसे रिएक्शन होते हैं जैसे आप किसी बुरी स्थिति में फंसे हो. ऐसे में शरीर खतरे से बचने के लिए एक्टिव हो जाता है. इस कारण अचानक से घबराहट होने लगती है. ये लक्षण बस कुछ ही देर तक रहते हैं. दिमाग में जब रोटोनिन , नॉरपेनेफ्रिन और जीएबीए जैसे रसायनों का इंबैलेंस हो जाए तो पैनिक अटैक के लक्षण दिख सकते हैं. कारणों कीबात करें तो बहुत गंभीर स्ट्रेस होने और या किसी ट्रॉमा की वजह से भी पैनिक अटैक हो सकता है.

जिंदगी में अचनाक बहुत बड़ा बदलाव आना, बहुत ज्यादा कैफीन का सेवन, बचपन के बुरे अनुभव, के साथ ही अनुवांशिकता की वजह से भी पैनिक अटैक ट्रिगर हो सकता है. चलिए जान लेते हैं कि ऐसी सिचुएशन में क्या करना चाहिए और आप इसे कैसे पहचान सकते हैं.
पैनिक अटैक के लक्षण
कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसल्टेंट साइकाइट्रिस डॉक्टर मेघा अग्रवाल ने पैनिक अटैक के लक्षण बताए हैं. वह कहती हैं कि जब कोई पेशेंट पैनिक अटैक की कंप्लेन करता है, तो सबसे पहली चीज होती है उसमें सांस की परेशानी होना. उसे या तो सांस नहीं आती है या सांस बहुत तेज आती है. घबराहट महसूस होने लगती है. पसीना आता हैं और हाथ पैर में कंपन हो सकता है. इसी के छाती में दबाव महसूस होता है. इतनी तेज घबराहट होती है कि कुछ मरीजों को ऐसा भी लगता है जैसे जान निकलने वाली है. ये लक्षण 10 से 15 मिनट तक रह सकते हैं.
क्या इलाज कराना जरूरी है?
एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ पेशेंट्स में ये सिम्टम्स अपने आप सेटल हो जाते हैं. हालांकि लक्षण दिखने पर एक बार डॉक्टर के पास जरूर विजिट करना चाहिए ताकि वो पता लगा सकें कि कहीं ये कोई और प्रॉब्लम तो नहीं है. पैनिक अटैक की स्थिति में कुछ पेशेंट्स को दवाइयों की जरूरत पड़ती है. अगर कोई भी पेशेंट पैनिक अटैक के ट्रीटमेंट के लिए आता है तो उसका एक कार्डियक असेसमेंट कराना जरूरी होता है ताकि अगर कोई हार्ट इश्यूज हो तो हम उसका पता लगा सकें.
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उसके बाद में पेशेंट की काउंसलिंग होती है और दवाइयों से ट्रीटमेंट जारी रखा जाता है. इन पेशेंट्स को एंटीडिप्रेसेंट्स, एंटी एंजाइटी मेडिकेशन देते हैं और साथसाथ में काउंसलिंग लाइफस्टाइल में बदलाव जैसी चीजें समझाई जाती हैं. ये सबसे ध्यान देने वाली बात है कि हर पेशेंट को सिचुएशन के हिसाब से डील किया जाता है.
पैनिक अटैक होने पर क्या करें?
- अगर पैनिक अटैक के लक्षण दिखाई दें तो आप नाक से धीरेधीरे गहरी सांस लेने की कोशिश करें.
- पेशेंट के साथ उस दौरान कोई न कोई जरूर रहे, आराम से बिठाएं और शांति बनाए रखें.
- पैनिक अटैक होने पर ठंडे पानी से चेहरे और गर्दन पर छींटे मारें या फिर फेस पर गीला कपड़ा रखें.
- पैनिक अटैक आने पर आसपास भीड़ बिल्कुल भी न लगाएं. पेशेंट को शोरशराबे वाली जगह पर न रखें.
- खुद पैनिक अटैक की स्थिति में हो तो याद रखें, ये कुछ ही मिनटों में बीतने वाला है और जानलेवा नहीं है.
क्या ये खतरनाक है?
के मुताबिक, पैनिक अटैक वैसे तो जानलेवा नहीं होता है. समय के साथ लक्षण भी सही हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में आने वाले पैनिक अटैक की चिंता की वजह से एंग्जायटी हो सकती है. पैनिक अटैक के कारण आपकी क्वालिटी लाइफ कम हो सकती है, क्योंकि लगातार इस स्थिति में बने रहने की वजह से कई और हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं.