सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
सिर्फ नाम समान होने से डुप्लीकेट वोटर नहीं माना जा सकता… अखिलेश के आरोपों पर बोला चुनाव आयोग​ | Devar Bhabhi Kand: भाभी ने देवर के साथ किया ऐसा कांड, जानकर हो जाएंगे हैरान​ | Kanpur News: घर से 30 मीटर दूर खेल रहा था 3 साल का निहाल, पानी के टैंक में गिरकर मौत; डेढ़ घंटे बाद चला पता​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

धमकी, फिर हत्या… क्या माफिया के हाथों मौत पर परिवार को मिलेगा बीमा का पैसा?​

अगर किसी व्यक्ति की गैंगस्टर या माफिया पहले से प्लान बनाकर हत्या कर दे, तो क्या उसके परिवार को बीमा कंपनी से दुर्घटना में मौत होने पर मिलने वाला अतिरिक्त पैसा मिल सकता है? आमतौर पर हत्या को जानबूझकर किया गया अपराध माना जाता है, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि परिवार को एक्सीडेंटल […]

अगर किसी व्यक्ति की गैंगस्टर या माफिया पहले से प्लान बनाकर हत्या कर दे, तो क्या उसके परिवार को बीमा कंपनी से दुर्घटना में मौत होने पर मिलने वाला अतिरिक्त पैसा मिल सकता है? आमतौर पर हत्या को जानबूझकर किया गया अपराध माना जाता है, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि परिवार को एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट का पैसा नहीं मिलेगा? पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में अहम फैसला सुनाया है. आयोग ने कहा कि किसी व्यक्ति की हत्या पहले से प्लान बनाकर की गई हो, तो सिर्फ इस आधार पर उसे बीमा पॉलिसी के तहत दुर्घटना से हुई मौत के कवरेज से बाहर नहीं किया जा सकता. आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम को चार बीमा पॉलिसियों के तहत अतिरिक्त दुर्घटना लाभ देने का निर्देश दिया है.

इस फैसले में आयोग ने साफ किया कि हत्या करने वाले का इरादा और बीमा पॉलिसी के तहत मौत को दुर्घटना माना जाना, दो अलगअलग बातें हैं. अगर बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर पाती कि पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक मृतक का परिवार अतिरिक्त लाभ पाने का हकदार नहीं है, तो सिर्फ हत्या को पहले से प्लान किया गया अपराध बताकर क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता है.

बीमा क्लेम पर उपभोक्ता आयोग ने क्या कहा?

आयोग के फैसले की 5 बड़ी बातें

  1. हत्या होने पर भी मिल सकता है बीमा: किसी व्यक्ति की हत्या पहले से प्लान बनाकर की गई हो, तो भी उसके परिवार को एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट मिल सकता है.
  2. हत्या का इरादा और बीमा कवरेज अलग: हमलावर ने जानबूझकर हत्या की, इसका मतलब यह नहीं कि बीमा के नजरिए से मौत को दुर्घटना नहीं माना जा सकता.
  3. LIC को देना होगा अतिरिक्त पैसा: आयोग ने चार बीमा पॉलिसियों के तहत डबल एक्सीडेंट बेनिफिट देने का निर्देश दिया.
  4. मृतक की गलती का सबूत जरूरी: बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि मृतक ऐसी किसी गतिविधि में शामिल था, जिसके कारण उसकी हत्या हुई.
  5. 6 फीसदी ब्याज भी देना होगा: आयोग ने 30 अप्रैल 2021 से 6 फीसदी सालाना ब्याज के साथ अतिरिक्त बीमा लाभ देने का आदेश दिया.

दुकान पर बैठे व्यक्ति की गैंगस्टर ने कर दी थी हत्या

यह मामला तजिंदर सिंह की हत्या से जुड़ा है. 14 जुलाई 2020 को पंजाब के मोगा में उनकी दुकान पर बैठे हुए कुछ अज्ञात हमलावरों ने उनकी हत्या कर दी थी. तजिंदर सिंह ने LIC से चार जीवन बीमा पॉलिसियां ले रखी थीं. इन सभी पॉलिसियों में डबल एक्सीडेंट बेनिफिट यानी दुर्घटना में मौत होने पर अतिरिक्त बीमा राशि देने का प्रावधान था.

चारों पॉलिसियों की कुल बेसिक सम एश्योर्ड यानी मूल बीमा राशि 26.6 लाख रुपये थी. तजिंदर सिंह की मौत के बाद LIC ने उनके परिवार को सामान्य मृत्यु लाभ का भुगतान कर दिया, लेकिन एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट देने से इनकार कर दिया. इस अतिरिक्त लाभ के तहत परिवार को सामान्य बीमा राशि के अलावा और पैसा मिल सकता था.

LIC का कहना था कि सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर की गई जांच से पता चलता है कि हत्या गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह उर्फ सुखा गिल लाम्मे ने करवाई थी. कंपनी के मुताबिक, हत्या इलाके में दहशत फैलाने के लिए पहले से प्लान बनाकर की गई थी. इसलिए इसे दुर्घटना में हुई मौत मानकर अतिरिक्त बीमा राशि नहीं दी जा सकती. मोगा जिला उपभोक्ता आयोग ने नवंबर 2022 में LIC की इस दलील को स्वीकार करते हुए परिवार की शिकायत खारिज कर दी थी. इसके बाद परिवार ने राज्य उपभोक्ता आयोग का रुख किया.

बीमा क्लेम के लिए क्या है जरूरी

LIC की दलील क्यों नहीं मानी गई?

पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में न्यायिक सदस्य एचपीएस महाल और सदस्य किरण सिबल की पीठ ने मामले की दोबारा सुनवाई की. आयोग ने पाया कि LIC यह साबित करने में नाकाम रही कि तजिंदर सिंह खुद किसी ऐसी गतिविधि में शामिल थे, जिसके कारण उनकी हत्या हुई थी.

LIC ने गैंगस्टर की एक कथित सोशल मीडिया पोस्ट का भी हवाला दिया था. इस पोस्ट में तजिंदर सिंह के साथ विवाद होने का दावा किया गया था. हालांकि, आयोग ने गौर किया कि इस दावे की पुष्टि न तो एफआईआर से होती है और न ही पुलिस की जांच रिपोर्ट से.

आयोग ने LIC के साल 2007 के एक सर्कुलर का भी जिक्र किया. इस सर्कुलर के मुताबिक, हत्या के मामलों में एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट रोकने की जरूरत नहीं है, बशर्ते पुलिस रिकॉर्ड में ऐसा कोई संकेत न हो कि हत्या मृतक के उकसाने पर हुई थी या बीमा क्लेम करने वाले परिवार की इसमें मिलीभगत थी.

आयोग ने माना कि LIC ने इस मामले में जरूरत से ज्यादा तकनीकी नजरिया अपनाया. कंपनी ऐसा कोई पॉलिसी एक्सक्लूजन क्लॉज यानी शर्त भी पेश नहीं कर सकी, जिसके आधार पर यह साबित हो कि तजिंदर सिंह की मौत अतिरिक्त बीमा कवरेज के दायरे में नहीं आती.

परिवार को मिलेगा अतिरिक्त बीमा लाभ, 6 फीसदी ब्याज भी

राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला आयोग के पुराने आदेश को रद्द कर दिया. साथ ही LIC को निर्देश दिया कि वह तजिंदर सिंह की चारों बीमा पॉलिसियों के तहत एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट का भुगतान करे. इसके साथ ही 30 अप्रैल 2021 से 6 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा.

इस फैसले का मुख्य आधार यह है कि हत्या का पहले से प्लान किया जाना अपने आप में अतिरिक्त बीमा लाभ को खारिज करने का पर्याप्त कारण नहीं है. बीमा कंपनी को पॉलिसी की शर्तों और मामले से जुड़े सबूतों के आधार पर अपना फैसला लेना होगा.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हत्या के हर मामले में परिवार को एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट अपने आप मिल जाएगा. इसके लिए संबंधित बीमा पॉलिसी की शर्तें, पुलिस रिकॉर्ड और मामले के तथ्य अहम होंगे. पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग का यह फैसला बताता है कि बीमा कंपनी सिर्फ हत्या को जानबूझकर किया गया अपराध बताकर क्लेम खारिज नहीं कर सकती. उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि पॉलिसी की किन शर्तों के आधार पर अतिरिक्त बीमा लाभ देने से इनकार किया जा रहा है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY