उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव के वोटों की गिनती जारी है. इस बीच वाराणसी की शिक्षक निर्वाचन सीट से समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने बड़ी जीत दर्ज की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा है. लाल बिहारी यादव ने प्रथम वरीयता के वोटों की गिनती में 10,958 वोट हासिल किए. जबकि बीजेपी प्रत्याशी प्रमोद कुमार मिश्रा 6,060 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे. जबकि बीजेपी के बागी प्रत्याशी चेत नारायण सिंह को 3111 वोट मिले. ये 3111 वोट बीजेपी के लिए बड़ा सेट बैक साबित हुआ.

सपा को मिली 5 गुना बड़ी जीत
दूसरी वरीयता की गिनती में लाल बिहारी यादव को विजेता घोषित किया गया. समाजवादी प्रत्याशी लाल बिहारी यादव की ये जीत पिछली बार की तुलना में कहीं ज़्यादा बड़ी है. पिछली बार वो 936 वोटों से चुनाव जीते थे. जबकि इस बार की जीत करीब 4900 वोटों से हुई है. इस लिहाज से पिछली बार की तुलना में इस बार पांच गुणा ज़्यादा बड़ी जीत सपा को हासिल हुई है.
बीजेपी के बागी ने बिगाड़ा खेल
इस चुनाव में बीजेपी के बागी प्रत्याशी चेत नारायण सिंह को मिले 3,111 वोट बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सेटबैक साबित हुए. इन वोटों के बिखराव के कारण बीजेपी मुख्य मुकाबले से काफी पीछे छूट गई.
प्रथम वरीयता के फर्स्ट राउंड में सपा प्रत्याशी लाल बिहारी को 6941, जबकि सेकेंड राउंड में 4017 वोट मिले. बीजेपी प्रत्याशी प्रमोद मिश्रा को प्रथम वरीयता के फर्स्ट राउंड में 3005, जबकि सेकेंड राउंड में 3055 वोट मिले. बीजेपी के बागी प्रत्याशी चेत नारायण सिंह को प्रथम वरीयता के फर्स्ट राउंड में 1696, जबकि सेकेंड राउंड में 1415 वोट मिले.
वोटों का पूरा गणित
प्रथम वरीयता की गणना के बाद सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव को 10,958 वोट, बीजेपी प्रत्याशी प्रमोद मिश्र को 6060 वोट, जबकि बीजेपी के बागी प्रत्याशी चेत नारायण सिंह को 3111 वोट मिले. जीत के लिए जरूरी 11472 वोट से लाल बिहारी पीछे जरूर रह गए थे. लेकिन प्रथम वरीयता की काउंटिंग ने ये तय कर दिया कि द्वितीय वरीयता की काउंटिंग महज औपचारिकता रह गई है.
ये जीत हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष की
चुनाव जीतने के बाद सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने टीवी9 से एक्सक्लुसिव बातचीत में ये कहा कि ये हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी की जीत है. उनकी प्रेरणा से ही सपा के सभी नेता और कार्यकर्ता लगे रहे और ये नतीजा आया. सरकार और प्रशासन के लोग मुझे हराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिए थे. लेकिन शिक्षक पूरी ताकत से सपा का दामन थामे रहे और ये नतीजा आया.
विधानसभा चुनाव के लिहाज से बेहद शुभ संकेत
ये 2027 के लिहाज से शुभ संकेत है कि शिक्षक सपा के साथ खड़े हैं. इस रिजल्ट ने ये साबित कर दिया कि यूपी का बौद्धिक वर्ग इस सरकार से नाखुश है और बदलाव चाहता है.