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Israel Election: इजराइल में संविधान नहीं, फिर संसद किस कानून से चलती है?​

आम चुनाव को लेकर इजराइल चर्चा में है. वर्षों बाद वहां की संसद ने अपना कार्यकाल पूरा किया है. इजराइल के लोग 27 अक्तूबर को मतदान करेंगे और परिणामों की घोषणा 7 नवंबर तक होगी. देखना रोचक होगा कि वर्तमान साझा सरकार का नेतृत्व कर रहे नेतन्याहू पर देश फिर से भरोसा जताएगा या कोई […]

आम चुनाव को लेकर इजराइल चर्चा में है. वर्षों बाद वहां की संसद ने अपना कार्यकाल पूरा किया है. इजराइल के लोग 27 अक्तूबर को मतदान करेंगे और परिणामों की घोषणा 7 नवंबर तक होगी. देखना रोचक होगा कि वर्तमान साझा सरकार का नेतृत्व कर रहे नेतन्याहू पर देश फिर से भरोसा जताएगा या कोई नया नेता देश का नेतृत्व करेगा? यहां भरोसे का मतलब यह है कि नेतन्याहू पीएम के साथ अपनी पार्टी के नेता हैं और गठबंधन के भी नेता हैं. तभी वे पीएम हैं. भारत की तरह इजराइल में भी देश की जनता पीएम नहीं चुनती. वह संसद सदस्यों का चुनाव करती है. आइए, इन आम चुनावों के बहाने जानते हैं कि बिना संविधान इजराइल की संसद कैसे चलती है? किन नियमों के तहत वाहन की व्यवस्था का संचालन होता है?

इजराइल के बारे में अक्सर कहा जाता है कि वहां संविधान नहीं है. यह बात पूरी तरह सही नहीं है. इजराइल के पास भारत या अमेरिका की तरह एक ही दस्तावेज में लिखा हुआ, संहिताबद्ध संविधान नहीं है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वहां शासन बिना नियमों के चलता है. देश की व्यवस्था कई कानूनों, संस्थागत नियमों, अदालतों के फैसलों और राजनीतिक परंपराओं पर आधारित है. इस ढांचे का सबसे अहम हिस्सा है बेसिक लॉ यानी मूल कानून. इन कानूनों को इजराइल के संसद भवन और संसद, दोनों के लिए इस्तेमाल होने वाले नाम नेसेट ने अलगअलग समय पर पारित किया है. ये कानून मिलकर देश की शासनव्यवस्था के संवैधानिक नियम तय करते हैं.

संविधान बनाने का वादा और उसका टलना

इजराइल की स्वतंत्रता की घोषणा 1948 में हुई. देश बनने के बाद संविधान बनाने का विचार सामने आया. लेकिन संविधान के स्वरूप और उसमें धर्म की भूमिका को लेकर मतभेद थे. अलगअलग राजनीतिक और धार्मिक समूहों की राय एक जैसी नहीं थी. इस बहस के बीच 1949 में चुनी गई पहली नेसेट ने संविधान को एक ही बार में तैयार करने के बजाय अलग रास्ता अपनाया.

‘नेसेट’ शब्द प्राचीन ‘नेसेट हगदोला’ यानी ‘ग्रेट असेंबली’ से निकला है. फोटो: Getty Images

1950 में नेसेट ने एक प्रस्ताव स्वीकार किया, जिसे आम तौर पर हरारी प्रस्ताव कहा जाता है. इसके अनुसार संविधान को एक साथ लिखने के बजाय अलगअलग अध्यायों में बनाया जाना था. हर अध्याय एक बेसिक लॉ के रूप में पारित होना था. बाद में इन अध्यायों को जोड़कर संविधान बनाया जा सकता था. यह प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन सभी अध्यायों को एक दस्तावेज में जोड़कर औपचारिक संविधान नहीं बनाया गया. इसलिए आज इजराइल के पास एकल, संहिताबद्ध संविधान नहीं है. इसकी जगह बेसिक लॉ का समूह संवैधानिक भूमिका निभाता है.

बेसिक लॉ क्या होते हैं?

बेसिक लॉ सामान्य कानूनों से अलग महत्व रखते हैं. ये बताते हैं कि राज्य की प्रमुख संस्थाएं कैसे काम करेंगी, उनके अधिकार क्या होंगे और नागरिकों के कुछ बुनियादी अधिकारों की रक्षा कैसे होगी. कुछ बेसिक लॉ सरकार, नेसेट, न्यायपालिका, राष्ट्रपति और सेना जैसी संस्थाओं से जुड़े हैं. दूसरे कानून नागरिकों के अधिकारों से संबंधित हैं. उदाहरण के लिए, मानव गरिमा और स्वतंत्रता से जुड़ा बेसिक लॉ व्यक्ति की गरिमा और स्वतंत्रता की सुरक्षा का आधार देता है. व्यवसाय की स्वतंत्रता से जुड़ा बेसिक लॉ आर्थिक गतिविधियों की स्वतंत्रता पर बात करता है. इन कानूनों को संसद ने अलगअलग समय पर पारित किया है. इसलिए वे एक ही तारीख पर तैयार हुए संविधान के अध्याय नहीं हैं. वे धीरेधीरे बने संवैधानिक ढांचे के हिस्से हैं.

नेसेट के कामकाज के नियम कहां से आते हैं?

नेसेट इजराइल की एकसदनीय संसद है. यानी वहां भारत की तरह संसद के दो सदन नहीं हैं. नेसेट कानून बनाती है, सरकार की निगरानी करती है और संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार बहस तथा मतदान करती है. संसद का काम केवल बेसिक लॉ से नहीं चलता. नेसेट अपने कामकाज के लिए सामान्य कानून और प्रक्रियासंबंधी नियम भी अपनाती है.

इजराइल में संसदीय व्यवस्था है और मतदाता नेसेट के सदस्यों को चुनते हैं. फोटो: Getty Images

इन नियमों में यह तय होता है कि विधेयक कैसे पेश होंगे, उन पर चर्चा कैसे होगी, समितियां किस तरह काम करेंगी और मतदान किस प्रक्रिया से होगा. साधारण कानून रोजमर्रा के शासन के कई विषयों को नियंत्रित करते हैं. ऐसे कानूनों को नेसेट में तय प्रक्रिया के अनुसार पारित किया जाता है. बजट, शिक्षा, कर, प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं जैसे मामलों के लिए अलगअलग कानून हैं. इस तरह बेसिक लॉ शासन की मूल रूपरेखा देते हैं, जबकि साधारण कानून उस रूपरेखा के भीतर विस्तृत नियम बनाते हैं.

सरकार कैसे बनती है और संसद की भूमिका क्या है?

इजराइल में संसदीय व्यवस्था है. मतदाता नेसेट के सदस्यों को चुनते हैं. चुनाव के बाद सरकार को नेसेट में समर्थन जुटाना होता है. अक्सर किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, इसलिए कई दल मिलकर गठबंधन सरकार बनाते हैं. सरकार को संसद के सामने जवाब देना पड़ता है. नेसेट के सदस्य सरकार के काम पर सवाल उठा सकते हैं, चर्चा कर सकते हैं और समितियों के जरिए अलगअलग विभागों की निगरानी कर सकते हैं. अगर सरकार का समर्थन कमजोर पड़ता है, तो राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है. कुछ परिस्थितियों में नेसेट समय से पहले भंग हो सकती है और नए चुनाव हो सकते हैं. ये व्यवस्थाएं किसी एक संविधानपुस्तक के बजाय बेसिक लॉ, चुनाव और संसद से जुड़े कानूनों तथा संसदीय नियमों के मेल से चलती हैं.

कैसी है यहां अदालतों की भूमिका?

इजराइल की अदालतें भी इस संवैधानिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. अदालतें कानूनों की व्याख्या करती हैं और विवादों में तय करती हैं कि सरकारी कदम कानून के अनुरूप हैं या नहीं. बेसिक लॉ के महत्व पर अदालतों के फैसलों ने भी असर डाला है. 1990 के दशक में इजराइल के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि नेसेट को बेसिक लॉ बनाने और कानून पारित करने का अधिकार है. इस फैसले को अक्सर इस चर्चा से जोड़ा जाता है कि अदालतें सामान्य कानूनों की समीक्षा कर सकती हैं या नहीं, खासकर जब कोई कानून बेसिक लॉ में सुरक्षित अधिकारों से टकराता हो. इसी कारण न्यायपालिका और संसद के अधिकारों का संतुलन इजराइल में लंबे समय से सार्वजनिक बहस का विषय रहा है.

क्या बेसिक लॉ संविधान के बराबर हैं?

बेसिक लॉ देश की संस्थाओं और कुछ अधिकारों के लिए मूल नियम तय करते हैं. इस अर्थ में वे संवैधानिक कानून हैं. लेकिन इजराइल के पास अभी भी ऐसा एक अंतिम, एकीकृत दस्तावेज नहीं है जिसे सभी लोग औपचारिक संविधान कहें. बेसिक लॉ की संख्या, उनका दायरा और उन्हें बदलने की प्रक्रिया भी इस बहस का हिस्सा हैं. कुछ बेसिक लॉ में बदलाव के लिए विशेष बहुमत की शर्तें हैं, जबकि हर बेसिक लॉ पर एक जैसी शर्त लागू नहीं होती. इसी वजह से आलोचक कहते हैं कि इस व्यवस्था में स्पष्टता और स्थिरता की कमी हो सकती है. समर्थक इसे ऐसा लचीला ढांचा मानते हैं जो अलगअलग विचारों वाले समाज में धीरेधीरे विकसित हुआ है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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